स्मार्ट बॉस इन 7 बातों से बचते हैं

  • 18 मई 2015
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आपने कभी सोचा कि प्रतिभाशाली लोग अपनी आकर्षक नौकरियां क्यों छोड़ देते हैं?

इस सप्ताह लिंक्डइन इंफ्लूएंशर्स पर इसी टॉपिक पर बहस हुई.

दरअसल किसी भी कंपनी के मैनेजर या लीडर ही काम की जगह को नई ऊँचाई तक ले जाते हैं या फिर काम करने के माहौल को बिगाड़ देते हैं.

उनका व्यवहार और सार्वजनिक तौर पर कही गई बातें लीडरशिप को तय करती हैं. कई बार वो जो नहीं करते, वही समस्या बन जाता है - उचित प्रशिक्षण न दिलाना, सही व्यक्ति को प्रोमोशन न देना.

लिंक्डइन इंफ्लूएंशर्स पर दो विशेषज्ञों की राय इस प्रकार है:

ब्रायन डि हाफ़, 'अहा' के सीईओ

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बॉस अपनी टीम के साथ किस तरह से संवाद बनाता है, ये सबसे महत्वपूर्ण होता है.

हाफ़ ने अपनी पोस्ट, थ्री थिंग्स स्मार्ट बॉसेज नेवर टेल इंप्लाईज में लिखा, " प्रभावी संवाद वही होता है जिसमें संवाद की गुंजाइश दोनों तरफ़ से होती है. मैनेजर और दूसरे टीम लीडरों के लिए मानक के स्तर ऊँचे होने चाहिए और उन्हें कार्यक्षेत्र में अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास करते हुए आदर्श आचरण दिखाना चाहिए."

मैनेजरों और टीम लीडरों को अपनी बातचीत से पॉजीटिव एटीट्यूड को बढ़ावा देना चाहिए और कम से कम ये तीन बातें तो कभी नहीं कहनी चाहिए:

1. ये मैं क्या सुन रहा हूं- कई बार शीर्ष पर होने के चलते बॉस एकाकी होते हैं. ऐसे में मैनेजर कई बार इस तरह से गॉसिप को बढ़ावा देते हैं. लेकिन उन्हें समझना चाहिए दफ़्तर में गॉसिप की कोई जगह नहीं होती. गॉसिप से ये टीम के साथियों का भरोसा खो देते हैं और यह अपरिपक्वता को दर्शाता है.

2. फलाँ के साथ क्या हुआ?- कई बार मैनेजर किसी कर्मचारी के बारे में इसी तरह से दूसरे कर्मचारी से सूचना मांगते हैं. हो सकता है कि वो वास्तविक चिंता के साथ उस शख़्स के बारे में जानना चाहते हों लेकिन इससे दूसरा कर्मचारी मुश्किल स्थिति में आ जाता है. यदि वो बॉस को बताता है तो वह अपने साथी का भरोसा तोड़ता है. ये कमज़ोर नेतृत्व का संकेत देता है.

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3. मैं ये सुनना नहीं चाहता- जब बॉस इसका इस्तेमाल करते हैं तब वो यह सोचना बंद कर देते हैं कि वो ग़लत भी हो सकते हैं और दूसरा शख़्स सही भी हो सकता है. इस एक कथन से वो अपने कर्मचारियों के साथ संवाद की प्रक्रिया को झटके से बंद कर देते हैं.

मिशेल एम स्मिथ, वाइस प्रेसीडेंट, ओसी टैनर

मिशेल की पोस्ट का नाम है- हाउ टू लूज़ योर बेस्ट इंप्लाई इन टेन इज़ी स्टेप?

मिशेल ने अपनी पोस्ट में मैनेजरों और टीम लीडरों की उन खामियों का जिक्र किया है जिनके चलते पेशेवर नौकरियां छोड़ देते हैं. उन वजहों में चार प्रमुख वजह हैं-

4. ख़राब प्रबंधन- पुराने तौर तरीकों से काम करने वालों को प्रमोट करना. क्रिएटिव थिंकिंग की जगह पुरानी सोच को तरजीह देना, नए विचार, उत्साह और डायनामिज्म से घबराना.

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5. घंटों पर नजर, परफ़ॉर्मेंस पर नहीं- हर किसी पर नज़र रखनेा, इस काम के लिए महंगा स्टाफ रखना. समय के बेहतर इस्तेमाल में लचीलापन न बरतना. सोशल मीडिया की साइटों पर पाबंदी लगाना. काम के दिन में कोई निजी काम करने की इजाजत न देना. कर्मचारियों से वीकएंड पर काम करने की उम्मीद करना.

6. प्रशिक्षण से बेपरवाह- अपने कर्मचारियों से एक ही काम और वो भी एक ही तरीके से कराना, उन्हें प्रशिक्षित करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाना.

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7. टीम में अव्यवस्था- टीम में सभी उम्र वर्ग और अलग अलग क्षमता के लोगों को शामिल करने में दिलचस्पी नहीं दिखाना. बल्कि एक ही तरह के लोगों को एक साथ टीम बनाकर काम देना, समस्या के हल के लिए सुरक्षित पुराना रास्ता अपनाना, प्रयोग से बचना.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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