इसराइली फ़ौजी जो न यहूदी हैं, न ईसाई !

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कई लोगों को ये जानकर हैरानी होगी कि इसराइल में केवल इसराइली और फ़लस्तीनी समुदाय के लोग नहीं रहते.

वहाँ कई अन्य संस्कृतियों के लोग भी रहते हैं और उनमें से एक हैं इसराइली फ़ौज से ख़ासा लगाव रखने वाले और उसमें शामिल होने वाले ड्रयूज़.

दरअसल, इसराइल में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को - ए, बी, सी, डी, ई कह सकते हैं. यानी, अरब, बेडूइन, कॉप्ट, ड्रयूज़ और इथोपियाई.

इसराइल के बारे में जानने वाले लोगों ने बेडूइन के बारे में कुछ ना कुछ तो सुना होगा लेकिन ड्रयूज़ समुदाय पर रहस्य का पर्दा बना हुआ है.

ये समुदाय उत्तरी कारमेल, गैलिली और गोलन हाइट्स के इलाके के गांवों में बसता है. ये गांव पहाड़ों में काफी ऊंचाई पर स्थित होते हैं.

इन इलाकों में ड्रयूज़ महिलाओं को सड़क किनारे पिटा ब्रैड, जैतून का तेल, लाबनेह और चिकनाई वाला दही बेचते हुए पाया जा सकता है. सवाल यह है कि ड्रयूज़ समुदाय के लोग आखिरकार कौन हैं?

दोस्ताना समुदाय

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इस समुदाय को दोस्ताना माना जाता है. इसराइल के अरब अल्पसंख्यकों में 82.6 फ़ीसदी लोग सुन्नी मुस्लिम हैं, जबकि 9 फ़ीसदी ड्रयूज़ और 9 फ़ीसदी ईसाई हैं. दुनिया भर में करीब दस लाख ड्रयूज़ होंगे.

इनमें एक लाख चार हज़ार इसराइल में रहते हैं बाकी सीरिया और लेबनान में. ड्रयूज़ अरबी बोलते हैं, लेकिन वो मुसलमान नहीं है. वो खुद को एकेश्वरवादी बताते हैं.

ड्रयूज़ धर्म की स्थापना 10वीं शताब्दी में मिस्र में, फातिमा खलीफा के समय के दौरान, उसके नेता अल हाकिम ने की थी. वो मानते थे कि वो भगवान के अवतार हैं. ड्रयूज़ उनके अनुयायियों का धर्म है, जो शिया से ड्रयूज़ बन गए.

उत्पीड़न से बचने के लिए वे भाग कर लेबनान, सीरिया और इसराइल के पर्वतीय इलाकों में बस गए.

इस्लामी और हिंदू साथ-साथ

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ड्रयूज़ समुदाय के लोग इस्लाम, हिंदू और यूनानी दर्शन को मानते हैं. वे यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्मों के पैगम्बरों में भी आस्था रखते हैं. इस समुदाय के लोगों का अपना झंडा भी है जिसे वे ड्रयूज़ स्टार कहते हैं. पांच रंगों वाला ये झंडा पांच तरह के पैगंबरों का प्रतीक है.

इसराइल में ड्रयूज़ समुदाय के कई पवित्र स्थल हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण है नेबी शुएब, जहां जेथ्रो की कब्र है. जेथ्रो मूसा के ससुर थे और ड्रयूज़ के मुताबिक एकेश्वरवाद के संस्थापक थे.

गैलिली झील पर झांकता गुंबद और उसका अहाता, वही जगह है जहां 1187 में सीरिया और मिस्र के पहले सुलतान सलादीन ने ईसाई धर्म को तलवार के बल पर फैलाने वाले क्रूसेडर्स को शिकस्त दी थी.

दूसरी सबसे अहम जगह है साबालान का मकबरा. ये हुर्फ़ीश गांव में स्थित है. यह गांव समुद्री तट पर बसे शहर नाहारिया में है. यहां 11वीं सदी में हुए ड्रयूज़ समुदाय के पैगंबर ज़ेबूलूम का मकबरा है.

400 पुराना दलियात अल कारमेल

अरब गांव कफ़ार यासिफ़ से 20 किलोमीटर दक्षिण में है स्थित नाबी अल खादर. अंजीर के पड़ों से घिरा यह इलाका ख़ूबसूरत पिकनिक स्पॉट है. यहां ड्रयूज़ के एक अन्य पैगंबर इलिजाह की कब्र है.

ड्रयूज़ समुदाय के लोगों का सबसे बड़ा केंद्र है दलियात अल कारमेल. इसराइल के सबसे बड़े शहरों में ले एक है दलियात अल कारमेल जो 400 साल पहले बना था.

यहां के बाज़ार में दारबुका ड्रम, शीशा पाइप (हुक्का), बर्तन, आभूषण और कलात्मक चीजें मिलती हैं.

शहर के मुख्य बाज़ार के उत्तरी हिस्से पर ड्रयूज़ हेरिटेज सेंटर है, जहां के म्यूज़ियम में ड्रयूज़ लोगों द्वारा बनाई गई कलाकृतियां, हथियार और बड़ी-बड़ी मूछों वाले कई ड्रयूज़ पुरुषों की तस्वीरें हैं.

सैन्य सेवा में योगदान

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ड्रयूज़ हेरिटेज सेंटर के क़रीब ही मौजू है बेट ओलिफेंट, जो ब्रिटिश क्रिश्चयन लेखक लारेंस ओलिफेंट का घर हुआ करता था.

वे यहां 1882 में बसने आ गए थे. अब उनका घर सैन्य मेमोरियल के तौर इस्तेमाल किया जाता है. यहां उन ड्रयूज़ सैनिकों की चीजें रखी हुई हैं जो कभी इसराइली डिफेंस फोर्स में शामिल थे.

ड्रयूज़ लोग अपने सैन्य सेवा को लेकर ख़ासा गर्व महसूस करते थे.

ड्रयूज़ समुदाय के नईम अरायदी वो व्यक्ति हैं जिन्हें नॉर्वे में इसराइल का राजदूत नियुक्त किया गया है.

अरायदी कहते हैं, "ड्रयूज़ समुदाय वाकई में महान समुदाय है. हमारी निष्ठा बेहद मज़बूत है. इसराइल के यहूदी नागरिकों समेत मैंने समाज का ऐसा दूसरा वर्ग नहीं देखा जिसकी देश के प्रति ऐसी निष्ठा हो."

फ़ौजी बनने के प्रति बदलता रुझान

लेकिन अब ड्रयूज़ समुदाय के इसराइली फ़ौज में जाने के प्रति रुझान में बदलाव आता दिख रहा है.

33 साल के स्थानीय ड्रयूज़ आहेब असद बताते हैं, "हम लोगों के लिए इसराइल अच्छी जगह है. लेकिन हमारी सैन्य सेवाओं का न तो उचित सम्मान होता है और न ही हमें उसका फ़ायदा मिलता है."

उनके अनुसार उनके कई ड्रयूज़ दोस्त लैंडस्केपिंग और कनस्ट्रक्शन में कम वेतन की नौकरियां करते हैं और इसराइली समाज में आगे बढ़ने में दिक्कत महसूस करते हैं.

परंपरागत है खान-पान

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इतिहास भी बताता है कि ड्रयूज़ न केवल भरोसेमंद होते हैं बल्कि दूसरों का स्वागत करते हैं. असद कहते हैं, "हो सकता मेरे विचार निष्पक्ष न हो, लेकिन कोई दूसरा समुदाय हमारी तरह से मेहमानों की आवभगत नहीं करता. हम लोगों से प्यार करते हैं."

ड्रयूज़ लोगों के सेवा सत्कार को देखने के लिए पर्यटक दलियात के निकटवर्ती गांव इसफिया पहुंचते हैं.

वहां 'नेशंस एंड फ़्लेवर्स' ग्रुप आपका खाना परंपरागत ड्रयूज़ परिवार के साथ अरेंज करता है. ज्यादातर ड्रयूज़ खाना स्थानीय स्तर पर उगाए गए पौधों और जड़ी बूटी से बनाया जाता है. ड्रयूज़ समुदाय के लोग अपने खूब बड़े और फ्लैट पिटा ब्रैड के लिए भी जाने जाते हैं.

गैलिली क्षेत्र की पहाड़ियों में ड्रयूज़ लोगों के गांव सीरियाई सीमा तक फैले हुए हैं. इनमें सबसे बड़ा गांव बेट जान है, जो माउंट मेरॉन की चोटी पर स्थित है. यह इसराइल में सबसे ऊंची जगह है, समुद्र तट से 940 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जहाँ से गैलिली, लेबनान और सीरिया का पूरा नज़ारा देखा जा सकता है.

इसराइली सीमा से सटे सीरिया में भी 9000 ड्रयूज़ रहते हैं. इनके अपने सेब और चेरी के बाग भी हैं. कई दशकों से अशांत रहे इस इलाके में ये शांति के साथ रहने वाले लोग हैं.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.

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