तीन मुल्कों ने पनाह देने से किया मना

  • 15 मई 2015
थाईलैंड में फंसी बोट इमेज कॉपीरइट BBC World Service

तीन देशों - थाइलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया में प्रवेश से मना कर दिए गए और कई दिनों से समुद्र में फंसे 600 से ज़्यादा रोहिंग्या मुसलमानों को स्थानीय मछुआरों ने पनाह दी है.

वो इंडोनेशिया के आचे प्रांत पहुँच गए हैं जहां उन्हें स्थानीय लोग भोजन और दूसरी मदद मुहैया करवा रहे हैं.

मानव तस्कर इन्हें समुद्र में छोड़कर भाग गए थे.

रिपोर्टों के मुताबिक एक और नाव को इंडोनेशिया की नौसेना ने वापस समुद्र में लौटा दिया.

एक हफ़्ते तक थाईलैंड के तट पर फंसी एक नाव को थाईलैंड के अधिकारियों ने वहां से हटाया है जिसमें क़रीब 300 अल्पसंख्यक मुसलिम रोहिंग्या समुदाय के लोग सवार हैं.

इस नाव पर सवार परिवारों ने बताया कि रातों-रात इस नाव पर बंदूकें लेकर वर्दीधारी लोग सवार हुए और उन्होंने नाव के टूटे इंजन की मरम्मत की.

इसके बाद इस नाव को मलेशिया की ओर दक्षिण में लेकर गए. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस नाव पर सवार क़रीब 300 लोगों की स्वास्थ्य जांच की ज़रूरत है.

हालात नाज़ुक

इन लोगों ने क़रीब तीन महीने सीमित खाना और पानी के साथ अपना वक़्त ग़ुज़ारा है.

वहीं मलेशिया के अधिकारियों ने कहा है कि वे किसी भी प्रवासी को अपने देश में आने की इजाज़त नहीं देंगे.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा कि नाव में सवार लोगों के प्रवेश को लेकर दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों की मनाही से उन्हें हैरानी हुई है और वह सतर्क हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption हालात इतने नाज़ुक हैं कि लोगों को अपना मूत्र पाने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है

थाईलैंड के अधिकारियों ने बताया कि ये प्रवासी तट के किनारे नहीं जाना चाहते थे बल्कि वे मलेशिया की तरफ़ जाने की अपनी यात्रा जारी रखना चाहते थे.

ये लोग अंडमान समुद्र में एक हफ्ते से फंसे हुए थे. उनके पास खाने-पीने के लिए कुछ भी नहीं था.

हालात इतने खराब हैं कि उन्हें अपना मूत्र पीने को मजबूर होना पड़ रहा है.

'10 की मौत'

नाव में सवार लोगों ने पहले बीबीसी को बताया था कि चालक दल के सदस्य नाव छोड़ कर चले गए और उन्होंने इंजन भी बंद कर दिया.

उन्होंने कहा कि फंसे हुए लोगों में से दस की मौत हो गई हैं. उनके शवों को समुद्र में फेंक दिया गया.

माना जा रहा है कि थाइलैंड और मलेशिया के समुद्र तटों के आसपास ऐसे हज़ारों प्रवासी फंसे हुए हैं.

इमेज कॉपीरइट epa
Image caption रोहिंग्या म्यांमार में तेज़ी से सिकुड़ता समुदाय है

इनमें से ज़्यादातर रोहिंग्या मुसलिम समुदाय के हैं जो वापिस म्यांमार भी नहीं जा सकते क्योंकि वहां उन्हें बतौर नागरिक मान्यता प्राप्त नहीं है.

उनसे वहां दुर्व्यवहार भी किया जाता है.

ये प्रवासी दो महीने से समुद्री सफर कर रहे हैं. नौका में 50 औरतें और 84 बच्चे सवार हैं. उनकी स्थिति तब खराब हुई जब चालक ने इस नाव को छोड़ दिया.

रोहिंग्या कौन हैं?

इमेज कॉपीरइट Reuters

- रोहिंग्या म्यांमार में रहने वाला, तेज़ी से खत्म होता मुसलिम समुदाय है.

- माना जाता है कि ये उन मुसलिम व्यापारियों के वंशज हैं जो लगभग एक हजार साल पहले यहां आकर बस गए थे.

- रोहिंग्या बांग्लादेश, सऊदी अरब और पाकिस्तान में भी रहते हैं.

- म्यांमार में इन पर लगातार अत्याचार किया जाता है. इनके पास भूमि संबंधी कोई अधिकार नहीं हैं और उन पर बहुत सी बंदिशें हैं.

- बांग्लादेश में बड़ी संख्या रोहिंग्या काफी गरीब हैं, उनके पास न तो मान्य दस्तावेज़ हैं न ही नौकरी या काम के अवसर हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार