कार रेस सीरीज़ ने की 'चीयर लीडर्स' से तौबा

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भारत की आईपीएल क्रिकेट सीरीज़़ में 'चीयर लीडर्स' पर किसी को आपत्ति हो या न हो, लेकिन स्पोर्ट कार रेसिंग की एक अहम प्रतियोगिता ने रेसों के दौरान अर्ध नग्न ग्रिड गर्ल्स को इस्तेमाल न करने की घोषणा की है.

दुनिया भर की स्पोर्ट्स कारों की सीरीज़़ एफआईए वर्ल्ड एंड्यूरेंस चैंपियनशिप (डब्ल्यूईसी) ने हाल में ही में ये घोषणा की है.

सीरीज़ की ओर से कहा गया है कि खेल को प्रमोट करने के लिए छोटे कपड़े पहने महिलाओं का होना अब अतीत की बात है. भविष्य में इनका इस्तेमाल नहीं होगा.

अगर आप ग्रिड गर्ल्स के बारे में नहीं जानते हों, तो ये ख़ूबसूरत लड़कियां मोटरस्पोर्ट्स रेसिंग की दुनिया का महत्वपूर्ण घटक होती हैं.

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इनका काम स्किन टाइट कपड़ों में रेस शुरू होने से पहले रेसिंग कार के साथ खड़ा होना होता है और अमूमन इनके हाथों में कार के स्थान के नंबर का प्ले कार्ड भी होता है.

बदलाव भरा फ़ैसला

इस फ़ैसला की काफी प्रशंसा हो रही है. वर्ल्ड एंड्यूरेंस चैंपियनशिप की समर्थक केटी मेक कहती हैं, "मोटर स्पोर्ट्स को आगे बढ़ने की ज़रूरत थी, महिलाओं को केवल सेक्स ऑबजेक्ट के तौर पर देखना सही नहीं था."

27 साल की केटी फ्लोरिडा में रहती हैं और डब्ल्यूईसी के फैसले का जोरदार समर्थन करते हुए कहती हैं, "इस फ़ैसले ने ये भी संदेश दिया कि रेसिंग केवल पुरुषों का खेल नहीं है."

केटी मेक ने डब्ल्यूईसी के फ़ैसले के समर्थन में ट्वीट किया. इसके बाद उन्हें कई जवाब मिले और कई ने उनके संदेश को री-ट्वीट किया.

रेसिंग फैंस से लेकर इंडी-कार की महिला चालक पिप्पा मान ने भी केटी के सुर से सुर मिलाया है.

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मेक ने कहा, "बिना बात किए आप किसी सोच में बदलाव नहीं ला सकते या फिर ख़राब स्थिति को बदल नहीं सकते."

रेसिंग की दुनिया में महिलाओं की मौजूदगी के संदर्भ में का मान बेहतरीन उदाहरण है.

महिलाओं की भागीदारी

ट्विटर के जरिए जिस तरह से दूसरी महिलाओं ने केटी से संपर्क किया है, उसने उन पर ख़ासा असर डाला है.

उन्होंने कहा, "कई महिलाओं ने मुझसे संपर्क किया है और बताया है कि उन्हें ट्रैक पर सेक्सिज्म (लिंग भेदभाव) का शिकार बनाया गया. उनकी कहानियां दिल दहला देने वाली थीं."

हालांकि केटी खुद को इस अभियान की लीडर के रूप में नहीं देखती हैं. वो मानती हैं कि मोटरस्पोर्ट्स की छवि दुनिया को अपनी सेहत की लिए बदलना चाहिए.

मोटरस्पोर्ट्स में ज्यादातर रेसर पुरुष हैं लेकिन केटी के मुताबिक ये कोई समस्या नहीं है.

केटी को 2013 में थायरायड कैंसर हुआ तो उनका इलाज करने वाली डॉक्टर भी स्पोर्ट्स कार की ड्राइवर थीं, जो ग्रैंड एम सीरीज़़ की रेस में हिस्सा ले चुकी थीं.

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उनकी पहली मुलाकात भी इस डॉक्टर से रेसिंग प्रतियोगिताओं के दौरान ही हुई थी.

बहरहाल केटी मैक ये मानती हैं कि इस खेल को विकसित करने की जरूरत है. वो कहती हैं, "मुझे रेसिंग से प्यार है. मैं रेस के दौरान लाइव ट्वीट करती हूं क्योंकि मुझे उम्मीद होती है कि रेस पसंद नहीं करना वाला कोई व्यक्ति भी हो सकता है कि रेस को पसंद करने लगे."

केटी चाहती हैं कि मोटरस्पोर्ट्स की दुनिया में महिलाओं को लेकर जो सोच है, उसमें बदलाव आना चाहिए. उनके मुताबिक कई महिलाएं अब रेस को पसंद करने लगी हैं और युवा लड़कियां भी रेसिंग को लेकर उत्साहित नजर आई हैं.

सोच में बदलाव की जरूरत

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केटी मैक के मुताबिक मोटर रेस ऐसा खेल है जो लिंग भेदभाव से परे हर किसी को पसंद आ सकता है, लड़कियों को भी और लड़कों को भी.

वो कहती हैं, "रेसिंग दुनिया के दूसरे खेल जैसा ही है. बेहतरीन मशीन का ट्रैक पर भागने का रोमांच अपने आप इसका दीवाना बना देता है. आप पर इसका असर नहीं हो, ये संभव ही नहीं है."

जाहिर है कि वर्ल्ड एंड्यूरेंस चैंपियनशिप (डब्ल्यूईसी) ने ग्रिड गर्ल्स को हटाने की शुरुआत की है और इससे फार्मूला वन सहित दूसरी रेसों पर भी ऐसा करने की मांग ज़ोर पकड़ेगी.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें जो बीबीसी ऑटो पर उपलब्ध है.

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