ये है अल क़ायदा का ऐप्लीकेशन फ़ॉर्म

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अमरीका ने ओसामा बिन लादेन के ख़ुफ़िया ठिकाने से ज़ब्त किए गए जिन दस्तावेजों को बुधवार को जारी किया है उनमें मुंबई, पुणे और इस्लामाबाद के मैरियट होटल पर हुए चरमपंथी हमलों का भी ज़िक्र है.

कई चिठ्ठियों में अमरीका, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन को और सबक सिखाने की बात भी की गई है.

ओसामा को था 'पोर्नोग्राफ़ी का भी शौक़'

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इन्हीं दस्तावेज़ों में अल क़ायदा में शामिल होने के लिए एक आवेदन पत्र या ऐप्लीकेशन फ़ॉर्म भी है जिनमें चरमपंथी उम्मीदवारों से कई तरह के सवाल पूछे गए हैं.

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अमरीकी ख़ुफ़िया अधिकारियों ने जो उनका अनुवाद किया है उनके अनुसार:

--आपके शौक क्या है और अपना खाली वक्त आप कैसे गुज़ारते हैं.

--आपकी रूचि साहित्य में है या विज्ञान में

--जेहाद की ज़मीन पर आपके आने की तारीख

--क्या आपको किसी अदालत में दोषी पाया गया है? कब और किस अपराध के लिए.

--क्या आपको किसी तरह की गंभीर या खानदानी बीमारी है?

ये सवाल बेहद आम से हैं लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो सीधे तौर से चरमपंथी कार्रवाई से जुड़े हैं. उनमें पूछा गया है:

--क्या आप किसी आत्मघाती हमले को अंजाम देना चाहते हैं?

--अगर आप शहीद हो जाते हैं तो हम किससे संपर्क करें? उनका पता और फ़ोन नंबर उपलब्ध करवाएं.

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मुंबई हमलों की तारीफ़

अल क़ायदा के एक वरिष्ठ नेता की तरफ़ से जारी दस्तावेज़ में मुंबई हमलों को एक “बहादुरी भरा कारनामा” कहा गया है किया है और पुणे में जर्मन बेकरी पर हुए हमले को “ख़ूबसूरत बम धमाका कहा गया है.”

भारत का ज़िक्र एक और दस्तावेज़ में भी है जिसमें कहा गया है कि अमरीका, इसरायल और भारत मिलकर पाकिस्तान को खत्म करना चाहते हैं और परवेज़ मुशर्रफ़ भी उनका साथ दे रहे हैं.

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के लिए भी अपशब्द का इस्तेमाल किया गया है.

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अमरीकी अधिकारियों के अनुसार ये सभी दस्तावेज़ बिन लादेन के खिलाफ़ 2011 में ऐबटाबाद में हुई फ़ौजी कार्र्वाई के बाद बरामद किए गए थे.

हाल ही में जाने माने ख़ुफिया पत्रकार सीमोर हर्ष ने दावा किया था कि ये कार्रवाई अकेले अमरीका की नहीं बल्कि पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ मिलकर की गई थी और वहां जिन दस्तावेज़ों और कंप्यूटर हार्ड डिस्क के मिलने की बात कही जा रही है वो सब मनगढ़ंत हैं.

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