नन्हे शुभचिंतक ने नेपालियों के लिए पैसे जुटाए

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Image caption नींव के पिता भारतीय मूल के हैं और नेपाल में पैदा हुए थे. उनका माँ भी नेपाल से हैं.

अमरीका में रह रहे एक बच्चे ने नेपाल के भूकंप पीड़ितों के लिए 'क्राउड फंडिंग' से लगभग 35 हज़ार डॉलर जमा किए हैं.

आठ वर्षीय नींव सराफ़ मेरीलेंड में रहते हैं. उन्होंने क्राउड फ़ंडिंग वेबसाइट क्राउड राइज़ के ज़रिए ये पैसे जुटाए.

नींव ने बीबीसी से फ़ोन पर कहा, "मेरे माँ-बाप नेपाल से हैं. मुश्किल वक़्त में मैं नेपाल की मदद करना चाहता था. मैंने सोचा नहीं था कि इतने पैसे जमा हो जाएंगे."

उनके पिता प्रकाश सराफ़ ने बताया, "हमने सोचा था एक-दो हज़ार डॉलर जुटेंगे और नींव उसमें ही ख़ुश हो जाएगा."

वे कहते हैं, "नींव के काम से उन्हें जो ख़ुशी मिली है वह लाखों डॉलर की कमाई से बढ़कर है."

जन्मदिन पर मदद

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Image caption नींव ने क्राउड फ़ंडिंग वेबसाइट क्राउडराइज़ के ज़रिए ये पैसे जमा किए.

नींव नेपाल में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए अपने जन्मदिन 24 मई तक 25 हज़ार डॉलर जुटाना चाहते थे.

प्रकाश बताते हैं, "हम अपने घर में एक गुल्लक रखते हैं. हम जन्मदिन और वर्षगांठ पर ख़र्च करने के बजाए पैसा उसमें डाल देते हैं और उस पैसे को साल में एक बार ज़रूरतमंदों को देते हैं."

इस बार नींव ने अपने जन्मदिन पर नेपाल पीड़ितों की मदद की बात की तो हमने क्राउड फ़ंडिंग पेज बना दिया.

क्राउड फ़ंडिंग के लिए जुटाया गया पैसा नेपाल में भूकंप पीड़ितों के लिए काम कर रहे संगठन अमरीका नेपाल मेडिकल फ़ाउडेशन के खाते में पहुँच रहा है.

नन्हा शुभचिंतक

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Image caption नींव का कहना है कि वे आगे भी नेपाल की मदद करते रहना चाहते हैं.

फ़ाउडेशन से जुड़े डॉक्टर संतोष सपकोटा ने बीबीसी को अमरीका से फ़ोन पर बताया, "हमने अब तक आठ लाख डॉलर नेपाल की मदद के लिए जुटाए हैं. नींव हमारे सबसे नन्हे शुभचिंतक हैं. उनकी मदद हमारे लिए बेशक़ीमती है. हमें उन पर गर्व है. आज उनके जन्मदिन पर हम उन्हें अपने संगठन की आजीवन सदस्यता दे रहे हैं."

डॉ. सपकोटा कहते हैं, "नेपाल में भूकंप पीड़ितों के लिए काम करना बड़ी चुनौती है. हम नेपाल सरकार के साथ मिलकर ज़मीन पर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए काम कर रहे हैं."

नींव आगे भी नेपाल की मदद करते रहना चाहते हैं. वे कहते हैं, "नेपाल के लोगो, आप मज़बूत बने रहो. हम सब आपके साथ हैं."

पिछले महीने नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप में आठ हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे और लाखों लोग अब भी बेघर हैं.

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