रूस के क़ानून पर अमरीका ने जताई चिंता

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अमरीका ने रूस के उस नए क़ानून पर गहरी चिंता जताई है जिसके तहत अधिकारी किसी भी विदेशी या अंतरराष्ट्रीय ग़ैर सरकारी संगठन पर प्रतिबंध लगा सकते हैं.

अमरीकी विदेश विभाग की प्रवक्ता मैरी हार्फ़ ने कहा कि इससे सिविल सोसाइटी के कामकाज प्रभावित होगा और रूस के लोग अलग-थलग पड़ जाएंगे.

उन्होंने आरोप लगाया कि रूस की सरकार जानबूझकर अपने लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना चाहती है.

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राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शनिवार को इस क़ानून पर हस्ताक्षर किए जिसके बाद यह लागू हो गया है.

इस क़ानून के तहत रूस की संवैधानिक व्यवस्था के लिए ख़तरा माने जाने वाली किसी भी संस्था पर मुक़दमा चलाया जा सकता है और उसकी संपत्ति फ़्रीज की जा सकती है.

आलोचकों ने इसे पुतिन के विरोधियों का मुंह बंद करने का एक और तरीक़ा बताया है.

लेकिन इसके समर्थकों का कहना है कि बाहरी दख़लंदाज़ी रोकने के लिए और यूक्रेन में रूसी भूमिका पर जारी विवाद की वजह से इस तरह के क़दम उठाना ज़रूरी हो गया है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे मानवाधिकार समूहों ने इसका विरोध किया है.

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