'भारत का आतंकवाद,' पाक मीडिया गर्म

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'कांटे से कांटे' को निकालने वाले अपने बयान पर क़ायम भारतीय रक्षा मंत्री पाकिस्तानी उर्दू मीडिया के लगातार निशाने पर हैं.

‘नवा-ए-वक़्त’ लिखता है कि भारतीय रक्षा मंत्री के बयान से ये साबित हो गया है कि पाकिस्तान में होने वाली चरमपंथी घटनाओं में भारत का हाथ है.

अख़बार के मुताबिक़ मनोहर पर्रिकर का भड़काऊ बयान पाकिस्तान को लेकर भारत के असल इरादों को ज़ाहिर करता है.

अख़बार लिखता है कि भारतीय नेताओं की धमकियां और दहशतगर्दी की घटनाओं में हाथ होने की बात को बिना देरी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की ज़रूरत है.

‘ठोस क़दम उठाएं’

‘जंग’ लिखता है कि पाकिस्तान में क़बायली इलाकों से लेकर बलूचिस्तान और कराची तक दहशतगर्दी के साए यूं ही वजूद में नहीं आए हैं, बल्कि इनके पीछे दुश्मन ताकतों और ख़ास कर भारत का हाथ है.

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अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तान की सरकार क़यास और अंदाजों के आधार पर तो भारत पर इल्ज़ाम नहीं लगा सकती और यक़ीक़न इसके सबूत भी हैं, लेकिन भारत के रक्षा मंत्री की धमकियों ने पाकिस्तान के केस को मज़बूत कर दिया. अखबार के अनुसार इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाना चाहिए.

रोज़नामा ‘दुनिया’ का संपादकीय है- भारतीय दहशतगर्दी का मुक़ाबला करने के लिए ठोस कदम उठाएं.

अख़बार की राय है कि भारत पाकिस्तान में गड़बड़ी फैलाने का कोई मौका नहीं चूक रहा है, ऐसे में पाकिस्तान की तरफ़ से किसी तरह की नरमी और लचक देश की संप्रभुता को नुक़सान पहुंचा सकती है.

अटकलें ख़त्म

वहीं ‘जसारत’ ने दिल्ली से सटे फ़रीदाबाद के एक गांव में पिछले दिनों दंगे पर संपादकीय लिखा है.

अख़बार के मुताबिक़ हरियाणा के एक गांव में मस्जिद को गिराना, मुसलमानों के घर जलाना और सामान लूट लेना मुसलमान विरोधी इतिहास में सिर्फ़ एक और घटना है.

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अख़बार की राय है कि कट्टरपंथी हिंदू और सांप्रदायिक तत्व जो कुछ कर रहे हैं उससे भारत को ही ख़तरा है. अख़बार के अनुसार पहले से ही कई अलगाववादी मुहिमें चल रही हैं, लेकिन बीजेपी सरकार की बुनियाद ही कट्टरपंथ और मुसलमान विरोध है.

‘औसाफ़’ ने लिखा है कि पाकिस्तानी गृह मंत्री नासिर अली ख़ान के इस्तीफ़े की अटकलें अपनी मौत मर गई हैं और प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से उनकी सुलह हो गई है.

सर सैयद को ‘भारत रत्न’

रुख़ भारत का करें तो 'हिंदोस्तान एक्सप्रेस' लिखता है कि भाजपा और मोदी सरकार के भीतर इस बात को लेकर सोच विचार का सिलसिला शुरू हो गया है कि क्या सर सैयद अहमद ख़ान को भारत रत्न दिया जाए.

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अख़बार के मुताबिक़ उन्हें भारत रत्न देकर मोदी सरकार दुनिया को ये संदेश देना चाहेगी कि मुसलमानों के बारे में उसके नज़रिए पर जो सवाल उठाए जाते हैं, वो ग़लत हैं.

अख़बार की राय है कि सर सैयद को भारत रत्न ज़रूर मिलना चाहिए, लेकिन किसी को ये ग़लतफ़हमी नहीं होनी चाहिए कि इससे बीजेपी के वोट बैंक में इज़ाफ़ा होगा.

'सहाफ़त' ने मोदी सरकार के एक साल पूरा होने पर लिखा है कि सरकार ऐसी कामयाबियों का डंका पीट रही है जो सिर्फ कागजों पर है.

अख़बार के मुताबिक़ तरक्की और ख़ुशहाली की चमक कहीं भी नहीं दिखाई दे रही है, जबकि किसानों की हालत बद से बदतर होती जा रही है.

अख़बार ने पीएम मोदी के विदेशी दौरों को 'दुनिया की सैर' का नाम देते हुए कहा है कि उनके पास किसानों के हालात पर ध्यान देने का वक़्त नहीं है.

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