भारत पर टिकी हैं बांग्लादेशी किसानों की नज़रें

  • 6 जून 2015
बांग्लादेश में तीस्ता से निकाली गई सूखी नहर

बांग्लादेश के निलफामारी ज़िले के उत्तरभीटा इलाक़े के किसान हैं आफ़ताब उद्दीन. 27 बीघे ज़मीन के मालिक आफ़ताब साल में तीन फ़सलें उगा लेते हैं.

पर इन दिनों वे काफ़ी परेशान हैं. पानी की कमी से सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं. तीस्ता नदी में पानी का प्रवाह बीते कई वर्षों में इस साल सबसे कम है. लिहाजा वे पानी खरीदने को मजबूर हैं.

वेकहते हैं, ''इस साल धान के पौधे सूख गए, सारे पौधे जल गए. मुझे पंप का पानी खरीदना पड़ा.''

पानी को तरसते किसान

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बांग्लादेश ने लालमणिहाट के हातीबांधा में तीस्ता पर बांध बना कर नहर निकाली है, जिससे पांच ज़िलों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है. इनसे निकाली गई नहरों में प्रमुख है नीलसागर.

रूमी बेगम अपने पांच बीघे की खेती के लिए नीलसागर के पानी पर भरोसा करती हैं. वे कहती हैं, ''पानी की कमी से ज़मीन फट गई है. हमें जरा भी पानी नहीं मिला. हमें एक बीघे की सिंचाई के लिए 1000-1200 रूपये पंप वालों को देना होता है. यह हमारे लिए बड़ी रक़म है.''

नदी सूखी, खेती चौपट

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एक दूसरे किसान मोहम्मद सोहाग नहर में लगा मीटर दिखाकर बताते हैं कि पहले इसमें कितना पानी हुआ करता था और अब कितना पानी होता है.

सीमा पार भारत ने गजलडोबा इलाक़े में तीस्ता पर बांध बनाया है और वहां एक जलाशय भी बनाया गया. बांग्लादेश के किसानों का आरोप है कि भारत के इस जलाशय के कारण ही उनके इलाक़े में बहने वाली तीस्ता में पानी नहीं रहता है और उन्हें पानी की किल्लत होती है.

भारत से नाराज़गी

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इस समस्या के निपटारे के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच बीते कई सालों में कई बार बातचीत हो चुकी है, पर नतीजा अब तक सिफ़र है. बांग्लादेश-भारत संयुक्त नदी आयोग के सदस्य मीर सज्जाद अली का मानना है कि बांग्लादेश तो बातचीत के लिए हमेशा तैयार है, पर भारत ही इस मुद्दे पर टाल-मटोल का रवैया अपनाता रहा है.

वे कहते हैं, ''फिलहाल तो भारत की केंद्रीय सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच तीस्ता पर खींचतान चल रही है. पहले वे इस विषय को निपटा लें, फिर भारत सरकार ढाका से बात करे.''

बातचीत ज़रूरी

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उनका दावा है कि तीस्ता नदी के पानी पर कितने लोग निर्भर हैं, कहां पानी का प्रवाह कितना है और दूसरे तमाम विषयों पर आधारित एक प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है. पर इस पर बात करना ज़रूरी है.

बांग्लादेश के रंगपुर, नीलफामारी, कूड़ीग्राम, दिनाजपुर और बगुड़ा जिलों के लोग पानी के लिए पूरी तरह तीस्ता नदी पर ही निर्भर हैं.

ये लोग चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच जल्द से जल्द समझौता हो ताकि उन्हें सिंचाई के लिए पंपों पर निर्भर नहीं होना पड़े और वे तीस्ता से पानी ले सकें.

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