'भारत आख़िरी कदम उठाने को मजबूर न करे'

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गिलगित बल्टिस्तान से गुज़रने वाले पाकिस्तान-चीन आर्थिक कॉरिडोर पर भारत की आपत्तियां पाकिस्तानी मीडिया में छाई हैं.

‘जसारत’ लिखता है कि पाकिस्तान-चीन आर्थिक कॉरिडोर पर भारत की बेचैनी कई तरह से ज़ाहिर होती रही है, लेकिन अब भारतीय प्रधानमंत्री ने खुल कर आपत्तियां जता दी हैं.

अख़बार कहता है कि इस कॉरिडोर से तरक़्क़ी और ख़ुशहाली के रास्ते खुलेंगे, लेकिन भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ इसे कामयाब नहीं होने देना चाहती.

अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तान का सैन्य और असैन्य नेतृत्व इस बात को समझ चुका है कि देश में दहशतगर्दी की लहर के पीछे भारत की खुफिया एजेंसी का ही हाथ है.

'अस्थिर करने की कोशिश'

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Image caption चीनी राष्ट्रपति ने अपने पाकिस्तान दौरे में इस कॉरिडोर की घोषणा की

चीन के काशगर से बलूचिस्तान में ग्वादर तक जाने वाले इस कॉरिडोर पर भारत की आपत्ति रोज़नामा ‘दुनिया’ के संपादकीय का भी विषय रहा.

अख़बार कहता है कि भारत नहीं चाहता कि बलूचिस्तान में अमन कायम हो, क्योंकि ऐसा हो गया तो कॉरिडोर पर तेज़ी से काम होगा.

वहीं रोज़नामा ‘इंसाफ़’ ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख के इस बयान को दुरुस्त बताया है कि कश्मीर समस्या हल न होने की वजह से पाकिस्तान का दुश्मन (भारत) अलग-अलग हथकंड़ों से पाकिस्तान को अस्थिर करने में लगा है, लेकिन डरने की ज़रूरत नहीं है.

Image caption गिलगित बल्टिस्तान में 8 जून को वोट डाले जाएंगे

अख़बार लिखता है कि अब तक तो भारत कश्मीर को ही अपना अटूट अंग बताता था, लेकिन अब उसने गिलगित-बल्टिस्तान को भी अपना हिस्सा बताना शुरू कर दिया है और वहां होने वाले 8 जून के चुनावों को पाकिस्तान के ग़ैर क़ानूनी और जबरन कब्ज़े को छिपाने की कोशिश बताया है.

धमकी

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‘नवा-ए-वक़्त’ ने बेहद तल्ख अंदाज़ में लिखा है कि भारत पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा के लिए आख़िरी क़दम उठाने पर मजबूर न करे.

अख़बार लिखता है कि जब पाकिस्तान ने चीन के साथ भारत के अरबों डॉलर के समझौतों पर कुछ नहीं कहा तो अब पाकिस्तान-चीन कॉरिडोर को लेकर भारत क्यों परेशान है.

परमाणु हथियारों की धमकी देते हुए अख़बार लिखता है कि अगर पाकिस्तान को लेकर भारत अपने ख़ुराफ़ाती मंसूबे जारी रखता है तो पाकिस्तान को भी अपनी सुरक्षा और कॉरीडोर के लिए हर कदम उठाने का हक़ है.

‘पाकिस्तान का हक़’

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Image caption ये कॉरिडोर बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक जाएगा

रोज़नामा ‘एक्सप्रेस’ पाकिस्तान में बिजली संकट के मद्देनज़र लिखता है कि असैन्य परमाणु तकनीक पाकिस्तान का हक़ है.

अख़बार के मुताबिक़ जब अमरीका ने भारत से सिविल न्यूक्लियर करार किया तो पाकिस्तान ने भी ऐसी ही मांग की थी, लेकिन उसने भेदभाव करते हुए पाकिस्तान को यह टेक्नोलॉजी नहीं दी जबकि पाकिस्तान दहशतगर्दी के ख़िलाफ जंग में उसका अहम साथी था.

अख़बार के मुताबिक़ अमरीका भारत को चीन के मुक़ाबले खड़ा करना चाहता है लेकिन पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतों से भी वो अच्छी तरह वाकिफ़ है.

‘इसलिए अपना भेदभावपूर्ण रवैया ख़त्म करे और पाकिस्तान को सिविल न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी दे.’

‘दोबारा सोचे चीन’

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Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चीन दौरे में कॉरिडोर पर आपत्ति जताई

रुख़ भारत का करें तो ‘हमारा समाज’ ने लिखा है कि पाकिस्तान-चीन कॉरिडोर भारत और पाकिस्तान के बीच ऐसे इलाके से निकलेगा जिसका अब तक स्थाई फैसला नहीं हो पाया है.

अख़बार के मुताबिक़, फिर भी चीन इस परियोजना को आगे बढ़ाता है तो ये भारत के प्रति दुश्मनी को ज़ाहिर करना होगा.

अख़बार की राय है कि कोई भी कदम उठाने से पहले चीन को अपने फैसले पर दोबारा सोचना चाहिए.

बिहार की आम लीची की सियासत पर ‘हिंदोस्तान एक्सप्रेस’ लिखता है कि सीएम पद छोड़ने के बाद भी मांझी ने सीएम का बंगला खाली नहीं किया.

अख़बार के मुताबिक़ ये जगह आज नहीं तो कल उन्हें छोड़नी होगी लेकिन पूरे मामले से यह साबित होता है कि मांझी नीतीश से उलझने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ रहे हैं.

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