तुर्की में मतदान ख़त्म, गिनती जारी

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तुर्की में आम चुनावों के लिए मतदान संपन्न हो गया है और वोटों की गिनती जारी है.

चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि सत्ताधारी पार्टी देश के संविधान में बदलाव कर पाएगी या नहीं.

राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने अपने सत्तारूढ़ दल के लिए एक तिहाई बहुमत मांगा है ताकि वे संविधान में संशोधन कर सकें.

एर्दोआन सबसे पहले 2003 में प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में आए थे.

एर्दोआन देश में राष्ट्रपति शासन प्रणाली लाना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें बहुमत की ज़रूरत है.

हालाँकि संभावना जताई जा रही है कि कुर्द समर्थक एचडीपी दस प्रतिशत मतों की बाधा पारकर संसद में जगह पा सकती है.

शुक्रवार को दियारबकीर में एचडीपी की चुनावी जनसभा में हुए धमाकों में चार लोग मारे गए थे.

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अधिकारियों को कहना है कि इन धमाकों के लिए देसी बमों का इस्तेमाल किया गया था.

योजना को लग सकता है झटका

एचडीपी नेता सेलाहतिन देमिरतास ने इन हत्याओं पर एर्दोआन के रुख़ की कड़ी निंदा की है.

अगर वामपंथी विचारधारा वाली एचडीपी संसद में पहली बार सीट जीतने में कामयाब रहती है तो एर्दोआन की एकेपी पार्टी की सीटें घटेंगी.

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अगर एकेपी की सीटें कम होती हैं तो संविधान में बदलाव और प्रधानमंत्री की कार्यकारी शक्तियां राष्ट्रपति को हस्तांतरित करने की एर्दोआन की योजना को झटका लगेगा.

एर्दोआन पहली बार 2003 में देश के प्रधानमंत्री बने थे और पिछले साल राष्ट्रपति का चुनाव जीतने तक इस पद पर रहे थे.

सबसे बड़ी चुनौती

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इस्तांबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता मार्क लोवन का कहना है कि 13 साल पहले सत्ता में आई एकेपी पार्टी के लिए ये चुनाव सबसे बड़ी चुनौती हैं.

चुनाव परिणामों का असर तुर्की की सीमा के बाहर भी हो सकता है.

लोवन का कहना है कि अशांत मध्य पूर्व में तुर्की नैटो का अहम सदस्य है जहां लोकतंत्र और इस्लाम का दुर्लभ संगम दिखाई देता है.

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