कैसा लगता है एक एक्स-मुस्लिम लड़की होना?

एक्स-मुस्लिम लड़की, सारा

ब्रिटेन में धार्मिक स्वतंत्रता मानवाधिकार है, लेकिन अपने पारिवारिक धर्म को छोड़ने का मतलब वहां भी अकेलापन और अलग-थलग होना होता है.

एक एक्स-मुस्लिम (पूर्व मुसलमान) लड़की सारा ने बीबीसी न्यूज़बीट से बात की. उन्होंने दो साल पहले अपने मां-बाप को कहा था कि वह अब मुसलमान नहीं रहना चाहतीं.

वह कहती हैं, "आपको ऐसा महसूस होता है कि आप सबको धोखा दे रहे हैं. क्योंकि कोई भी इस्लाम छोड़ता नहीं है."

वह बताती हैं कि उस वक्त वह 17 साल की थीं, तब उनके परिवार ने उन्हें घर से निकाल दिया था.

क़तर और सऊदी अरब जैसे कुछ देशों में इस्लाम को छोड़ने या फिर 'धर्म त्याग' का अर्थ होता है- मौत की सज़ा.

'सूअर और शराब'

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सारा कहती हैं, "मेरी जिन लोगों से बात हुई उनमें से ज़्यादातर मानते हैं कि दुनिया में वही एक्स-मुस्लिम हैं."

उम्र बढ़ने के साथ सारा को महसूस होने लगा था कि उनकी विचारधारा के साथ 'इस्लाम जुड़ता नहीं है' लेकिन वह अरबी सीखने और दुआ करने के बारे में वह सच को छुपाती रहीं.

वह कहती थीं, "वह मुझे पकड़ने की कोशिश किया करते. एक बार मैं अपने कमरे से नीचे उतरी तो मेरे मां-बाप ने पूछा कि क्या मैंने नमाज़ पढ़ी थी और मैंने कहा हां, बिल्कुल."

"उन्होंने कहा, 'तुम्हें पता है न कि तुमने जूते पहने हुए हैं'."

वह कहती हैं, "वह बहुत अजीब था."

इसे छुपाना मुश्किल हो गया है, "मुझे नहीं लग रहा था कि मैं यह कर पाऊंगी. इसलिए मैंने बहुत गंभीरतापूर्वक ख़ुदकुशी की सोची. यह बहुत मुश्किल होता है क्योंकि आप एक तरह से हिम्मत हार जाते हैं."

जब उन्होंने अपने मां-बाप को बताया तो वह रोने लगे. वह कहती हैं, "आप उनके गले लगना चाहते हैं, लेकिन आप ही तकलीफ़ की वजह होते हैं."

"उन्हें लगा कि मैं शराब और सूअर जैसी चीज़ों की वजह से इस्लाम छोड़ना चाहती हूं लेकिन यह मेरे फ़ैसले की वजहों में से एक भी नहीं थे."

"यह ऐसा ही था जैसे कि आप किसी शराबी से बात कर रहे हों. आप कुछ भी ठीक नहीं कर सकते. आप जो भी मानते हैं वह ग़लत होता है."

"मुझे उनकी बात समझ आ रही थी, वह नहीं चाहते थे कि मैं हमेशा के लिए जहन्नुम में जलूं, लेकिन इससे मेरा फ़ैसला बदलने वाला नहीं था."

'फ़ेथ टू फ़ेथलेस'

विश्वविद्यालय में जाना शुरू करने के कुछ ही समय बाद सारा एक ऐसे समूह में शामिल हो गईं जो एक्स-मुस्लिमों से चर्चा कर और सलाह देकर उनकी मदद करता था.

वह कहती हैं, "यह जानना कि आप अकेले नहीं हैं, काफ़ी मददगार होता है. सामान्यतः उन्होंने अपने परिवार को बताया नहीं होता और उनकी प्रतिक्रिया 'या ख़ुदा तुम मौजूद हो', जैसी होती है."

फ़ेथ टू फ़ेथलेस, समूह चलाने वाले इम्तियाज़ शम्स लंदन में करीब 200 एक्स-मुस्लिम और ब्रिटेन में 100 ऐसे और लोगों को जानते हैं.

वह कहते हैं कि इन लोगों में क़रीब 20 धर्मों के लोग हैं जो अब अपने धर्म को नहीं मानते. इनमें एक्स-क्रिश्चियन, एक्स-मोरमोन्स, एक्स-हिंदू भी हैं.

मोहम्मद शफ़ीक ब्रिटेन में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने वाले रमज़ान फ़ाउंडेशन से जुड़े हुए हैं.

वह कहते हैं, "जब आप इस्लाम को छोड़ने का फ़ैसला करते हैं तो आप समझते-बूझते हुए अपने परिवार के साथ ही एक बड़े समुदाय से दूर जाने का फ़ैसला करते हैं."

"अन्य धर्मों पर भी यही लागू होता है."

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Image caption ब्रिटेन में 2011 की जनगणना में 25% लोगों ने कहा था कि उनका कोई धर्म नहीं है.

"मैं बहुत से ईसाइयों, हिंदुओं, सिखों से मिला हूं जो इस्लाम को अपनाकर मुसलमान बन गए हैं और जिनके परिवारों ने उनसे संबंध ख़त्म कर दिए हैं."

वह कहते हैं, "कुछ लोग एक्स-मुस्लिम बन गए हैं और पिछले कुछ सालों से बदलाव और इस्लाम को बदनाम करने के लिए मेहनत कर रहे हैं. हमें इसी का मुकाबला करना है."

'यक़ीन करना आसान'

सारा अब अपने परिवार से ज़्यादा मिलने लगी हैं.

वह अपने मां और बहन से बात करती हैं लेकिन उन्हें नहीं लगता कि उनके अपने पिता से कभी संबंध बहाल हो पाएंगे.

जब उन्होंने डेढ़ साल बाद अपने छोटे भाई को देखा तो वह उसे पहचान ही नहीं पाईं.

वह कहती हैं, "समस्या यह है कि ज़्यादातर एक्स-मुस्लिम नहीं चाहते कि वह एक्स-मुस्लिम बनें. हमारे और हमारे परिवारों के लिए सबसे आसान यही होता है कि बस यकीन करें."

"यकीनन मुझे अपराधबोध होता है. मैं चाहती हूं कि मुझे यह नहीं करना पड़ा होता. लेकिन एक ऐसा मौका आ जाता जब आपको सोचना पड़ता है कि यह मेरी ज़िंदगी है या आपकी?"

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