'पाकिस्तान को बर्मा न समझे भारत'

  • 11 जून 2015
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भारत की ओर से पाकिस्तान में म्यांमार की तर्ज़ पर फ़ौजी कार्रवाई करने के बयान पर पाकिस्तानी गृहमंत्री चौधरी निसार ने कहा है, "भारत को किसी ग़लतफ़हमी का शिकार नहीं होना चाहिए, पाकिस्तान म्यांमार नहीं है."

दूसरी तरफ़ पाकिस्तानी फ़ौज के शीर्ष नेताओं की रावलपिंडी में हुई बैठक के बाद एक बयान में भारतीय नेताओं के बयान को निराशाजनक और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के ख़िलाफ़ बताया गया.

भारतीय सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने मंगलवार को कहा था कि भारतीय फ़ौज ने म्यांमार में जिस तरह की कार्रवाई की है वो उन सभी देशों के लिए एक संदेश है जहां से भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन होता है या उसे प्रश्रय दिया जाता है.

उन्होंने पाकिस्तान के संदर्भ में किए गए एक सवाल के जवाब में उसका भी नाम लिया था.

कैंपों को बर्बाद कर दिया गया

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राठौर ने ये बयान मंगलवार को भारतीय सेना के पड़ोसी मुल्क म्यांमार में एक कार्रवाई के बाद दिया था.

म्यांमार में हुए ऑपरेशन को भारत सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व की सफलता के तौर पर पेश करने की कथित कोशिश कर रही है.

राठौर ने दावा किया था कि ऑपरेशन में उग्रवादियों के दो कैंपो को तहस नहस कर दिया गया. ये भी ख़बर थी कि कार्रवाई में 20 विद्रोहियों को मार गिराया गया.

भारतीय मीडिया ने इसे कुछ दिनों पहले मणिपुर में सेना पर हुए उग्रवादी हमले का जवाब भी बताया था.

'चीख़-चीख़कर बताने की ज़रूरत नहीं'

हालांकि समाचार एजेंसी एएफ़पी ने दावा किया है कि म्यांमार सरकार इस बात से इंकार कर रही है कि भारत ने उसकी सीमा के भीतर किसी तरह का कोई ऑपरेशन किया है.

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कई भारतीय अख़बारों में भी ये लेख छपे कि ये कहना ग़लत है कि दो दिनों पहले हुई सेना की कार्रवाई ऐसा पहला आप्रेशन था.

कूटनीति और सुरक्षा के कई जानकारों ने भी कहा कि ये अच्छा है भारत ने ऐसा सफ़ल ऑपरेशन किया लेकिन उसे इस मामले को चीख़-चीख़कर बताने की ज़रूरत नहीं है.

भारत और पाकिस्तान एक दूसरे पर पृथकतावादी ताक़तों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हैं.

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