पाकिस्तान में 'सेव द चिल्ड्रन' पर कार्रवाई

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पाकिस्तान ने चैरिटी संस्था सेव द चिल्ड्रन को देश छोड़ने का आदेश दिया है. सेव द चिल्ड्रेन पर पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों के आरोप के बाद ये क़दम उठाया गया है.

इस्लामाबाद में पुलिस ने चैरिटी संस्था के दफ़्तर को सील कर दिया है. विदेशी कर्मचारियों को देश छोड़ने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है.

सेव द चिल्ड्रन ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है.

पाकिस्तान ने पहले सेव द चिल्ड्रन पर फ़र्जी टीकाकरण कार्यक्रम का भी आरोप लगाया था और कहा था कि अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने इसका इस्तेमाल ओसामा बिन लादेन को तलाश करने के लिए किया था.

इनकार

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लेकिन चैरिटी संस्था सेव द चिल्ड्रन ने हमेशा ही सीआईए और पाकिस्तानी डॉक्टर शकील अफ़रीदी से संबंधों से इनकार किया था, जिन्होंने ये कार्यक्रम चलाया था.

इन आरोपों के बाद पिछले 18 महीनों में संस्था के कोई विदेशी कर्मचारी पाकिस्तान में नहीं हैं.

सेव द चिल्ड्रन का कहना है स्वास्थ्य, शिक्षा और खाद्यान्न से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं में 1200 पाकिस्तानी कर्मचारी काम कर रहे हैं.

दुनियाभर में अपनी परियोजनाएँ चला रहे सेव द चिल्ड्रन 30 साल से ज़्यादा समय से पाकिस्तान में काम कर रहा है. इस संस्था की परियोजनाएँ पाकिस्तान के 60 से ज़्यादा ज़िलों में चली हैं.

स्पष्टीकरण

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सरकार ने सेव द चिल्ड्रेन पर हुए फ़ैसले के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है.

लेकिन एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया है, "उनकी गतिविधियों पर लंबे समय से नज़र रखी जा रही है. संस्था जो कर रही थी, वो पाकिस्तान के हितों के ख़िलाफ़ था."

एक पुलिस अधिकारी ने भी बताया कि चैरिटी के फ़ोन कॉल्स और कार्यालयों को निगरानी में रखा गया था. समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि चैरिटी संस्था की गतिविधियाँ काफ़ी संदेहास्पद थी.

सेव द चिल्ड्रन ने इस क़दम की आलोचना करते हुए कहा है कि वो अपनी चिंताएँ शीर्ष स्तर पर उठाएगा.

बीबीसी को ये भी जानकारी मिली है कि एक ग़ैर सरकारी संस्था नॉर्वेजियन रिफ़्यूजी काउंसिल ने भी पाकिस्तान में अपना काम बंद कर दिया है, क्योंकि उसका लाइसेंस का नवीकरण नहीं हुआ है.

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