अंदरूनी राजनीति के शिकार योंगकांग?

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जो योंगकांग को मिलने वाली उम्र कैद की सज़ा के साथ ही चीनी राजनीति के इतिहास की सबसे स्तब्ध कर देने वाली घटनाओं में से एक का पटाक्षेप हो गया है.

बीबीसी की सेलिया हैट्टन इस राजनीतिक साज़िश की कहानी कार्टूनिस्ट मोर्गन चुआ के रेखाचित्रों के सहारे बयां कर रही हैं.

काले सूट में बालों को रंगे इस इंसान के बारे में कहना आज मुश्किल होगा कि यह आदमी कभी चीन के सबसे ताकतवर नेताओं में से था.

'सत्ता का दुरुपयोग'

सालों से वे चीन की पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी में शीर्ष पर थे. पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी चीन में सरकार की सबसे शीर्ष इकाई है.

जो योंगकांग देश की पुलिस और खुफिया सेवा के प्रमुख थे. चीन की फ़ौज से भी ज्यादा का बजट इन सेवाओं के लिए था.

सेवानिवृत्त होने के बाद ऐसा लगा जैसे उन को छूना आसान नहीं. लेकिन पिछले साल वे गिरफ़्तार हुए और अब उन्हें घूसखोरी, सत्ता का दुरुपयोग और सरकारी सूचनाएं लीक करने के लिए उम्र कैद की सज़ा हो चुकी है.

आधिकारिक रूप से वे भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के साथ अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके शारीरिक संबंध बनाने के भी दोषी हैं.

लेकिन वे सरकारी सूचनाएं लीक करने के भी दोषी हैं. यह एक ऐसा संदिग्ध आरोप है जो इस तरफ इशारा करता है कि इस मामले में पैसों के अलावा भी बहुत कुछ है.

चुनौती

कइयों का मानना है कि यह सत्ता और राजनीति से जुड़ा मामला है. वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सत्ता की लड़ाई साफ तौर पर हार चुके थे.

आमतौर पर यह धारणा है कि उन्होंने पार्टी के अंदर अपनी एक अंदरूनी पकड़ बना ली थी जो शी के नेतृत्व को चुनौती पेश कर रहा था.

ऐसा लगता है कि नेतृत्व भी इस तरफ इशारा कर रहा है. चीन का प्रमुख सरकारी अख़बार उन्हें 'गद्दार' कह रहा है.

जो योंगकांग का प्रभाव बीजिंग के अलावा भी दूरदराज के इलाकों तक है. एक-एक कर के उन सभी का पतन हो रहा है जो उनके सरपरस्त थे.

फंदा

महीनों से उनके ऊपर फंदा कसता जा रहा था. इसकी शुरुआत होती है पोलित ब्यूरो सदस्य बो शिलाई की सनसनीखेज सुनवाई से.

उन्हें पार्टी के अंदर उभरते स्टार राजनेता और जो योंगकांग के उत्ताराधिकारी के रूप में देखा जा रहा था.

उनके रिश्तेदारों और पूर्व सहयोगियों में से अधिकतर को गिरफ़्तार कर लिया गया है. कई घूसखोरी के मामले में दोषी भी सिद्ध हो चुके हैं.

सत्ता की इस खींचतान की पृष्ठभूमि में शी जिनपिंग के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा भ्रष्टाचार विरोधी अभियान है.

जब शी ने 2012 में सत्ता की बागडोर संभाली थी तब उन्होंने भ्रष्टाचार से निपटने का वादा किया था.

उन्होंने आशंका व्यक्त की थी कि भष्टाचार का मुद्दा सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की लुटिया डूबो सकता है.

भ्रष्टाचार विरोधी अभियान

उन्होंने इसकी शुरुआत भव्य सरकारी दावतों पर रोक लगाने से की और 'चार व्यंजन और एक सूप' वाले साधारण खाने की वकालत कीं.

फिर नंबर आया गिरफ्तारियों का. शी जिनपिंग ने वादा किया कि उनके जाल में 'बाघ और मक्खियां' दोनों फंसेंगी.

उनका मतलब था कि सरकार के अंदर सभी स्तर पर अधिकारियों की जांच की जाएगी.

चीन भ्रष्टाचारियों को पकड़ने के लिए अपनी सीमाओं से भी बाहर जाकर प्रयास कर रहा है.

इस दिशा में उसने फॉक्स हंट और स्काई नेट जैसे दो भारी भरकम अभियान चलाए हैं ताकि संदिग्धों को चीन लौटने पर मजबूर कर दिया जाए.

केंद्रीकरण

चीन के मामलों पर नज़र रखने वाले कई लोगों का मानना है कि शी जिनपिंग भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का इस्तेमाल एक तीर से दो शिकार करने में कर रहे हैं.

आधिकारिक तौर पर वे पार्टी के अंदर सफाई कर रहे हैं लेकिन यह भी माना जा रहा है कि वे इस अभियान का इस्तेमाल अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को किनारे में कर रहे हैं.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में सत्ता का अधिक केंद्रीकरण कर रहे हैं और ऐसा लगता है कि वे असंतोष के स्वर को पूरी तरह से खारिज कर रहे हैं.

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