क्या अब 3डी प्रिंटर से निकलेंगे हवाईजहाज़?

  • 18 जून 2015
एयरबस ए350 एक्सडब्लूबी इमेज कॉपीरइट AIRBUS

पेरिस एयर शो में दिखाई जाने वाली नई एयरबस ए350 एक्सडब्लूबी कई मामलों में नई तकनीक की शुरुआत करने का दावा कर सकती है.

इस एयरबस में किसी भी दूसरे एयरबस की तुलना में अधिक 3डी प्रिंटर से तैयार कलपुर्जों का इस्तेमाल किया गया है.

इसमें 3डी प्रिंटर से बने करीब 1000 कलपुर्जें लगे हुए हैं.

संभावनाएं

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रेथियॉन मिसाइल में भी 3डी प्रिंटर से बने कलपुर्जों का इस्तेमाल किया गया है. वहीं ड्रोन के निर्माण में भी इनका इस्तेमाल किया जा रहा है.

यूनाइटेड लॉच एलायंस भी अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले रॉकेट में 3डी प्रिंटर से बने कलपुर्जों का इस्तेमाल कर रही है. ये बोइंग और लॉकहीड मार्टिन का संयुक्त उपक्रम है.

लगता है अब 3डी निर्माण कोई नई बात नहीं रह गई है. पेरिस एयर शो में 3डी निर्माण से जुड़ी कंपनियां और कांफ्रेस छाए हुए हैं.

इस तकनीक में इतनी संभावनाएं है कि ये एयरोस्पेस उद्योग का कायाकल्प कर दे.

इस तकनीक से कलपुर्जों के उत्पादन की लागत कम हो सकती है और हल्के कलपुर्जें तैयार किए जा सकते हैं. यह तकनीक बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ा सकती है.

बड़ी संरचना

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हालांकि यहां बात सिर्फ छोटे-छोटे कलपुर्जों की हो रही है बजाए कि किसी बड़ी संरचना की.

ब्रिटेन में एयरबस ग्रुप में नए शोध के प्रमुख इयान रीस्क का कहना है, "3डी प्रिंटिंग की महत्वपूर्ण भूमिकाओं को खारिज मत कीजिए. ये कलपुर्जे निर्माण में बड़ी भूमिका निभाते हैं. अक्सर ये वो जटिल कलपुर्जे होते हैं जिनकी वजह से उत्पादन में देरी होती है."

प्रिंटिंग मशीन के आकार की वजह से इस तकनीक से बनाए जाने वाले कलपुर्जें ज्यादा बड़े नहीं होते हैं.

रीस्क इस बात पर संदेह जताते हैं कि कभी पूरे हवाईजहाज का ढांचा भी तैयार हो पाएगा. उन्होंने कहा, " लेकिन हम इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के बारे में सोच रहे हैं. "

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