लड़ाइयाँ ले जा रही हैं दुनिया को पीछे

शरणार्थी इमेज कॉपीरइट Reuters

दुनिया भर में चल रहे संघर्ष, वैश्विक अर्थव्यवस्था की सेहत पर काफी भारी पड़ रहे हैं.

वैश्विक शांति को लेकर कराए गए एक सर्वे के मुताबिक़, संघर्षों के कारण पिछले साल 14.3 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 9178 ख़रब रुपए) का नुकसान हुआ है, जो दुनिया की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 13 प्रतिशत है.

इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) के अनुसार, यह राशि ब्राज़ील, कनाडा, फ़्रांस, जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन की कुल अर्थव्यवस्था के बराबर है.

ऑस्ट्रेलिया की आईईपी की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे शांत और सबसे अशांत देशों के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है.

आइसलैंड दुनिया का सबसे अधिक शांत राष्ट्र है जबकि सीरिया सबसे अशांत है.

हिंसक इलाक़े

इमेज कॉपीरइट Reuters

रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2014 के बाद से लीबिया की हालत सबसे अधिक ख़राब हुई है.

मध्यपूर्व और उत्तरी अफ़्रीका, दक्षिण एशिया को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में सबसे हिंसक इलाक़े बन गए हैं.

साल 2013 में दक्षिण एशिया सबसे हिंसक इलाक़ा था.

इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2010 49,000 लोगों के मुकाबले, साल 2014 में एक लाख 80 हज़ार लोग मारे गए.

चरमपंथ के कारण होने वाली मौतों में साल 2013 में 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

इस साल खासकर पांच देशों- इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, नाइजीरिया और सीरिया में 18,000 लोगों की जान गई.

आईईपी एक्ज़ीक्यूटिव स्टीव किलेली के मुताबिक़, "पश्चिमी यूरोप के कुछ देश तो शांति के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गए हैं. यहां ‘हत्या की दर बहुत कम’ है और ‘सुरक्षा पर संभवत देश के इतिहास में सबसे कम खर्च’ हो रहा है."

भयावह स्थिति

इमेज कॉपीरइट EPA

लेकिन पिछले कुछ सालों में इराक़, सीरिया, नाइजीरिया, दक्षिणी सूडान और सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिकन (कार) में हिंसा बढ़ी है.

आईईपी के अनुसार, इन लड़ाइयों में होने वाला नुकसान, दुनिया की कुल जीडीपी का 13.4 प्रतिशत है.

रिपोर्ट में कहा गया है, “आंतरिक संघर्ष के कारण हुई मौतों, आंतरिक विस्थापन और शरणार्थी सहायता, संयुक्त राष्ट्र द्वारा शांति स्थापित करने की कोशिशें और संघर्ष के कारण जीडीपी पर पड़े असर को मिलाकर इस नुकसान की गणना की गई है.”

इसमें यह भी कहा गया है कि पूरी दुनिया में पांच करोड़ शरणार्थी और आंतरिक विस्थापित लोग हैं, यह संख्या द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से सबसे अधिक है.

अगर कम हो जाए हिंसा...

इमेज कॉपीरइट bbc

शरणार्थियों और विस्थापितों पर आने वाले खर्च में 2008 के बाद से 267 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होकर यह 128 अरब डॉलर हो गई है.

रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि अगर वैश्विक हिंसा में 10 फ़ीसदी की भी कमी आ जाए तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में 1.43 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 917 ख़रब रुपए) की बढ़ोत्तरी होगी.

ये ग्रीस के ऋण से छह गुना है और दुनिया के 1.1 अरब ग़रीब लोगों (1.25 डॉलर यानी 80 रुपये प्रति दिन से कम) की कुल आमदनी का तीन गुना है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार