हांगकांगः चीन का चुनावी प्रस्ताव ख़ारिज

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हांगकांग के जनप्रतिनिधियों ने बहस सत्र के बाद चीन समर्थित 'विवादास्पद' चुनाव सुधार प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है.

चीन के प्रस्ताव के मुताबिक़ यह 2017 में होने वाले चुनाव में हांगकांग की जनता को मताधिकार दे देगा लेकिन चुनाव में हिस्सा ले रहे उम्मीदवारों की जांच पहले ख़ुद करेगा.

इस प्रस्ताव पर मतदान होने से पहले सरकार का समर्थन करने वाले निर्वाचित प्रतिनिधि काउंसिल चैंबर से बाहर निकल गए.

इन सुधारों से चीन को चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवारों की जांच करने का अधिकार मिल जाएगा.

चीन की इस योजना का लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया है और लोकतंत्र समर्थित कार्यकर्ताओं ने इसे 'फर्ज़ी लोकतंत्र' का दर्ज़ा दिया.

कैसा है प्रस्ताव

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चीन समर्थित निर्वाचित प्रतिनिधियों के चैंबर से बाहर होने की वजह से महज़ 37 सांसद मतदान के लिए बचे जिनमें से 28 ने इसके विरोध में जबकि 8 ने इसके समर्थन में मतदान किया.

इस प्रस्ताव को पारित करने के लिए कम से कम 47 वोटों की जरूरत थी.

शहर के लेज़िस्लेटिव काउंसिल के अध्यक्ष जासपर सांग ने कहा, ''प्रस्ताव को दो-तिहाई मत भी नहीं मिले. मैं घोषणा करता हूं कि प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया.''

इस प्रस्ताव के मुताबिक हांगकांग के नागरिकों को वर्ष 2017 में पहली बार मत देने का अधिकार तो मिल जाएगा लेकिन वे केवल उन्हीं उम्मीदवारों को वोट दे पाएंगे जिनकी उम्मीदवारी पर चीन समर्थित समिति मुहर लगाएगी.

इस मतदान का मतलब यह है कि हांगकांग के नेता अब भी 1,200 सदस्यीय समिति द्वारा ही चुने जाएंगे. हांगकांग पर फ़िलहाल चीन का नियंत्रण है.

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