एमक्यूएम : पाकिस्तान उबला, भारतीय मीडिया ख़ामोश

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बीबीसी की एमक्यूएम को भारतीय फंडिंग की 'धमाकेदार' रिपोर्ट पाकिस्तान के मुख्यधारा और सोशल मीडिया पर छाई हुई है. लेकिन भारत में इस रिपोर्ट की पूरी तरह उपेक्षा कर दी गई है.

भारत सरकार ने बीबीसी की ख़बर में किए गए दावों को 'पूरी तरह आधारहीन' करार दिया है. एमक्यूएम के एक वरिष्ठ सदस्य ने बीबीसी की ख़बर को 'टेबल रिपोर्ट' क़रार दिया.

'विश्वसनीय'

बीबीसी वेबसाइट पर इस ख़बर के जारी होते ही पाकिस्तान के मुख्यधारा के चैनलों ने इसे 'ब्रेकिंग न्यूज़' की तरह चलाना शुरू कर दिया और जल्दी ही विशेषज्ञों के साथ लाइव फ़ोन-इन लिए जाने लगे.

एक रिपोर्ट में पत्रकारों और विश्लेषकों ने बीबीसी को एक 'विश्वसनीय' स्रोत करार देते हुए कहा कि अगर संस्था (बीबीसी) को लगता कि यह ख़बर ग़लत है तो वह इसे नहीं चलाते.

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Image caption एमक्यूएम का कराची में बहुत अच्छा जनाधार है.

कई विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि बीबीसी के पत्रकार ओवेन बेनेट जोन्स की एमक्यूएम पर यह पहली रिपोर्ट नहीं है. उन्होंने जुलाई 2013 में न्यूज़नाइट में भी एमक्यूएम पर लंदन पुलिस की जांच पर ख़बर दी थी.

दुनिया टीवी में विश्लेषक सलमान ग़नी ने कहा कि एक 'विश्वसनीय' संस्था की यह नई रिपोर्ट कोई 'छोटी ख़बर नहीं' है.

जियो टीवी संवाददाता मुर्तज़ा अली शाह ने लंदन से कहा कि बीबीसी का दावा 'विस्फ़ोटक प्रवृत्ति' का है.

वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने कहा, "हालांकि आरोप गंभीर हैं लेकिन इनमें कुछ भी नया नहीं है... लेकिन यह पहली बार हुआ है कि बीबीसी जैसी किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने इस बारे में रिपोर्ट की है."

एआरवाई न्यूज़ टीवी पर एक विश्लेषक शाहिद लतीफ़ने कहा कि बीबीसी की ख़बर 'बहुत संजीदा' है और उन्होंने यह ख़बर नहीं चलाई होती जब तक उन्हें इस पर यकीन नहीं होता.

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"ब्रितानी प्रेस ज़िम्मेदार है और वह इस ख़बर को बेवजह या बिना सबूत के नहीं चलाते.... आने वाले दिन महत्वपूर्ण हैं क्योंकि मुक़दमे (मनी लॉंड्रिंग और हत्या के मामले में एमक्यूएम शामिल है) बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं."

'एमक्यूएम रॉ है'

एक्सप्रेस न्यूज़ के ब्रितानी संवाददाता नसीम सिद्दीक़ी ने कहा कि यह एक 'बड़ी ख़बर' है और बीबीसी की साख को प्रमाणित करती लगती है.

"एमक्यूएम ने पहले भी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री के ख़िलाफ़ कानूनी कदम उठाने की बात कही थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया.... ज़रूर सबूत तगड़े होंगे. बीबीसी ऐसा कुछ नहीं करेगा जो उस संगठन को नुक़सान पहुंचाए."

एक्सप्रेस न्यूज़ के एक अन्य एंकर इमरान ख़ान ने कहा कि रिपोर्ट ने एमक्यूएम को एक 'अजीब परिस्थिति' में पहुंचा दिया है.

उन्होंने यह भी काहा कि भारतीय गुप्तचर संस्थआ रॉ (रिसर्च एंड एनेलिसिस विंग) के ख़िलाफ़ हथियार और प्रशिक्षण देने के आरोप नए नहीं हैं.

बीबीसी की रिपोर्ट शाम 5.30 के सभी उर्दू टीवी चैनलों की हैडलाइन में थी. दुनिया टीवी की हेडलाइन थी, "बीबीसी ने एक बम फोड़ दिया है."

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Image caption एमक्यूएम पर कई हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है.

पीटीआई पार्टी नेता इमरान ख़ान के समर्थकों ने एक ट्विटर ट्रेंड #बीबीसीप्रूव्सएमक्यूएमइज़रॉ (बीबीसी ने साबित कर दिया कि एमक्यूएम रॉ है) शुरू किया जिसका तीन घंटे में 16,000 से भी ज़्यादा बार ज़िक्र किया गया.

लेकिन एमक्यूएम के समर्थकों ने हैशटैग #क्रोनिकल्सऑफ़ओबीजे, जिसका अर्थ रिपोर्टर ओवेन बेनेट जोन्स का इतिहास है, से जवाब दिया. यह भी टॉप ट्रेंड बन गया जिसके साथ 5,000 से ज़्यादा ट्वीट किए गए.

एक ट्वीट में कहा गया, "#बीबीसीप्रूव्सएमक्यूएमइज़रॉ… एमक्यूएम और रॉ दोनों पाकिस्तान की संप्रभुता पर हमला करने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं. एमक्यूएम पर प्रतिबंध लगाने का मतलब है रॉ को रोकना."

'मूर्खतापूर्ण और एकतरफ़ा'

एक अन्य ट्वीट में कहा गया, "एमक्यूएम दुश्मन भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है. वह ग़द्दार है, पाकिस्तानी नहीं."

एक अन्य ट्वीट में कहा गया है, "बीबीसी ने एमक्यूएम की हकीकत का पर्दाफ़ाश कर दिया है. भारत से पैसे लेने वाला चरमपंथी नेटवर्क पाकिस्तान को अस्थिर करने को कोशिश कर रहा है. लोगों को जातीयता के नाम पर हमेशा मूर्ख नहीं बनाया जा सकता."

एमक्यूएम समर्थकों और कुछ पत्रकारों ने बीबीसी की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं और यह कहा है कि रिपोर्ट में सिर्फ़ एक स्रोत का ही उल्लेख किया गया है.

एक ट्वीट में कहा गया, "स्रोत अज्ञात हैं लेकिन आरोपों को गंभीरता से लिया गया है. आपको बस #एमक्यूएम पर आरोप लगाना है, उनका असली होना ज़रूरी नहीं... #क्रोनिकल्सऑफ़ओबीजे"

एक अन्य ट्वीट में कहा गया, "@ओवेनबेनेटजोन्स को 90 के दशके से ही पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों के ख़िलाफ़ सत्ता की दी गई ख़बरों के लिए ही जाना जाता है."

विश्लेषक मार्वी सरमेड ने ट्वीट किया, "एमक्यूएम पर बीबीसी की बहुत मूर्खतापूर्ण और एकतरफ़ा ख़बर. इसके तत्वों की पुष्टि मुश्किल है. पोलो5ओकल (polo5ocal- ऐसा ही लिखा गया है) प्रतिद्वंद्वियों को टिप्पणी करने का मौका देना, सचमुच ओबीजे?"

पत्रकार उमर कुरैशी ने पोस्ट किया, "एमक्यूएम पर बीबीसी की रिपोर्ट में कुछ भी नया नहीं है. सच कहूं तो मैंने सोचा था कि इसमें कुछ चौंका देने वाले खुलासे होंगे— इसमें एक बेनाम पाकिस्तानी स्रोत का हवाला है."

'क्या संपादकीय पड़ताल की ?'

बीबीसी मॉनिटरिंग को बीबीसी की रिपोर्ट को लेकर मुख्यधारा के भारतीय मीडिया में कोई कवरेज नज़र नहीं आई, बस एनडीटीवी चैनल ने एक छोटी सी ख़बर दी थी.

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यहां कवरेज मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के शैक्षिक स्तर पर विवाद पर और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पूर्व आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी के निवेश मामले पर केंद्रित थी.

हालांकि एनडीटीवी की बरखा दत्त ने कई ट्वीट कर बीबीसी की आलोचना की.

उन्होंने लिखा, "अब तक पढ़ी गई बीबीसी की भारत एमक्यूएम की रिपोर्ट प्रायोजित और प्रमाणहीन लगती है. क्या कोई रिकॉर्डिंग या सबूत है जो मैं देख नहीं पाई?"

"डियर @बीबीसीवर्ल्ड भारत एमक्यूएम के दावों पर ख़बर ने निराशाजनक पत्रकारिता में नया उत्साह डाल दिया है. इसमें संपादकीय पड़ताल क्या की गई थी, ज़रूर शेयर करना."

"भारत पाकिस्तान विवाद के भड़कने की उम्मीद करो और बीबीसी की रिपोर्ट पर कि एमक्यूएम को भारतीय फंडिंग मिलती है इस पर बहुत सारी गुस्से से भरी भारतीय प्रतिक्रिया की भी."

(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की खबरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)

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