ईरान में लग्ज़री ब्रांडों की आई बहार

  • 30 जून 2015
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ईरान की राजधानी तेहरान में जगह-जगह सड़कों पर रोलैक्स और लुइ वितौं जैसे महंगे ब्रांडों के विज्ञापन और शॉपिंग सेंटर देखकर इस बात का अंदाज हो जाता है कि यहाँ बड़े ब्रांडों का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है.

ईरान में इस्लामी क्रांति के बाद कई दशकों की आर्थिक तंगी झेलने वाले मिडिल क्लास ने अब बड़े ब्रांडों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. तेहरान के अमीर युवाओं के लिए ख़रीदारी एक नए धर्म जैसी है.

तीस वर्षीय ईरानी फैशन ब्लॉगर बहार का कहना है, "इंटरनेट, सैटेलाइट टीवी और विदेशों में यात्रा करने से लोगों में बड़े ब्रांडों के कपड़े पहनने का शौक़ पैदा हुआ है."

'रिच किड्स ऑफ तेहरान'

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तेहरान के कुछ अमीर युवाओं ने अपनी ब्रांडेड उत्पादों की प्रदर्शनी के लिए 'रिच किड्स ऑफ तेहरान' नामक इस्टांग्राम अकाउंट बनाया है जिसमें वो अपने डिज़ाइनर कपड़ों और आधुनिक लाइफ़स्टाइल से जुड़ी तस्वीरें पोस्ट करते हैं.

जब ये अकाउंट सामने आया तो ईरान के निम्नवर्गीय लोगों के अलावा राजनीतिक और संवैधानिक पदों पर बैठे रूढ़िवादियों ने काफ़ी गुस्सा दिखाया था.

इसका इन अमीर ईरानी युवाओं पर कोई असर नज़र नहीं आया. वो बदस्तूर इस वेबसाइट पर अपने डिज़ाइनर लाइफ़स्टाइल का प्रदर्शन करते रहे.

इस अकाउंट में हाल ही में तेहरान फैशन वीक की तस्वीरें पोस्ट की गईं और लोगों से पूछा गया कि वो इस साल छुट्टी मनाने कहां जा रहे हैं.

इस सवाल के जवाब में लोगों ने दुबई, तुर्की, इस्तांबुल, इटली और जापान जैसे देशों का नाम लिया.

शॉपिंग मॉल से ख़तरा

महंगे ब्रांड अभी सिर्फ़ अमीर वर्ग का ही शौक हैं इसलिए ईरान की 'सीमा शुल्क प्राधिकारी सूची' में आयात होने वाली 100 वस्तुओं की सूची में ये कीमती ब्रांड शामिल नहीं हैं.

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मेकअप से जुड़े महंगे ब्रांडों के आयात में बढ़ोतरी की गुंजाइश कम ही है. साल 2015 में देश में आयात का कुल मूल्य 52 अरब डॉलर था जिसमें मेकअप से संबंधित वस्तुएं महज़ 0.1 फ़ीसदी थीं.

तेहरान के शॉपिंग मॉल भी दुनिया में अन्य देशों के बड़े शॉपिंग मॉल जैसे ही दिखते हैं. उनमें जो कीमती डिजाइनर सामान बेचे जाते हैं वो तुर्की और खाड़ी देशों में व्यापार करने वाले डीलर सप्लाई करते हैं.

जो शॉपिंग मॉल ये उत्पाद बेचते हैं उनका इन उत्पादों को बनाने वाली कंपनियों से कोई सरोकार नहीं होता.

ईरान पर पश्चिमी फैशन ब्रांडों का व्यापार करने को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है. लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम के कारण जो प्रतिबंध उसपर लगे उनके कारण इन ब्रांडों के लिए वहां कारोबार करना थोड़ा मुश्किल ज़रूर होता है.

ईरान में अभी तक जिन पश्चिमी कंपनियों ने अपने बड़े रिटेल स्टोर खोले हैं उनमें मैंगो, बैनेटोन और स्काडा महत्वपूर्ण हैं.

भरोसा

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एक ऑफ़िस में नौकरी करने वाली मरियम की सालाना आय करीब 17 हजार डॉलर है. उन्होंने हाल ही में अपने एक महीने के वेतन से ज़्यादा कीमत का 'बर्बरी' कंपनी का बैग खरीदा है.

यह बैग उन्होंने महंगे ब्रांडों का सामान बेचने वाली एक ईरानी वेबसाइट से खरीदा था. यह साइट स्थानीय क्रेडिट कार्ड से भुगतान स्वीकार करती है और सामान मुफ्त घर भिजवा देती है.

मरियम ने बीबीसी फ़ारसी को बताया कि उन्हें सस्ते सामान से ज़्यादा ब्रांडेड उत्पाद पर भरोसा है.

उन्होंने कहा, "मध्यम वर्ग के लोगों पर कीमती कपड़े और घड़ियां पहनने का दबाव होता है. व्यक्तिगत रूप से खुद मुझे बड़े ब्रांड के कपड़े पहनने से आत्मविश्वास मिलता है."

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार कई सालों से वैश्विक प्रतिबंध के बावजूद ईरान की प्रति व्यक्ति आय 5,200 डॉलर है.

इसका मतलब है ईरान में लोगों के पास तेजी से विकास करते देशों जैसे ब्राजील, चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका के लोगों से ज्यादा पैसा है.

उम्मीद की जा रही है कि परमाणु समझौता होने पर अगर ईरान पर लगाए प्रतिबंध खत्म हो गए तो वे बड़े ब्रांड जिन्हें ईरान जैसी नई मंडी में किस्मत आज़माने का इंतज़ार है, दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करेंगे.

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