समलैंगिक शादियों को ऐसे मिली मंजूरी...

  • 28 जून 2015
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अमरीका में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद समलैंगिक विवाह को वैधता मिल गई है.

सरकार की ओर से इस पर लगी पाबंदी खत्म हो गई है.

इस फ़ैसले का मतलब ये है कि अमरीका के सभी राज्यों को गे और लेस्बियन जोड़ों को शादी के लाइसेंस देने होंगे और दूसरे राज्यों में हुई शादियों को मान्यता देनी होगी.

कैसे हुआ बदलाव?

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Image caption मैसेचुसेट्स में समलैंगिक शादी करने वाले शुरुआती लोगों में से एक जोड़ा

साल 1996 में अमरीकी कांग्रेस ने 'द डिफेंस ऑफ मैरिज एक्ट' पारित किया और राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने इस पर दस्तख़त किए.

इस कानून के जरिए समलैंगिक शादियों को मान्यता देने पर रोक लगाई गई.

साल 2003 में मैसेचुसेट्स के जजों ने कहा कि राज्य का संविधान गे शादियों की इजाज़त देता है और इसके कुछ समय बाद ऐसी शादियों को लाइसेंस मिलने लगे.

इसके बाद के सालों में कुछ ही राज्यों ने गे शादियों पर पाबंदी लगाई जबकि दूसरे राज्य समलैंकिगक शादियों को कोर्ट के आदेश या फिर कानून बनाकर मान्यता देने लगे.

जनमत संग्रह

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Image caption अपने मृत पति से शादी को मान्यता नहीं देने पर जिम ओबेरगेफेल ने ओहियो सरकार के खिलाफ केस दायर किया

कैलिफोर्निया में कोर्ट ने समलैंगिक शादी की इजाज़त दे दी थी.

उसके बाद साल 2008 में जनमत संग्रह के जरिए इस पर पाबंदी लगाई गई.

अमरीका में ये तब तक जारी रहा जब तक कि साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने 'द डिफेंस ऑफ मेरिज एक्ट' को चुनौती नहीं दी गई.

न्यायाधीशों को ये तय करना था कि क्या संवैधानिक तौर पर राज्यों को समलैंगिक शादी का प्रमाणपत्र जारी करने की आवश्यकता है और यदि समलैंगिक विवाह कहीं और हुआ हो तो क्या राज्यों को उन्हें मान्यता देने की जरूरत है?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पहले वाशिंगटन डीसी और 36 राज्यों में समलैंगिंक जोड़ों को शादी का लाइसेंस दिया जा रहा था

टर्निंग प्वाइंट

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एक अहम टर्निंग प्वाइंट अक्टूबर 2014 में आया.

सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक शादियों पर पाबंदी लगाने के फ़ैसले को पलटने वाली निचली अदालतों के आदेशों के खिलाफ अपीलों को न सुनने का निर्णय लिया.

इससे कई अन्य राज्यों में गे शादियों को वैधता मिली.

अन्य राज्यों में समलैंगिक शादियों को या तो कानून बनाकर अथवा जनमत के जरिए मंजूरी मिली.

मिशीगन में समलैंगिक जोड़ों को कुछ वक्त के लिए शादी की इजाज़त मिली थी. बाद में एक अदालत ने इस पर पाबंदी हटाने के फ़ैसले पर रोक लगा दी थी.

अपील खारिज

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6 अक्टूबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने पांच राज्यों की ओर से गे शादियों पर लगाई गई पाबंदियों को कोर्ट की ओर से हटाए जाने के खिलाफ की गई अपील को खारिज कर दिया.

गे शादियों पर पाबंदियों को चुनौती देने वालों ने सुप्रीम कोर्ट के 2013 के यूनाइटेड स्टेट्स वर्सेज विंडसर मामले पर दिए फ़ैसले को आधार बनाया था.

उस मामले में कोर्ट ने 'द डिफेंस ऑफ मैरिज एक्ट' को पलट दिया था.

इस एक्ट के तहत समलैंगिक शादी करने वाले सोशल सिक्योरिटी पेंशन जैसे सरकारी कार्यक्रमों का लाभ पाने के अधिकारी नहीं होते थे.

अहम केस

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एक अन्य केस दो वकीलों थेओडोर ओल्सन और डेविड बोइस की ओर से दायर किया गया.

ये दोनों कैलिफोर्निया के मुवक्किल क्रिस्टिन पेरी और सांड्रा स्टाइर और एक अन्य जोड़े जेफरी जैरिल्लो और पॉल कतामी की ओर से पेश हो रहे थे.

उन्होंने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट को राज्य सरकार के प्रोपोजीशन 8 नाम के उस कानून को खारिज कर देना चाहिए जिसमें कहा गया है कि शादी एक पुरुष और एक महिला के बीच हो सकती है.

इस कानून ने समलैंकिग शादियों को मान्यता देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को रद्द कर दिया था. इसे 2008 में कैलिफोर्निया के वोटरों ने मान्यता दी थी.

आगे क्या होगा?

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अमरीका के 36 राज्यों में पहले की तरह शादियां होती रहेंगी.

बाकी राज्यों को लाइसेंस जारी करना होगा. हालांकि, अभी ये साफ नहीं है कि उन्हें कोर्ट के फ़ैसले को कब तक स्वीकार करना है.

ऐसी रिपोर्ट भी हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के महज एक घंटे बाद ही क्लर्क लाइसेंस जारी करने लगे.

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