चीन: ऐसे गंवाई छोटे निवेशकों ने बड़ी रक़म

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मेरी आंटी जिन चीन के लाखों ख़ुदरा निवेशकों में से एक हैं.

सात साल पहले नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद वो बाज़ार की वयोवृद्ध निवेशक और टीवी पर आने वाले शेयरों के निवेश से संबंधित कार्यक्रमों की उत्साही दर्शक बन गईं.

शंघाई में रहने वाली 62 साल की आंटी जिन 2010 से ही छोटे-मोटे आर्थिक नुक़सानों की भी अभ्यस्त हो चुकी हैं, लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग नज़र आती है.

उन्होंने पुडोंग के अपने फ्लैट से फ़ोन पर मुझे बताया, "मैंने एक संपत्ति ख़रीदने के बराबर की पूँजी गंवा दी है."

शेयर बाज़ार में फ़ायदा-नुकसान चलता रहता है, लेकिन मेरी आंटी की तरह के नए नवेले निवेशकों के लिए बड़ा आर्थिक नुक़सान किसी बड़े झटके की तरह होता है.

जिन कई मायनों में चीन में उभरते निवेशकों की नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं.

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नौ करोड़ चीनी निवेशकों में से 85 फ़ीसदी हिस्सा निजी निवेशकों का है.

चाइना हाउसहोल्ड फाइनेंस के हाल के सर्वे के मुताबिक़, नए निवेशकों की जमात में अधिकतर वे लोग शामिल हैं, जिनकी संपत्ति बहुत ही कम है और जिनकी शिक्षा हाईस्कूल से ज़्यादा नहीं हो पाई है.

पिछले साल हुए इस सर्वे में 4,000 घरों को शामिल किया गया था.

सर्वे के मुताबिक़, 36.7 फ़ीसदी निवेशक आठवीं तक शिक्षित हैं, 14.7 फ़ीसदी हाईस्कूल और 25.1 प्रतिशत केवल प्राइमरी तक पढ़े हैं. जबकि 5.8 फ़ीसदी तो साक्षर तक नहीं हैं.

अचानक बेशुमार दौलत कमाने का एक बड़ा कारण था सूचिबद्ध होने वाली कंपनियों की बाढ़ आना, क्योंकि सरकार ने कर्ज़ से लदी कंपनियों को धन इकट्ठा करने में मदद देने के लिए उभरते शेयर बाज़ारों के इस्तेमाल की मंज़ूरी दी थी.

जून 2015 में बाज़ार में तेज़ी आने से ठीक पहले आईपीओ से इकट्ठा होने वाली कुल धनराशि 1.8 अरब अमरीकी डॉलर से बढ़कर 9.89 अरब अमरीकी डॉलर हो गई थी.

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पिछले महीने शेयर बाज़ार में आई तेज़ी से पहले चीन के नियामकों ने बड़ी खरीदारी को लेकर चेतावनी भी दी थी.

5 दिसंबर 2014 को चाइना सिक्युरिटीज़ रेगुलेटरी कमीशन के प्रवक्ता डेंग जी ने कहा था, "अर्थव्यवस्था के लिए बाज़ार का स्थिर रहना आवश्यक है."

उन्होंने कहा था, "मैं निवेशकों से उम्मीद करता हूँ, खासकर छोटे और मझोले स्तर के निवेशकों से जो बाज़ार में नए हैं, कि वे तर्कसंगत तरीके से निवेश करें, बाज़ार का सम्मान करें और शेयर बाज़ार में निवेश से पहले जोख़िमों का ध्यान रखें."

लेकिन उत्साही निवेशकों ने इस चेतावनी को नज़रअंदाज किया.

चीनी मीडिया के मुताबिक़, सबसे ज़्यादा जोख़िम पेंशनधारी लोगों ने अपनी बचत शेयर बाज़ार में डालकर उठाया. उन्हें उम्मीद थी कि इससे उन्हें बड़ा फ़ायदा होगा.

एक्सपर्ट ने तेज़ी को सुधार बताया

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इस बीच, चीन की दूसरी सरकारी संस्थाएं आम लोगों को बाज़ार में पैसा लगाने के लिए उत्साहित कर रही थीं. ख़ासतौर पर 'पीपुल्स डेली' जैसे सरकारी अख़बार.

'पीपुल्स डेली' की वेबसाइट पर छपे एक लेख में शेयर बाज़ार विशेषज्ञ ने बाज़ार में आई तेज़ी को 'अर्थव्यवस्था में सुधार' बताया.

इसका अर्थ यह निकाला गया कि शेयर बाज़ार में आया उछाल चीन की लगातार मजबूत होती अर्थव्यवस्था का सकारात्मक नतीजा है.

चाइनाज़ स्टॉक रेग्युलेटरी कमीशन के चेयरमैन शियाओ गैंग ने इस बुलबुले को और बढ़ाया.

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उन्होंने मार्च में मीडिया से कहा कि वे 'अर्थव्यवस्था में सुधार' की सराहना करते हैं.

न्यूयॉर्क में सिल्वरक्रेस्ट एसेट मैनेजमेंट ग्रुप के प्रबंध निदेशक पैट्रिक शोवानेक ने बीबीसी को बताया, "अमरीका में भी राजनेता अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार के बारे में बात करते हैं, लेकिन यहां आप सोच नहीं सकते कि सिक्युरिटीज़ एक्सचेंज कमीशन का मुखिया शियाओ जैसी बात करेगा."

वो कहते हैं, "हो सकता है कि शियाओ पार्टी लाइन से राजनीतिक रूप से सही होने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन यह समस्या पैदा करने वाला है."

यहां तक कि जब यह बुलबुला फूटा तो भी निवेशकों को कहा गया कि "हालात हमारे पक्ष में हैं और हमारे पास शेयर बाज़ार को स्थिर रखने की क्षमता और विश्वास है."

बाज़ार को संभालने के सरकार की ओर से उठाए गए क़दम काम करते नज़र आते हैं.

9 जुलाई को शुरुआती गिरावट के बाद शंघाई कंपोज़िट इंडेक्स लगभग 6 फ़ीसदी और दस जुलाई को 4.8 फ़ीसदी बढ़त के साथ बंद हुआ था.

आशंका

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इसे कुछ लोग सुधार के संकेत मान रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि सरकार को अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है.

पैट्रिक शोवानेक ने सवाल किया, "अगर लोगों को शेयर बेचने से मना किया जाता है, सरकारी एजेंसियों को शेयर खरीदने का आदेश दिया जाता है और खस्ताहाल कंपनियों की ट्रेडिंग को रोका जाता है, तो क्या होगा?"

वे कहते हैं, "यह मुझे वियतनाम की लड़ाई के वक़्त की मशहूर कहावत याद आती है कि शहर बचाने के लिए ज़रूरी है कि शहर को तबाह कर दिया जाए."

यह सारी स्थिति मेरी आंटी के लिए भ्रम पैदा करने वाली है, लेकिन एक बात को लेकर वो स्पष्ट हैं, "मैं नहीं सोचती हूं कि मैं शेयर बाज़ार में अब जल्द कोई पैसा लगाऊंगी."

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