ईरान से समझौता ऐतिहासिक ग़लती: इसराइल

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ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए हुए समझौते की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है लेकिन इसराइल ने इसे 'ऐतिहासिक ग़लती' बताया है.

वार्ताओं के लंबे दौरों के बाद मंगलवार को विएना में इस समझौते की घोषणा हुई.

इस समझौते में ईरान के ख़िलाफ़ लगे अतंरराष्ट्रीय प्रतिबंधित हटाए जाएंगे और बदले में ईरान की निगरानी की जाएगी ताकि वो परमाणु हथियार न बना सके.

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फेडेरिका मोघेरिनी ने इस समझौते को पूरी दुनिया के लिए 'आशा का संकेत' बताया.

लेकिन इसराइल प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू ने इस समझौते को 'ऐतिहासिक ग़लती' कहा है.

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उन्होंने कहा कि 'समझौते के कारण ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर मिलेंगे और इससे वो अपनी आतंक की मशीन और मध्य पूर्व और समूची दुनिया में अपने विस्तार और आक्रामकता को बढ़ावा देगा.'

इसराइल हमेशा से ईरान के साथ समझौते का विरोधी रहा है.

ओबामा की चेतावनी

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वहीं अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ने भी समझौता का स्वागत किया है लेकिन ये चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने समझौते का उल्लंघन किया तो उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंध फिर लगा दिए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि ईरान के लिए समझौते पर अमल करने के तमाम अच्छे कारण मौजूद हैं और इसका पालन न करने पर उसके परिणाम भी उसके सामने होंगे.

दूसरी तरफ़ ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने इस समझौते पर कहा है कि एक गैर ज़रूरी का संकट हल कर लिया गया है और एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है.

अमरीका, रूस, चीन, फ़्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के बीच परमाणु समझौते पर उन्होंने ट्वीट किया कि 'ये समझौता बताता है कि सकारात्मक बातचीत फ़ायदेमंद साबित हुई है.'

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'ब्यौरा अभी नहीं'

ईरान ने हमेशा इन आरोपों को ख़ारिज किया है कि वो परमाणु हथियार बना रहा है. वो अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए बताता है.

इस मुद्दे पर बीते 13 वर्षों से ईरान का पश्चिमी देशों से गतिरोध चल रहा था.

ईरान और पश्चिमी देशों के बीच हुए समझौते का विस्तृत ब्यौरा अभी जारी नहीं किया गया है.

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