सेना बाहर भेजने को क़ानून बदले जापान ने

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जापान की संसद के निचले सदन ने देश के सुरक्षा संबंधी क़ानूनों में बदलाव करने वाले दो विवादास्पद विधेयकों को विरोध प्रदर्शनों के बावजूद मंज़ूरी दे दी है.

इन बदलावों से जापान के सैनिक दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार देश से बाहर जाकर 'आत्मरक्षा के लिए' लड़ सकेंगे.

हालांकि इन विधेयकों को संसद के उच्च सदन की मंज़ूरी मिलना अभी बाकी है लेकिन कई लोगों का मानना है कि उच्च सदन में भी ये विधेयक पारित हो जाएंगे.

विरोध प्रदर्शन

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जापान में लोग इन बदलावों को पसंद नहीं कर रहे हैं. बुधवार को हज़ारों लोगों ने राजधानी टोक्यो में संसद के बाहर प्रदर्शन किया.

प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे ने चीन का हवाला देते हुए आत्मरक्षा के लिए इन बदलावों का समर्थन किया है.

लेकिन सर्वेक्षण बताते हैं कि जापान के आधे से अधिक नागरिक इसका विरोध कर रहे हैं.

चीन की प्रतिक्रिया

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जापान के निचले सदन में इन विधेयकों के पारित होने के बाद चीन ने प्रतिक्रिया दी है.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ख़ुआ चून्यिंग ने कहा, ''जापान प्रशांत महासागर में अपनी नीतियां बदल रहा है.''

उन्होंने कहा कि जापान को क्षेत्रीय स्थिरता को नुक़सान पहुंचाने से बचना चाहिए.

क़ानून में बदलाव का आशय

दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान के संविधान ने विवादों के निपटारे के लिए बल प्रयोग पर रोक लगा दी थी लेकिन आत्मरक्षा के मामलों में इसे सही बताया था.

लेकिन शिंज़ो आबे की सरकार तीन हालात में ही अपनी सेना को बाहर भेज सकेगी-

- जब जापान पर हमला हो, या उसके करीबी सहयोगी पर हमला हो जिससे जापान और उसके लोगों के लिए ख़तरा पैदा हो.

- जब हमले से निपटने के लिए कोई और समुचित साधन उपलब्ध न हो और जापान की सुरक्षा सुनिश्चित करनी हो.

- बल प्रयोग कम से कम किया जाएगा.

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