ग्रीस: राहत पैकेज पर वार्ता के लिए खुला रास्ता

  • 18 जुलाई 2015

प्रमुख यूरोज़ोन देशों की संसद की मंज़ूरी के बाद ग्रीस और उसके कर्ज़दाताओं के बीच तीसरे बेलआउट पैकेज पर औपचारिक बातचीत जल्द ही शुरू हो सकती है.

जर्मनी की संसद ने ग्रीस के बेलआउट को लेकर बातचीत को अंतिम मंज़ूरी दे दी है. वहाँ संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई.

जर्मनी की संसद में प्रस्ताव बहुमत से पास किया गया. 439 सांसदों ने प्रस्ताव के पक्ष में और 119 ने प्रस्ताव के ख़िलाफ़ मतदान किया, जबकि 40 सांसद गैरहाज़िर रहे.

इस प्रस्ताव पर मतदान से पहले चांसलर एंगेला मर्केल ने चेतावनी दी कि अगर संसद ने प्रस्ताव को मंज़ूरी नहीं दी तो "अराजकता" हो सकती है.

फ्रांस और फिनलैंड पहले ही अपना समर्थन दे चुके हैं.

सोमवार को ग्रीस को अपने कर्ज़ का एक बड़ा हिस्सा अदा करना है और उससे पहले ही उसे सात अरब यूरो की फौरी आर्थिक सहायता की मंज़ूरी मिल चुकी है.

यूरोग्रुप के प्रमुख जेरोन डिसेलब्लूम का कहना है कि अब एक मौका है जब ग्रीस की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है.

लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी है कि ये प्रक्रिया इतनी आसान नहीं होगी. उन्होंने कहा कि वार्ता चार हफ़्ते तक चल सकती है.

कैबिनेट में फेरबदल

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इस बीच ग्रीस को एक और समस्या से जूझना पड़ रहा है. राजधानी एथेंस के पास पहाड़ियों में भीषण आग लगी हुई है और अग्निशमन दल इससे जूझ रहे हैं. कई लोगों को वहाँ से हटाया गया है. तीन गाँवों से लोगों को इलाका खाली करना पड़ा. प्रधानमंत्री सिप्रास ने स्वंयसेवकों से मदद की अपील की है.

उन्होंने कहा, हर किसी को शांत रहने की ज़रूरत है. हमें स्वंयसेवकों की ज़रूरत होगी जो फ़ायर ब्रिगेड की निगरानी में मदद कर सकें. हमें आग से निपटना है और सामूहिक कोशिश की ज़रूरत है.

वहीं प्रधानमंत्री अलेक्सिस सिप्रास ने शुक्रवार को अपनी कैबिनेट में फेरबदल भी किया. ये फ़ैसला उन्होंने बेलआउट पैकेज पर ग्रीस की संसद में वोटिंग के दौरान अपनी सिरिज़ा पार्टी के कुछ सदस्यों की बग़ावत के बाद किया.

जिन मंत्रियों को हटाया गया उनमें ऊर्जा मंत्री प्रमुख हैं, जो विरोध करने वालों में से एक थे.

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