समुद्र की गहराइयों में अपनों की तलाश

  • 17 जुलाई 2015

जापान में दो लोग महीने में दो बार स्कूबा डाइविंग करते हैं. इसमें से एक अपनी पत्नी को ढूंढ रहा है और दूसरा अपनी बेटी को, जो जापान में चार साल पहले आए सुनामी की चपेट में आ गई थीं.

हालांकि दोनों ही लोग यह जानते हैं कि उनकी पत्नी और बेटी अब जीवित नहीं हैं, लेकिन उनकी खोज करना दोनों को ज़िंदगी जीने का मक़सद देता है.

जापान की ओनाग़ावा खाड़ी के चमकते पानी के नीचे सुनामी की दर्दनाक दास्तां देखने को मिलती है. यहां समुद्र के नीचे फ्रिज, टीवी, कार और ट्रक समेत कई चीज़ों का मलबा मौजूद है.

एक समुद्र विज्ञानी के अनुसार यहां की स्थिति ऐसी लगती है जैसे किसी ने पूरे शहर को मिक्सर में डालकर उलट-पुलट कर समुद्र में फेंक दिया हो.

सुनामी से पहले आया भूकंप

Image caption सुनामी में बर्बाद हुआ बैंक 77

'द बैंक 77' में काम करने वाली दोनों महिलाएं यहां आए भूकंप के कुछ देर बाद आए सुनामी में फंस गईं थीं.

11 मार्च 2011 को दोपहर दो बज कर पचास मिनट पर मिली सुनामी की चेतावनी से पहले वहां लोग भूकंप के नुकसान से निपटने में लगे हुए थे.

बैंक के मैनेजर को जब सुनामी का अंदेशा हुआ तो वो बैंक के अंदर गए और सभी कर्मचारियों को काम छोड़कर दो मंज़िला इमारत के ऊपर चढ़ने को कहा.

उन्हें लगा कि सुनामी आशांका के अनुरूप केवल छह मीटर ऊंची होगी. लेकिन वह इससे क़रीब तीन गुना अधिक ऊंची थी.

इसके बाद बैंक के सभी 13 कर्मचारी वहीं फंस गए और दोबारा कभी वापस घर नहीं जा पाए.

'मुझे घर वापस आना है'

Image caption यासुओ अपनी पत्नी के मोबाइल को पढ़ते हुए

इन 13 कर्मचारियों में 47 वर्षीय यूको और उनकी 26 वर्षीय सहकर्मी ऐमी नरीता भी थीं.

यूको के पति यासुओ उस दिन को याद करते हुए कहते हैं, ''उस दिन मैंने ही उसे बैंक छोड़ा था. जब मैं आॅफिस में था तो मैंने उनके इलाके में आने वाले सुनामी की चेतावनी रेडियो पर सुनी थी. काश उसके बाद मैंने वहां जाकर उसको ले लिया होता.''

वो कहते हैं, ''मुझे बाद में उसका मोबाइल मिला. मुझे उम्मीद नहीं थी कि वो चल रहा होगा. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से वो सही था. मैंने पाया कि वो मुझे एक मैसेज भेज रही थी जिसमें उसने लिखा था, 'सुनामी ख़तरनाक है, मैं घर आना चाहती हूं'''

वहीं ऐमीर नरीता के पिता मसाकी कहते हैं कि सुनामी से एक दिन पहले ही वे अपनी बेटी के साथ बैठे थे और साथ में खाना खाया था.

जापान कोस्ट गार्ड से मिली प्रेरणा

यासुओ ने दो साल पहले जापान के कोस्ट गार्ड के लोगों को समुद्र में गोता लगा कर सुनामी में बचे मलबे को ढूंढते हुए देखा था.

इसके बाद उन्हें लगा कि वो उन्हें भी यह करना चाहिए. वे शायद यूको को घर वापस ला सकें. इसके लिए उन्होंने मसाकी को भी राज़ी कर लिया.

हालांकि दोनों की उम्र 50 वर्ष के आसपास थी और उनके लिए यह करना आसान काम नहीं था.

मसाकी कहते हैं, ''पानी में गोता लगा कर मैं नीचे 10 मीटर तक तो जा सकता हूं, पर उससे ज़्यादा नीचे जाना मेरे बूते की बात नहीं.''

वो कहते हैं, ''लेकिन मेरे अंदर कहीं एक आस थी कि शायद मैं अपनी बेटी को वापस घर ले जा सकूं.''

उन्होंने बताया, ''इसलिए मैंने भी यासुओ के साथा डाइविंग सीखी और महीने में दो बार अपने दिल की तसल्ली के लिए इस इलाके में समुद्र तल तक डाइविंग करता हूं.''

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