अब ईरान में भी मॅकडॉनल्ड!

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यह वाक़ई ऐतिहासिक समझौता था. बातचीत के मैराथन दौर के बाद ईरान और पश्चिमी देशों ने परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए.

इससे इन देशों के बीच संबंध अब सुधरेंगे.

अगर इन देशों की सरकारों से समझौते पर मुहर लग गई तो ईरान से प्रतिबंध हट जाएंगे.

इसका मतलब यह हुआ कि विदेशों से ईरान में और यहां से विदेशों में धन का आना जाना और आसान हो जाएगा और अमरीकी कंपनियां तेहरान के साथ व्यापार के लिए और मौकों की तलाश करेंगी.

ईरान के सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई है कि क्या मशहूर अमरीकी ब्रांड मॅक्डॉनल्ड अब वहां भी अपनी दुकानें खोलेगा?

लोगों में खुशी की लहर?

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अगर यहां ट्विटर पर मॅक्डॉनल्ड को खोजें तो समझौते के बाद की गईं टिप्पणियां आपको बड़ी संख्या में मिल जाएंगी.

कुछ ट्वीट उम्मीद से भरे, कुछ निराशाजनक और कुछ तो व्यंग से भरे मिलेंगे.

हालांकि ऐसे संकेत भी हैं कि यह फ़ूड चेन संभावित ईरानी फ़्रेंचाइज़ पर नज़र लगाए हुए हो.

अगर आप ईरान में मॅक्डॉनल्ड का फ्रेंचाइज़ी लेना चाहते हैं तो आप इसके लिए आवेदन कर सकते हैं.

लेकिन कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक़, “ईरान में मॅक्डॉनल्ड रेस्तरां खोलने की कोई निश्चित तारीख़ तय नहीं की गई है.”

इसमें कहा गया है कि 'भविष्य में वो इस बारे में कोई क़दम उठा सकते हैं'.

फ़्रेंचाइज़ी

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हालांकि जिन देशों में इसकी फ़्रेंचाइज़ी नहीं है, उन सबके बारे में यही कहा गया है. मॅक्डॉनल्ड ने बीबीसी के सवाल का जवाब नहीं दिया.

संबंध सुधरने के बाद किन देशों में मैकडॉनल्ड पहुंचा?

रूस में जनवरी 1990 में मॅक्डॉनल्ड फ्रेंचाइज़ खुला. चीन से रिश्ते सुधरने के बाद अक्टूबर 1990 में यहां इसके रेस्तरां खुले. वियतनाम में फ़रवरी 2014 में मॅक्डॉनल्ड पहुंचा.

अभी इन देशों को है इंतज़ार

  • यमन
  • सीरिया
  • बोलीविया
  • उत्तरी कोरिया समेत कई देश

किसी देश को मॅक्डॉनल्ड मिलने से क्या होगा?

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फ़िलाडेल्फ़िया के सेंट जोसेफ़्स विश्वविद्यालय में फ़ूड मार्केटिंग के प्रोफ़ेसर जॉन स्टैंटन का कहना है, “दुनिया के बाकी हिस्से के लिए मॅक्डॉनल्ड अमरीकियत का एक छोटा हिस्सा है.”

वो कहते हैं, “जब यह मॉस्को में खुला तो लोग हैमबर्गर की बजाय अमरीकी स्वाद पसंद कर रहे थे. अमरीका में यह बच्चों के लिए होता है. लेकिन बाकी दुनिया में यह मध्यवर्ग की संपन्नता का प्रतीक हो सकता है.”

क्या ईरान में पहले ही मैकडॉनल्ड था?

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ऐसा नहीं है. ईरान में 'मैश डोनॉल्ड्स' की एक नकली फ़ूड चेन कंपनी के रेस्तरां हैं. आपको यह सुनकर ताज्जुब नहीं होगा कि अमरीकी फ़ूड चेन की ओर से इसे मान्यता नहीं है.

मैश डोनॉल्ड्स अकेला नहीं है, ईरान में ऐसे ढेरों मिलते-जुलते नामों वाले रेस्तरां है. कुछ तो दूसरों के मुक़ाबले बिल्कुल असली जैसे हैं.

इसका एक बढ़िया उदाहरण है केएफ़सी.

ईरान में साल 2012 में एक बहुत चर्चित ख़बर आई कि केएफ़सी ने कराज़ शहर में ईरान का अपना पहला आधिकारिक फ्रेंचाइज़ी खोला है, लेकिन बीबीसी फ़ारसी से जुड़े हमारे सहयोगियों ने इसे अनधिकृत पाया.

नकली केएफ़सी

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यम नाम की जो कंपनी केएफ़सी, टैको बेल और पिज्ज़ा हट की मालिक है, उसने अपनी वेबसाइट पर जानकारी दी है कि मध्य पूर्व के देशों में किसी भी नई फ़्रेंचाइज़ी के लिए आवेदन नहीं लिया जा रहा है.

यह अभी पता नहीं है कि अमरीकी मालिकाना हक़ वाली मेक्सिकन ग्रिल चेन 'चिपोटले' ईरान में कोई रेस्तरां खोलने की योजना बना रही है या नहीं.

लेकिन इसके नाम से मिलता जुलता रेस्तरां ईरान में पहले ही खुल चुका है.

तो क्या पश्चिम को ईरान से आने वाले व्यंजनों का स्वाद मिल पाएगा?

यह सवाल भी इंतज़ार करने वाला है, कम से कम प्रतिबंध हटने और ईरान के अपने वादों पर खरे उतरने तक.

ईरान को फ़ायदा

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ब्रितानी-ईरानी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स का मानना है कि अभी वो दिन दूर है, लेकिन पिछले 12 महीनों में ग्राहकों की संख्या में पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है.

जब प्रतिबंध हटेंगे तो यह उम्मीद है कि ईरानी पिस्ता, खजूर, केसर और अन्य जड़ी बूटियों की उपलब्धता आसान हो जाएगी.

जिन लोगों को इससे फ़ायदा होगा उनमें से एक हैं दक्षिण लंदन में स्थित ईरानी कैफ़े पर्सेपोलिस की सह मालिक सैली बूचर.

वो कहती हैं, “एक छोटे व्यवसाय के लिए बहुत मुश्किलें रही हैं और ये प्रतिबंध हमारी ओर नहीं था. अब इसका थोड़ा उल्टा असर भी होगा, अधिक पैसे में हम कम चीजें ख़रीद पाएंगे.”

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