भारत-पाक का नसीब और अमन की लकीर..

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पाकिस्तान में एक ड्रोन को गिराए जाने और भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी से पैदा हुआ तनाव पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में छाए हुए हैं.

रोज़नामा ‘दुनिया’ ने भारत के इस दावे को हास्यास्पद बताया है कि ये ड्रोन भारत का नहीं, बल्कि चीन का हो सकता है.

अख़बार के मुताबिक़ चीन दोस्त देश है, पाकिस्तान में हज़ारों चीनी विशेषज्ञ और कर्मचारी देश भर में जारी परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं, ऐसे में उसे ड्रोन भेज कर पाकिस्तान की जासूसी कराने की क्या ज़रूरत है?

अख़बार के मुताबिक़ जब भी पाकिस्तान से संबंधों में बेहतरी की कोशिश होती है तो भारत कोई न कोई शरारत कर फ़िज़ा में तल्खी घोल देता है और फिर दुनिया में ढिंढोरा पीटता है कि पाकिस्तान अमन नहीं चाहता.

Image caption पिछले दिनों रूस के उफा में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाक़ात हुई

‘भारत की साज़िशें’

‘जसारत’ कहता है कि मोदी के सत्ता में आने के बाद से भारत ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो साज़िशें की हैं, वो कामयाब नहीं हुईं.

अख़बार के मुताबिक़ इसी वजह से भारत की आक्रामकता में इजाफ़ा हो रहा है और वो पाकिस्तान को जंग की आग में खींचना चाहता है.

अख़बार का कहना है कि भारत के इस रुख़ को क़तई स्वीकार नहीं किया जा सकता है कि कश्मीर भारत का अंदरूनी मामला है.

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Image caption नियंत्रण रेखा पर तनाव के बीच इस बार ईद पर दोनों देशों के सुरक्षा बलों में मिठाई का आदान प्रदान भी नहीं हुआ

‘जंग’ ने भारतीय ‘जंगी बजट में वृद्धि और हथियारों की बेतहाशा ख़रीद’ की बात करते हुए लिखा है कि भारत में 'पाकिस्तान दुश्मन है,' फ़िज़ा पैदा कर दी गई है.

अख़बार के मुताबिक एटमी और मिसाइल टेक्नोलजी में आगे रहने के बावजूद पाकिस्तान को होशियार रहना चाहिए क्योंकि ऐसे हालात जंग का रूप भी ले लेते हैं.

‘रस्मी बयान’

वहीं, 'नवा-ए-वक़्त' ने पाकिस्तानी नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए लिखा है कि वो भारत को करारा जवाब देने की बजाय ये रस्मी बयान देने में जुटे हैं कि ‘शांति की हमारी कोशिशों को हमारी कमज़ोरी न समझा जाए.’

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Image caption कश्मीर दोनों देशों के बीच दशकों से एक लंबित मुद्दा है

अख़बार भारत से बातचीत की कोशिशों को भैंस के आगे बीन बजाना बताता है क्योंकि ‘भारत ने तो कश्मीर को अपना अटूट अंग बता कर इसे लेकर विवाद की गुंजाइश ही ख़त्म कर दी है.’

लेकिन रोज़नामा 'पाकिस्तान' लिखता है कि अगर ईरान, अमरीका और विश्व शक्तियों में परमाणु समझौता हो सकता है, ईरान और अमरीका अपने दशकों पुराने मतभेदों को छोड़ आगे बढ़ सकते हैं, तो भारत और पाकिस्तान दोतरफ़ा रिश्तों की बुनियाद क्यों नहीं रख सकते.

‘एक्सप्रेस’ ने भी इसी तरह की राय जताई है और साथ ही लिखा है कि ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर समझौते से पाकिस्तान को ईरान से गैस मिलने की संभावनाएं और रोशन होंगी.

वहीं दैनिक ‘इंसाफ़’ लिखता है कि कराची में बिजली और पानी की क़िल्लत कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.

'नसीब में नहीं अमन'

रुख़ भारत का करें तो यहां भी भारत और पाकिस्तान की तेज़ होती ज़ुबानी जंग सुर्ख़ियों में है.

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Image caption हाल के समय में रह रह कर भारत पाकिस्तान सीमा से तनाव की ख़बरें मिलती रही हैं

दिल्ली से छपने वाले रोज़नामा 'खबरें' ने लिखा है- ढाक के वहीं तीन पात. अख़बार के मुताबिक़ लगता है कि भारत और पाकिस्तान के नसीब में अमन से रहने की लकीर ही नहीं है.

सीमा पर फायरिंग के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराते हुए अख़बार ने लिखा है कि पाकिस्तान भारत के संयम को उसकी कमज़ोरी न समझे और रिश्तों को सामान्य बनाने की तरफ़ क़दम उठाए.

'हमारा समाज' लिखता है कि पाकिस्तान की बचकाना हरकतें ख़त्म होनी चाहिए और एक नए दौर का आगाज़ होना चाहिए क्योंकि वहां की जनता भी अब हिंसा और तनाव से तंग आ चुकी है और खुली हवा में सांस लेना चाहती है.

वहीं सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी को देखते हुए 'राष्ट्रीय सहारा' ने आगामी मॉनसून सत्र के तूफ़ानी होने की बात कही है.

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