भूकंप के बाद नेपाल से मानव तस्करी में उछाल

  • 30 जुलाई 2015
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अप्रैल और मई में आए विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल से लगती भारतीय सीमा में मानव तस्करी, ख़ासकर बच्चों, लड़कियों और महिलाओं की, में भारी बढ़ोत्तरी हुई है.

महिलाओं और बच्चों की तस्करी को रोकने के लिए काम कर रहे अधिकारियों का कहना है कि मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाए गए ज़्यादातर भूकंप से प्रभावित परिवारों से हैं.

उनका कहना है कि भूकंप के बाद हाल ही के हफ़्तों में 251 लोगों- जिनमें ज़्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं- को पश्चिमी नेपाल में भारत-नेपाल की तीन सीमा चौकियों से पकड़ा गया है.

यह चौकियां हैं रुपादिया, गौरी-फांटा और बनबसा. इनके अलावा दक्षिणी और पूर्वी नेपाल में और भी सीमा चौकियां हैं जो मानव तस्करी के लिहाज़ से इतनी ही संवेदनशील हैं.

यौन शोषण के लिए तस्करी

अधिकारियों का कहना है कि तस्करों से इन लोगों को छुड़वाने का श्रेय नेपाल पुलिस और एनजीओ की लगातार निगरानी को जाता है.

उनका कहना है कि ख़ासकर महिलाओं और बच्चों की मानव तस्करी पर लगाम लगाने के लिए भारत-नेपाल की खुली सीमा पर लोगों की आवाजाही पर बहुत सख़्त निगरानी की जा रही है.

स्वयंसेवी संस्था मैती नेपाल की एक स्थानीय अधिकारी माहेश्वरी भट्टा कहती हैं, "भूकंप के बाद सीमा चौकियों से लड़कियों और महिलाओं की तस्करी की घटनाएं साफ़ बढ़ी हैं".

उन्होंने कहा कि काठमांडू के उत्तर में सिंधुपालचौक ज़िले की एक 22 वर्षीय युवती को भी बचाया गया था, "उसके परिवार के 13 नज़दीकी सदस्य मारे गए थे और उसका कहना था कि वह दुख और दर्द को भूलने के लिए वहां से दूर जाना चाहती थी."

कई रिपोर्ट कहती हैं कि हर साल सैकड़ों नेपाली महिलाओं और बच्चों को तस्करी कर भारतीय सीमा के पार पहुंचाया जाता है, जहां से कुछ अन्य देशों को भी चले जाते हैं.

इस हफ़्ते जारी अमरीकी सरकार की एक रिपोर्ट में भी यह कहा गया है कि नेपाल के अंदर और बाहर दोनों जगह तस्करी मुख्यतः यौन शोषण के लिए की जाती है.

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