ख़ूबसूरती से नुकसान भी होता है!

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खूबसूरत चेहरे की बदौलत आप जीवन में काफ़ी आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन मनोचिकित्सकों की राय में सुंदर होने के कुछ नुकसान भी हैं.

हम सब ख़ूबसूरत होने का सपना देखते हैं, क्योंकि हमारी नज़रों में ये कोई समस्या नहीं है.

मनोविज्ञान में ख़ूबसूरती के फ़ायदे और नुक़सान को लेकर काफ़ी दिलचस्पी देखी गई है. इस दिलचस्पी का केंद्र एक ही सवाल है क्या ख़ूबसूरती के चलते हमेशा फ़ायदा होता है या कभी नुकसान भी उठाना पड़ता है!

इसको लेकर शार्लोट स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ नॉर्थ कैरोलिना की मनोचिकित्सक लिज़ा स्लेटरी वॉकर और टोन्या फ्रेवर्ट ने कई दशकों के अध्ययन के बाद जो निष्कर्ष निकाला है, शायद उसकी कल्पना आपने नहीं की होगी.

दरअसल, सतही तौर पर देखें तो ख़ूबसूरती आपके इर्द-गिर्द एक आभामंडल बना देती है. अगर हम किसी ख़ूबसूरत व्यक्ति को देखते हैं तो हमारा अवचेतन मन यह मान लेता है कि वह शख़्स दूसरे मायनों में भी शानदार होगा.

अनुमान का बुलबुला

लिजा स्लेटरी वॉकर ने कहा, "अपनी शुरुआती बातचीत में हम इन गुणों में से कई की पहचान कर लेते हैं."

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मनोचिकित्सकों की राय में, जो खूबसूरत है वो अच्छा है, केवल अनुमान भर हो सकता है. लेकिन सिटकॉम 30 रॉक के मुताबिक ये कहना केवल बुलबुला भर है. अब जॉन हैम का उदाहरण ही लीजिए, जो सक्षम नहीं हैं लेकिन अपने सुंदर रंग रूप के चलते उन्हें खुद को लेकर गलतफहमी भी है.

एक डॉक्टर के तौर पर उनमें कोई कुशलता नहीं है, लेकिन अपनी प्राकृतिक सुंदरता के चलते वे मेडिकल स्कूल की परीक्षा पास करने में कामयाब रहे.

मौजूद साक्ष्यों के मुताबिक़ बुलबुला भी एक वास्तविकता है. शिक्षा के क्षेत्र में, वॉकर और फ्रेवर्ट ने पाया है अच्छे रंग रूप वाले छात्रों को स्कूल और यूनिवर्सिटी में शिक्षक ज़्यादा बुद्धिमान मानते हैं और उन्हें बेहतर ग्रेड भी दे देते हैं.

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इस बुलबुले का असर अगले कई साल तक बना रहता है. फ्रेवर्ट कहते हैं, "इसका प्रभाव पड़ता है, आपका आत्मविश्वास बढ़ जाता है, ख़ुद के प्रति सकारात्मक सोच होती है और अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के लिए कहीं ज़्यादा मौक़े मिलते हैं."

नौकरी में फ़ायदा

कार्यक्षेत्र में, आपका सुंदर रंग रूप काफी फ़ायदा पहुंचाता है. ज़्यादा आकर्षक लोग, सामान्य लोगों की तुलना में कहीं ज़्यादा पैसे कमाते हैं और कॉरपोरेट जगत में कहीं तेजी से सीढ़ियां चढ़ते हैं.

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एमबीए स्नातकों पर हुए एक अध्ययन में ये देखा गया है कि सबसे आकर्षक और सबसे कम आकर्षक लोगों के जीवन भर की कमाई में 10 से 15 फ़ीसदी का अंतर होता है. वॉल्कर कहती हैं, "आकर्षक रंग रूप वालों के स्कूल से लेकर कार्यक्षेत्र तक पूरे जीवन फ़ायदा मिलता है."

अदालतों में भी प्रसन्न चेहरा अपना प्रभाव छोड़ता है. आकर्षक अभियुक्त को कम सज़ा मिलती है या कई बार सज़ा नहीं भी मिलती. आकर्षक वकीलों के केस जीतने की संभावना ज़्यादा होती है, उन्हें पैसे भी ज़्यादा मिलते हैं. वॉकर कहती हैं, "आकर्षक रंग रूप का व्यापक प्रभाव होता है."

लेकिन ज़रा ठहरिए. ख़ूबसूरती से हमेशा फ़ायदा ही नहीं होता, कई स्थिति में इसका नुकसान भी होता है.

नुकसान भी कम नहीं

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आकर्षक पुरुष को बेहतर टीम लीडर माना जाता है, लेकिन आकर्षक महिलाओं को ऊंची ज़िम्मेदारी नहीं मिलती, उनके ख़िलाफ़ अप्रत्यक्ष तौर पर सेक्सिट पूर्वाग्रह काम करने लगता है. (वॉकर और फ्रेवर्ट के मुताबिक़ अगर आपको इसकी तस्दीक़ हॉलीवुड की फिल्मों से करनी हो तो रेसे विदरस्पून की 'लीगली ब्लाँड' के अलावा कुछ देखने की ज़रूरत नहीं है).

इतना ही नहीं, आकर्षक लोगों को दूसरों की ईर्ष्या का सामना भी करना होता है. एक अध्ययन के मुताबिक़ अगर आपका साक्षात्कार आपके ही लिंग का शख्स कर रहा है और अगर आप उससे ज़्यादा आकर्षक हैं तो आपको नौकरी मिलने की संभावना कम हो जाती है.

इससे भी ख़तरनाक बात ये है कि अगर आप काफी ख़ूबसूरत और आकर्षक हैं तो आपको चिकित्सीय देखभाल कम मिलेगी. यानी अगर आप ख़ूबसूरत हैं और बीमार हो गए हैं तो डॉक्टर और नर्स भी आपकी बीमारी को ज़्यादा गंभीरता से नहीं लेंगे.

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इतना ही नहीं ख़ूबसूरती का सबसे बड़ा नुकसान रास्तों पर होता है. 1975 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक रास्ते में ख़ूबसूरत महिलाओं को देखकर लोग दूरी बरतते हैं हैं - शायद सम्मान के नज़रिए से.

फ्रेवर्ट कहती हैं, "खूबसूरत लोगों के बारे में माना जाता है कि वे ज़्यादा पावरफ़ुल भी होंगे, इसका नुक़सान ये है कि लोग उन्हें खुद से दूर पाते हैं और दूरी बरतते हैं."

ख़ूबसूरती से डर भी

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ऑनलाइन डेटिंग वेबसाइट के ओकेक्यूपिड ने हाल ही में एक दिलचस्प रिपोर्ट आई है जिसके मुताबिक ख़ूबसूरत प्रोफाइल पिक्चर वालों को सामान्य प्रोफाइल पिक्चर वालों की तुलना में अपना डेट मुश्किल से मिल पाया. शायद कम ख़ूबसूरत पिक्चरों से लोग कम भयभीत हुए हों.

ऐसे में ज़ाहिर है कि ख़ूबसूरत होना ही खुशी मिलने का पासपोर्ट नहीं है, हो सकता है इससे मदद मिले, लेकिन गारंटी नहीं है.

फ्रेवर्ट और वॉकर के मुताबिक ख़ूबसूरती का असर सतही होता है. फ्रेवर्ट कहती हैं, "इसे शॉर्ट कट कहा जा सकता है, लेकिन दूसरे शॉर्ट कट रास्तों की तरह ही यह विश्वसनीय नहीं होता."

(ये आर्टिकल आपकी जान बचा सकता है, कैसे)

नियुक्ति के दौरान ख़ूबसूरती का असर तब कम हो जाता है, जब मानव संसाधन विभाग को अगर उम्मीदवार के पूर्व काम के बारे में जानकारी मिल जाए.

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फ्रेवर्ट के मुताबिक़ आकर्षक क़द काठी लोगों को इंटरव्यू के दौरान अपने ही रंग रूप के चलते ही तनाव हो जाए तो इससे चयन प्रभावित हो जाता है. फ्रेवर्ट कहती हैं, "अगर अपने आकर्षक व्यक्तित्व के प्रति आब्सेशन हों तो यह आपके अनुभव को भी प्रभावित कर सकता है."

हालांकि आपके व्यक्तित्व में आपकी ख़ूबसूरती का कोई योगदान नहीं होता. जैसा कि लेखक दोरोथी पारकर ने ख़ूबसूरती से कहा, "सुंदरता केवल त्वचा तक गहरी होती है, जबकि बदसूरती हड्डियों तक पहुंचती है."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.

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