द्वितीय विश्व युद्ध: जापानी सम्राट को पछतावा

  • 15 अगस्त 2015
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जापान के सम्राट अकीहितो ने दूसरे विश्व युद्ध में अपने देश की भूमिका पर पहली बार गहरा पछतावा जताया है. 70 साल पहले आज ही के दिन जापान ने आत्मसमर्पण का ऐलान किया था.

दूसरे विश्व युद्ध के समापन की याद में आयोजित एक सभा में उन्होंने कहा कि वह ख़ौफ़ कभी दोहराया नहीं जाना चाहिए.

टोक्यो में एक सभा में प्रधानमंत्री शिंज़ो एबे और सम्राट अकीहितो ने एक मिनट का मौन रखा.

वहीं, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान के कृत्यों को पूरी तरह न स्वीकारने के लिए दक्षिण कोरिया और चीन ने जापान की आलोचना भी की है.

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दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क ग्वेन हे ने कहा कि जापानी सम्राट के बयान में बहुत कुछ कहा जाना बाक़ी रह गया.

उनका कहना था, "इतिहास को कभी ढका नहीं जा सकता. इतिहास अपने गवाहों की गवाही में ज़िंदा रहता है."

लिबरेशन डे

15 अगस्त 1945 को जापान ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण किया था.

इसी के साथ तब का एकजुट कोरियाई प्रायद्वीप जापानी साम्राज्य के 35 साल के क़ब्ज़े से आज़ाद हो गया था. कोरियाई लोग 15 अगस्त को लिब्रेशन डे (आज़ादी दिवस) के रूप में मनाते हैं.

जापान के सम्राट ने भले ही पहली बार अफ़सोस जताया हो लेकिन जापानी प्रधानमंत्री ने इस साल जापानी आक्रामकता के पीड़ितों से माफ़ी नहीं मांगी.

शिंज़ो एबे ने कहा, "युद्ध में जान गंवाने वाले जापानियों ने हमारी भूमि के भविष्य और समृद्धि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए."

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Image caption दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क ग्वेन हे लिब्रेशन डे समारोह के दौरान.

हालांकि इस साल एबे जापान के विवादित यासूकूनी युद्ध स्मारक नहीं गए. वे बीते सालों में वहां जाते रहे हैं.

एबे के सहयोगी और संसद सदस्य कोइची हागीउदा स्मारक पर गए और एबे की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की.

चीन और कोरिया की आलोचना

चीन और कोरिया इस स्मारक की आलोचना करते रहे हैं क्योंकि यहाँ युद्ध में मारे गए जापानियों के साथ-साथ उन नेताओं का भी सम्मान किया गया है जिन्हें युद्ध अपराधों का दोषी माना गया था.

चीनी विदेश मंत्रालय की एक प्रवक्ता ने कहा कि जापान को पीड़ित देशों के लोगों से गंभीरता से माफ़ी मांगनी चाहिए न कि इस अहम मुद्दे से बचना चाहिए.

शनिवार को हज़ारों दक्षिण कोरियाई प्रदर्शनकारी जापान विरोधी रैली निकालने वाले हैं.

बीते हफ़्ते एक कोरियाई प्रदर्शनकारी ने सोल में जापानी दूतावास के बाहर ख़ुद को आग लगा ली थी.

1995 में तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री तोमीची मुरायामा ने जापान के औपनिवेशिक शासन और आक्रामकता के लिए ऐतिहासिक माफ़ी मांगी थी.

दस साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जुनीचीरो कोइज़ूमी ने उनकी भावनाओं को दोहराया था.

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