पूर्व इराक़ी पीएम पर मुकदमे की सिफ़ारिश

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इराक़ की एक संसदीय समिति ने पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी पर मुक़दमा चलाने की सिफ़ारिश की है.

मलिकी और अन्य 30 अधिकारियों पर आरोप लग रहे हैं कि उनकी वजह से ही इस्लामिक स्टेट ने मोसुल पर क़ब्ज़ा किया था.

मलिकी एक शिया है और उन पर ऐसी नीतियां अपनाने के आरोप लगे हैं जिनसे सुन्नी बहुल इलाकों में असंतोष बढ़ा और आईएस को वहां अपनी पैठ बनाने में मदद मिली.

मोसुल के पूर्व गवर्नर अथिल अल नुजैफ़ी पर भी मुक़दमा चलाने की सिफारिश की गई है.

इस्लामिक स्टेट ने बहुत ही कम समय में मोसुल के अलावा इराक़ के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों के कई इलाक़ों पर क़ब्ज़ा कर लिया था.

भगोड़े कमांडरों का कोर्ट मार्शल

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इसके ठीक पहले प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी ने सेना के कमांडरों के कोर्ट मार्शल के लिए रास्ता साफ़ कर दिया.

ये वे कमांडर हैं, जो मई में रमादी और दूसरे शहरों पर इस्लामिक स्टेट का हमला होने पर अपनी जगह छोड़ कर भाग गए थे.

संसद के स्पीकर सलीम अल जबूरी ने एक बयान में कहा, "हर शख़्स जनता के प्रति जवाबदेह है और क़ानून के ऊपर कोई नहीं है."

उन्होंने कहा कि क़ानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए संसदीय पैनल की रिपोर्ट प्रॉसिक्यूटर जनरल के पास भेजी जाएगी.

सोमवार को संसद में इस रिपोर्ट पर मतदान होगा.

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इस्लामिक स्टेट मध्य-पूर्व में सबसे बड़े ख़तरे के रूप में उभरा है.

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