'महिलाओं के लिए वायग्रा' को मंज़ूरी

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अमरीकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने महिलाओं की कामेच्छा को बढ़ाने की एक दवा को मंज़ूरी दे दी है. इसे 'फीमेल वायग्रा' माना जा रहा है.

फ़्लिबैनसेरिन नाम की इस दवा को स्प्राउट फॉर्मेस्यूटिकल्स ने बनाया है.

हाल ही में इस दवा को एफडीए की परामर्श समिति ने पास कर दिया है.

मासिक धर्म निवृत्ति से पहले महिलाओं की कामेच्छा को फिर से हासिल करने के लिए मस्तिष्क के कुछ निश्चित रसायनों को बढ़ाने के मकसद से इस दवा को बनाया गया है.

सेहत पर अन्य मामूली असर डालने के लिए इस दवा की आलोचना होती रही है.

साइड इफेक्ट

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इस 'पिल' के कुछ अन्य रूप पहले भी मंज़ूरी के लिए भेजे गए थे लेकिन उन सभी को नामंज़ूर कर दिया गया था.

इस 'पिल' को 'एड्डी' नाम से बाज़ार में लाया जाएगा.

एफडीए ने इसे दो बार नामंज़ूर किया क्योंकि पहले ये इतना प्रभावी नहीं था और इसे लेने से जी मितलाना, चक्कर आना और बेहोशी जैसे लक्षण पैदा होते थे.

पहले एक जर्मन कंपनी, ब्योरिंगर इंगेलहाइम इस दवा को बना रही थी.

जब एफडीए ने इस दवा को नामंज़ूर कर दिया तो स्प्राउट ने इसे जर्मन कंपनी से खरीद लिया था.

4 जून को एफडीए परामर्श समिति की मीटिंग के दस्तावेज़ में इस दवा को महिलाओं में मासिक धर्म निवृत्ति से पहले 'हाइपोएक्टिव सेक्सुअल डिसऑर्डर' (एचएसडीडी) के इलाज की दवा बताया गया है.

डॉक्टरी परामर्श ज़रूरी

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महिलाओं को ये दवा हर रात लेनी होगी.

दवा लेने से पहले डॉक्टर को ये निर्धारित करना होगा कि एक महिला कामेच्छा कम होने के कारण तनाव से गुज़र रही है या नहीं.

फिलहाल अमरीकी बाज़ार में ऐसी दवा नहीं है.

फाइज़र, बेयर, प्रॉक्टर एंड गैंबल जैसी सभी बड़ी दवा कंपनियों ने इस मामले का अध्ययन किया था ताकि कोई उचित दवा बनाई जा सके.

लेकिन सभी कंपनियों ने बाद में इस योजना को बंद कर दिया.

महिला संगठन का समर्थन

कुल 25 कर्मचारियों वाली 'स्प्राउट' अपेक्षाकृत छोटी कंपनी है.

स्प्राउट की सीईओ, सिंडी वाइटहेड ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि कि कंपनी 'एड्डी' को बहुत सावधानी से बाज़ार में प्रमोट करेगी.

उन्होंने कहा, "हम ये कभी नहीं चाहेंगे कि एक मरीज़ जिसे इस दवा का कोई फायदा ही नहीं हो सकता, ये दवा ले, और फिर सभी को बताए कि ये काम नहीं करती."

इस दवा के प्रचार के लिए स्प्राउट फॉर्मेस्यूटिकल्स को महिला संगठन 'ईवन द स्कोर' से भी समर्थन मिला.

पुरुषों की यौन समस्याओं के लिए अनेक दवाओं को मंज़ूरी देने और महिलाओं की इन्हीं समस्याओं के लिए किसी भी दवा को पास ना करने के लिए के लिए 'ईवन द स्कोर' ने एफडीए की आलोचना की थी.

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