समलैंगिकता को 'बीमारी' बताया तो मुक़दमा

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चीन में विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने पाठ्य पुस्तक में समलैंगिकता को 'बीमारी' बताए जाने पर चीन के शिक्षा मंत्रालय पर मुक़दमा दायर कर दिया है.

शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार चेन कियुआन ने कानूनी कार्रवाई इसलिए की क्योंकि उन्हें अपने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में इस तरह की किताबें मिली थीं. उनमें से कुछ में लिखा था कि बिजली के झटकों से समलैंगिकता का 'इलाज' किया जा सकता है.

बीजिंग में एक अदालत ने इस मुक़दमे को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है जिसमें पाठ्य पुस्तकों को हटाए जाने की मांग की गई है.

'किताब पढ़कर डर गई'

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चेन ने एक अलग नाम से मुक़दमा दायर किया था लेकिन फिर उन्होंने अमरीकी मीडिया से अपने असली नाम के साथ बातचीत की.

वह कहती हैं, "समलैंगिकों पर पहले ही बहुत दबाव है. पाठ्यपुस्तकों के ज़रिए और दाग़ लगाने का सीधा नुक़सान होगा. मंत्रालय को ऐसी सामग्री पर निगरानी और उसे हटाने का दायित्व निभाना चाहिए."

चेन दक्षिणी गुआंगडोंग प्रांत के एक सरकारी विश्वविद्यालय में पढ़ती हैं. अपनी यौनेच्छा को लेकर संदेह होने के बाद वह पुस्तकालय से किताबें लेकर पढ़ रही थीं.

न्यूयॉर्क टाइम्स को टेलीफ़ोन पर दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया, "मुझे लगा कि पाठ्यपुस्तकें आधिकारिक होनी चाहिए. उन्हें पढ़ने के बाद मैं डर गई थी. मैं यह स्वीकार करने से और भी डर गई थी कि मैं समलैंगिक हूं."

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चीन ने समलैंगिकता को एक मानसिक बीमारी के रूप में वर्गीकृत करना वर्ष 2001 में बंद कर दिया था.

शिन्हुआ ने एक क्षेत्रीय एनजीओ की पड़ताल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बाद छपी दर्जनों पाठ्यपुस्तकों में अब भी इसे एक 'विकृति' बताया गया है.

पिछले साल चीन के इतिहास में पहली बार बीजिंग की एक अदालत ने 'समलैंगिक सुधार उपचार' करने वाले एक क्लिनिक के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक फ़ैसला दिया था.

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