काम बराबर तो सैलरी कम-ज़्यादा क्यूं?

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ऐसा कई बार बेहतरीन और कुशल लोगों के साथ भी हो सकता है. नौकरी बदलने के दौरान हमें लगता है कि हमने बहुत अच्छा सौदा किया, बेहतरीन वेतन पैकेज लिया. लेकिन ये खुशी निराशा में बदल जाती है जब ये पता चलता है कि एकसमान काम के लिए किसी अन्य सहकर्मी को ज्यादा पैकेज मिलता है.

जब इसकी जानकारी मिलती है, तो पहले पहल आपको लग सकता है कि अपने सुपरवाइजर या मैनेजर के पास जाकर अपने साथ हुए अन्याय की बात करें. लेकिन अगर आप नाराज़गी और सख्ती के साथ इस पर बात करते हैं, तो ये सही तरीका नहीं होगा.

हालांकि यह एक मुश्किल स्थिति जरूर है. तो फिर क्या हाथ पर हाथ धर कर बैठ जाएँ? आख़िर करना क्या चाहिए?

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लंदन की टैलेंट मैनेजमेंट कंसलटेंसी रीथिंक ग्रुप के सह संस्थापक माइकल बेनेट कहते हैं, "एक ओर आप चाहते हैं कि आपको आपकी क्षमता के हिसाब से वेतन मिले और इसमें कुछ गलत भी नहीं है. लेकिन साथ में आप ये भी नहीं चाहते हैं कि नई कंपनी में, नए कर्मचारी के तौर पर शुरुआत करते ही, आप व्यवस्था पर सवाल उठाने लगें."

ऐसा नहीं कि हालात एकदम नाउम्मीदी वाले ही हों. नीचे दिए तरीके अपना कर आप अपने पैकेज को बेहतर करवा सकते हो.

आप क्या कर सकते हैं?

बेनेट कहते हैं, "कंपनी के सेट अप को देखते हुए, आपको या तो सीधे अपने लाइन मैनेजर से बात करनी चाहिए या फिर मानव संसाधन (एचआर) विभाग के पास जाकर अपनी चिंता जाहिर करनी चाहिए."

लेकिन ऐसा करने से पहले, इस बात का पता लगाएँ और विचार करें कि क्या आपके साथी को बेहतर पैकेज मिलने कि कोई ख़ास वजह तो नहीं है.

बेनेट कहते हैं, "हो सकता है कि उन्होंने तब नौकरी ज्वाइन की हो जब मार्केट की स्थिति अलग रही हो, जिसकी वजह से उन्हें आज बेहतर वेतन मिल रहा है. इसलिए आपको पहले हर तथ्य की जांच कर लेनी चाहिए."

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ऐसा बहुत कम ही होता है कि यह बेहद आसानी से हो. लिहाजा आपको अपनी जांच पड़ताल ठीक से करने की जरूरत है.

उत्तरी कैलिफोर्निया के स्टार्टअप नेकेडवाइन्स डॉटकॉम के मुख्य कार्यकारी बिनोयत वियाल कहते हैं, "क्या आप एक ही पद पर काम कर रहे हैं? क्या आपके सहकर्मी का पद समान है, लेकिन उसकी ज़िम्मेदारी ज़्यादा है? क्या उसे वरिष्ठता के आधार पर या फिर काम के बोनस के आधार पर ज़्यादा पैसे मिलते हैं?"

इन स्थितियों में अनुभव की अपनी भूमिका होती है.

एमस्टर्डम, फ्रैंकफर्ट, मिलान, पेरिस और प्राग जैसे शहरों में शाखाओं वाली कंपनी कैनेडी एक्जीक्यूटिव सर्च के प्रमुख जॉर्ग स्टेजमैन ने कहा, "अगर आप मेट्रो ड्राइवर हैं तो इस बात का कोई मतलब नहीं है कि आपके पास आरक्योलॉजी में डॉक्टरेट की डिग्री है."

बेहतर काम करने पर जोर

ऐसी स्थिति में अगर आप सबवे ड्राइवर हैं तो आपको समान वेतन मिलना चाहिए. लेकिन जॉर्ग कहते हैं, "अगर मैं किसी कंपनी में रिजिनल मैनेजर हूं और मेरे सहकर्मी रिजिनल मैनेजर के पास ज्यादा अनुभव है और उसे ज़्यादा वेतन मिलता है, तो शिकायत की कोई वजह नहीं है."

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वियाल के मुताबिक, इस मसले को उठाने से पहले आपको असर के बारे में आकलन करना चाहिए.

वे कहते हैं, "आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपका काम कंपनी के लिए अहम है. अपने साकारात्मक योगदान को किसी निश्चित मापदंड पर तौलें. इससे आपको बॉस से बातचीत करने में ख़ासी मदद मिलेगी."

इसके अलावा आपको अपने से स्पष्ट उमीदें रखना चाहिए. वियाल कहते हैं, "आप एक बार सेट हो जाएं और आपको पक्की जानकारी हो कि दूसरे साथी से कम पैसा मिल रहा है, तो आपके बॉस को ये पता होना चाहिए की आप में और काम करने, बेहतर प्रॉजेक्ट करने की भूख है. ऐसा नहीं होता कि आपके महज़ मुद्दा उठाने आपको बॉस ज़्यादा पैसे दे देगा."

वियाल कहते हैं, "अगर आपके समान पद वाले व्यक्ति को आप से ज़्यादा मिल रहा है, तो आप उन प्रोजेक्टों को लीजिए जिन्हें वो नहीं करते, और उसे बेहतरीन ढंग से करें."

कानून क्या कहता है?

इस मामले में कानूनी राय इस बात पर निर्भर है कि आप कहां रहते हैं. उदाहरण के लिए अगर अमरीका और कनाडा में रहते हो, तो वहां अपने वेतन पैकेज पर सवाल उठाने पर, आपके ख़िलाफ़ किसी नियम के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती है.

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न्यूयार्क स्थित मार्केटिंग एनालिटिक् कंपनी समआल के सीईओ डेन एटकिंसन बताते हैं, "सही और कानूनी तरीका यही है कि आप अपने मैनेजर से संपर्क कीजिए और सकारात्मक तरीके से, आराम से पूछिए कि क्या कारण हैं कि समान पद पर अलग अलग वेतन मिल रहा है." समऑल अपने कर्मचारियों की सेलरी में पारदर्शिता बरतता है और इसे गूगल डॉक्यूमेंट्स के तौर पर सभी कर्मचारियों को मुहैया कराता है, ताकि लोग चाहे तो किसी का भी वेतन देख सकें.

हालांकि एटकिंसन का सुझाव ये भी है कि बातचीत के दौरान आपको लड़ने भिड़ने वाला व्यवहार नहीं करना चाहिए. इसके बदले आपकी कोशिश यह होनी चाहिए कि आपकी सेलरी कैसे बढ़ सकती है.

इसके अलावा अगर आप अपनी नौकरी में किसी तरह के टकराव से बचना चाहते हैं तो आपके पास विकल्प है कि काम शुरु कर दे और करते रहें, फिर जब सेलरी के पहले रिव्यू की बारी आए तब मुद्दा उठाएँ.

इससे पहले मैनेजर से डिस्कस नहीं करें. लेकिन इस दौरान बेहतर प्रदर्शन के जरिए अपनी सेलरी को बढ़ाने के विकल्प की दिशा में बढ़ते रहें.

बेनेट कहते हैं, "इस तरीके में समय ज़्यादा जरूर लगेगा लेकिन कई बार यह प्रभावी होता है, एक कदम पीछे हटकर रिव्यू के विकल्प का इंतजार करना अच्छा रहेगा. बॉस का दरवाजा खटखटाने और सार्वजनिक तौर चीखने - चिल्लाने से न तो सेलरी के बढ़ेगी और न कोई और फ़ायदा होगा."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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