आईएस से धरोहरों को 'थ्री डी कैमरे बचाएंगे'

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Image caption पलमाइरा का ऐतिहासिक मंदिर अगस्त में आई एस ने तोड़ दिया था.

मध्यपूर्व में चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के ख़तरे से ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए थ्री डी कैमरों का सहारा लिया जाएगा.

ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पुरातत्वविदों के एक प्रॉजेक्ट के तहत मध्यपूर्व के हज़ारों लोगों से ऐतिहासिक धरोहरों की तस्वीरें खींचने के लिए कहा जाएगा.

इन तस्वीरों की मदद से शोधकर्ताओं को थ्री डी प्रिन्टरों के ज़रिए क्षतिग्रस्त होने वाली इमारतों और प्राचीन कलाकृतियों की प्रतिकृति बनाने में मदद मिलेगी.

सीरिया के पलमाइरा में हाल में दो ऐतिहासिक मंदिर को चरमपंथी संगठन आईएस ने निशाना बनाया है जिसके बाद ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर चिंता गहराने लगी है.

5000 कैमरे दिए जाएंगे लोगों को

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Image caption अल्लेपो में 5000 साल पुराने ऐतिहासिक क़िले को धमाकों से नुकसान हुआ है.

इंस्टीट्यूट ऑफ डिजिटल आर्कियोलॉजी का इरादा है कि दुनिया भर में संघर्ष वाले इलाकों में पांच हज़ार कैमरे बांटे जाएंगे और 2016 के अंत तक जोखिम में पड़े ऐतिहासिक स्थानों और धरोहरों की दस लाख तस्वीरें खींची जा सकें.

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Image caption बगदाद के पूर्व में स्थित समारा को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है.

संस्था के कार्यकारी निर्देशक रॉजर मिशेल ने बीबीसी को बताया, "यह समय के खिलाफ़ दौड़ है. जगहों को जिस तरह नष्ट किया जा रहा है उस हिसाब से हमने अपना टाइम-टेबल बदल दिया है."

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Image caption सीरिया में से 'क्रूसेडर कैसल्स' में से एक.
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Image caption इराकी कुर्दिस्तान में एर्बिल अब आईएस के कब्ज़े में है.

हालांकि इन जगहों की बेशुमार सामान्य तस्वीरें ली गई हैं, लेकिन ये टीम जिस थ्री डी कैमरे को इस्तेमाल करने वाली है उसकी मदद से इन जगहों और स्थलों को फिर से तैयार करने में मदद मिलेगी.

संस्था की टीम ने एक सस्ता थ्री डी कैमरा डिज़ाइन किया है जिससे कोई भी आसानी से हाई क्वॉलिटी तस्वीरे खींच सकता है जो एक ऑनलाइन डेटाबेस में अपने आप ही अपलोड हो जाएगी.

संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को की मदद से कैमरा मदद करने के इच्छुक स्थानीय लोगों को बांटा जाएगा.

मिशेल के मुताबिक मध्यपूर्व में लोग अपनी स्थानीय पहचान और इतिहास को लेकर काफ़ी सजग हैं.

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