क्या है बोल्ट की जीत का राज़?

  • 30 अगस्त 2015
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बीजिंग में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप में जमैका के उसैन बोल्ट ने एक बार फिर से स्प्रिंट स्पर्धाओं में अपनी बादशाहत साबित कर दी है.

उन्होंने 100 मीटर, 200 मीटर और 4x100 मीटर रिले में स्वर्ण जीता.

2008 में बीजिंग में हुए ओलंपिक खेलों के बाद बोल्ट ने हर विश्व चैम्पियनशिप और ओलंपिक में जीत हासिल की है.

आख़िर उनके इस बेहतरीन रिकॉर्ड का राज़ क्या है? क्या फ़र्राटा दौड़ में पैरों को प्रतिद्वंदियों से तेज़ चलाना ही जीत की गारंटी है?

जब कोई आम इंसान दौड़ना शुरू करता है तो वो बहुत तेज़ी से अपने पैर चलाने की कोशिश करता है. ऐसे में आपको लग सकता है कि बोल्ट भी यही करते होंगे, जबकि ऐसा नहीं है.

लोहबॉरो युनिवर्सिटी के डॉ. सैम एलेन कहते हैं, ''जो शीर्ष धावक होते हैं वो आम लोगों के मुक़ाबले कोई बहुत तेज़ी से पैर नहीं चलाते.''

बोल्ट शीर्ष धावकों से भी आगे

वो कहते हैं, ''शीर्ष धावकों की शारीरिक बनावट इस तरह की होती है कि उनकी मांसपेशियां अधिक तेज़ी से चलती हैं. ऐसे में वे बहुत ज़्यादा ताक़त पैदा करने में सक्षम होते हैं.''

उन्होंने आगे बताया, ''ऐसे में यह होता है कि ये लोग दौड़ते वक़्त ज़मीन पर कम समय के लिए अपने पैर रखते हैं. इसलिए यह अधिक तेज़ी से आगे बढ़ने में सक्षम होते हैं.''

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अमरीका के शोधकर्ता पीटर वेएंड कहते हैं, ''शीर्ष धावक एक क़दम से दूसरे क़दम के बीच 0.08 सेकेंड का समय लेते हैं जबकि एक आम आदमी 0.12 सेकेंड का समय लेता है.''

उन्होंने कहा, ''दौड़ते वक़्त धावक 60 प्रतिशत समय हवा में रहते हैं, वहीं एक आम आदमी 50 प्रतिशत समय ही हवा में गुज़ारता है.''

लेकिन इन शीर्ष धावकों में भी बोल्ट सबसे आगे हैं और वो कुछ हद तक उनकी लंबाई पर भी निर्भर करता है. वह 6.5 फीट लंबे हैं.

कैसे करते हैं बोल्ट

ब्रिटेन के शीर्ष धावक रह चुके क्रैग पिकरिंग कहते हैं, ''जब लोग दौड़ना शुरू करते हैं तो वे छोटे-छोटे क़दम लेते हैं जिससे कि वे अधिक तेज़ी पैदा कर सकें.''

वो आगे कहते हैं, ''बोल्ट जेनेटिक रूप से बहुत लंबे हैं. ऐसे में जब वो दौड़ना शुरू करते हैं तो उनके लिए छोटे क़दम लेना आसान नहीं होता. लेकिन जब वो अपनी टॉप स्पीड पर पहुंचते हैं तो सभी को पीछे छोड़ देते हैं.''

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आमतौर पर बोल्ट 100 मीटर की दौड़ 41 क़दमों में पूरा कर लेते हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी इस दूरी को कऱीब 45 क़दमों में पूरी करते हैं.

पिकरिंग कहते हैं, ''क़दमों के बीच में जो फासला होता है वो शीर्ष धावकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. इसी 100 मीटर की दौड़ को एक आम आदमी 50 से 55 क़दम में पूरा कर पाता है.''

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