कॉलम ख़ाली छोड़ अख़बार ने जताया विरोध

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तुर्की के कुछ स्तंभकारों ने मीडिया पर 'दबाव' के विरोध में एक अख़बार में छपने वाले अपने कॉलमों की जगह खाली छोड़ दिए.

'द सोस्जो डेली' अख़बार के इस क़दम को सोशल मीडिया पर भारी समर्थन मिला है.

पहले तुर्की के एक अख़बार ने मीडिया पर बंदिश के विरोध में पहले पन्ने पर खबरों की जगह पकवानों की रेसिपी छापी थी.

प्रतिबंध का विरोध

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'द सोस्जो डेली' के पहले पन्ने के संपादकीय में प्रेस की स्वतंत्रता पर लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना की गई है.

अख़बार ने संपादकीय की हेडिंग दी, "अगर सोस्जो चुप रहता है, तो तुर्की ख़ामोश रहता है."

अख़बार ने पहले पन्ने पर स्तंभकारों की तस्वीरें छापी हैं लेकिन नीचे की जगह पूरी तरह खाली छोड़ दी गई हैं.

ऐसा ही अंदर के पन्ने पर भी किया गया है.

ये अख़बार राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन और सरकार की खुलकर आलोचना करता रहा है.

अख़बार का कहना है कि वो प्रशासन की ओर से पत्रकारों और न्यायपालिका पर 'बढ़ते दबाव' को हाईलाइट करना चाहता है.

अख़बार का कहना है कि बीते सालभर में उसे अपने समाचारों को लेकर 57 अदालती मामलों और 67 आपराधिक शिकायतों का सामना करना पड़ा है. उसके 10 स्तंभकारों पर उनके आलेखों के लिए मुकदमे किए गए हैं.

अख़बार ने ये कदम उस दिन उठाया जिस दिन तुर्की की पुलिस ने अमरीका में बसे इस्लामिक नेता फितुल्लाह गुलेन से जुड़े एक मीडिया ग्रुप के अंकारा कार्यालय में छापा में मारा.

गुलेन राष्ट्रपति एर्दोआन के प्रतिद्वंद्वी हैं.

समर्थन

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अख़बार के कदम पर ट्विटर पर एक शख्स ने लिखा, "हमें कल सोस्जो ख़रीदना चाहिए"

एक दूसरे व्यक्ति ने लिखा, "मैं मीडिया की चुप्पी के ख़िलाफ हूं."

एक का कहना था कि उसने पहले कभी ये अख़बार नहीं पढ़ा लेकिन अब समर्थन ज़ाहिर करने के लिए ऐसा करेगा.

कई लोगों ने तुर्की मीडिया के भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की.

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