चीन ने सैनिकों की संख्या कम क्यों की

  • 4 सितंबर 2015
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दूसरे विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण के 70 वर्ष पूरे होने पर गुरुवार को चीन में विशाल सैन्य परेड निकाली गई.

इस दौरान अपने संबोधन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन की सेना में तीन लाख सैनिकों की कटौती करने का ऐलान किया. अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने 'शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व' पर ज़ोर दिया.

चीन के सरकारी मीडिया में राष्ट्रपति के इस क़दम की तारीफ़ की गई है. विशेषज्ञों ने सैनिकों की संख्या में कटौती का स्वागत किया है. हालांकि कुछ ने इसके संभावित परिणामों पर चिंता भी ज़ाहिर की है.

परेड से पहले सरकारी मीडिया ने परेड में शामिल होने वाले सैनिकों और प्रदर्शित किए जाने वाले सैन्य उपकरणों के बारे में जानकारी दी थी.

सेना से जुड़े पीएलए डेली ने बताया कि प्रदर्शित किए जाने वाले 84 फ़ीसदी सैन्य उपकरण पहली बार सार्वजनिक किए जा रहे हैं.

आश्चर्य नहीं

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शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने 21 अगस्त की एक रिपोर्ट में बताया था कि 12 हज़ार सैनिक, 40 प्रकार के सैन्य वाहन और 20 प्रकार के सैन्य विमान प्रदर्शित किए जाएंगे.

सरकारी मीडिया ने तीन लाख सैनिकों की कटौती के ऐलान पर कोई आश्चर्य प्रकट नहीं किया.

शिन्हुआ ने सेना में कटौती का स्वागत करते हुए इसे चीन की 'विश्व के शांतिपूर्ण विकास के लिए व्यवहारिक क़दम उठाने की प्रतिबद्धता' का सबूत बताया.

कुछ विशेषज्ञों ने सेना में कटौती को चीन के सैन्य तकनीक पर अधिक निर्भर होने की ओर बढ़ने का संकेत बताया.

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नवनीकरण के लिए ज़रूरी

पीएलए नेशनल डिफ़ेंस यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर लियांग फ़ेंग ने 3 अगस्त को चाइना न्यूज़ सर्विस एजेंसी से कहा था, "आधुनिक युद्धों में सेना जिस तकनीक का इस्तेमाल करती है उसकी गुणवत्ता और स्तर बहुत मायने रखता है."

इसी यूनिवर्सिटी के एक और प्रोफ़ेसर गोंग फेंगबिन ने कहा कि सेना को फिर से संगठित करने के लिए सैनिक संख्या में कटौती ज़रूरी थी.

उन्होंने सरकारी रेडियो सेवा चाइना रेडियो इंटरनेशनल से कहा, "सैनिक संख्या में तीन लाख की कटौती का मतलब सिर्फ़ सैनिकों को नौकरी से निकालना ही है. इसके मायने ये भी हैं कि सेना की यूनिटों का पुनर्गठन कैसे किया जाएगा और सेना को कैसे संगठित किया जाएगा."

हांगकांग से संचालित सिंग ताओ डेली के मुताबिक कटौती का असर सैन्य अस्पतालों के कर्मचारियों जैसे उन सैनिकों पर होगा जो युद्धक अभियानों में शामिल नहीं रहते हैं.

हांगकांग स्थित टिपप्णीकार शू झेन मानते हैं कि सैनिकों में कटौती से 'चीन से ख़तरे' की भावना को कम करना है.

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तकनीकी क्षमताओं का विकास

परेड के बाद चीन के सोशल मीडिया पर राष्ट्र के प्रति गर्व की भावना ही ज़्यादा प्रदर्शित की गई है.

कुछ ने कम्युनिस्ट पार्टी के सैनिक संख्या में कटौती करने के फ़ैसले पर चिंता भी ज़ाहिर की है.

मेन्गेई तेंगचाओ ने साइना वीबो पर लिखते हैं कि कटौती से चीन को नए हथियार विकसित करते रहने का बहाना मिल जाएगा.

उन्होंने लिखा, "जब कोई कहेगा कि चीन अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है तो चीन कहेगा देखो हमने तीन लाख सैनिक कम कर दिए."

हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि सैनिक संख्या में कटौती करना चीन की सेना के नवीनीकरण के लिए ज़रूरी है.

एक यूज़र ने साइना वीबो पर लिखा, "कटौती से होने वाली बचत का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उच्च तकनीक आधारित सैन्य क्षमताएं विकसित करने के लिए किया जा सकता है."

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