ऑस्ट्रिया और प्रवासियों को हंगरी से निकालेगा

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हंगरी के रास्ते सैकड़ों प्रवासियों का जर्मनी और ऑस्ट्रिया में जाने का सिलसिला जारी है.

ऑस्ट्रिया की सरकार ने कहा है कि वह रविवार को और प्रवासियों को हंगरी से ले जाने लिए रेलगाड़ियों का बंदोबस्त कर रही है.

समझा जाता है कि पिछले कुछ दिनोें के आंदर जर्मनी और ऑस्ट्रिया पंहुचने वाले प्रवासियों की तादाद 10,000 पार कर गई है.

प्रवासियों के संघर्ष की 10 मार्मिक तस्वीरें

हंगरी ने अपने देश में घुसने वाले प्रवासियों को जर्मनी और ऑस्ट्रिया की सीमा तक पंहुचाने के लिए रविवार को और ट्रेनें चलाने का फ़ैसला किया है.

इन अनेक सीरियाई लोगों के हालात दुनिया के सामने तब आए जब एक तीन साल के बच्चे की लाश तुर्की के समुद्र तट पर पाई गई थी.

कनाडा में उस बच्चे की याद में उस कुर्दी परिवार के वहां रहने वाले कुछ सदस्यों ने मेमोरियल सर्विस आयोजित की. कनाडा की सरकार इस परिवार का शरण लेने का आवेदन ख़ारिज कर चुकी है.

क्या है यूरोप का प्रवासी संकट

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दूसरी अोर ऑस्ट्रिया ने साफ़ किया है कि वह अपनी सीमा में दाख़िल होने वाले प्रवासियोें की संख्या की सीमा फ़िलहाल तय नहीं करेगा. वह मानता है कि ये लोग 'संकट ग्रस्त इलाक़ों' से आ रहे हैं और 'परेशान' हैं.

शनिवार को हज़ारों प्रवासी जर्मनी और ऑस्ट्रिया पंहुच गए, जिनमें बीमार, बूढ़े और बच्चे भी शामिल हैं.

हंगरी की सीमा में दाख़िल होने के बाद कई प्रवासी ने जर्मनी तक का तक़रीबन 175 किलोमीटर लंबा सफ़र पैदल ही तय करना शुरु कर दिया है.

प्रवासियों का स्वागत

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शनिवार को ऑस्ट्रिया और जर्मनी ने हज़ारों प्रवासियों को हंगरी में एक दिन फंसे रहने के बाद अपने देश आने की इजाज़त दे दी.

ऑस्ट्रियाई सीमा पर स्वयंसेवकों ने इन प्रवासियों का स्वागत किया और उसके बाद उनमें से कई प्रवासी वहां से सीधे या तो विएना के लिए रवाना हो गए या फिर जर्मनी में म्यूनिख के लिए.

प्रवासियों की दुर्दशा से ये भी ज़ाहिर हुआ कि यूरोप किस कदर इन शरणार्थियों के लगातार आने की समस्या से जूझ रहा है.

हंगरी में जब इन प्रवासियों को यूरोप में आगे यात्रा करने से रोका गया था तो राजधानी बुडापेस्ट में अव्यवस्था फैल गई.

'मिसाल न समझें'

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Image caption हंगरी में प्रवासियों को ऑस्ट्रिया की सामा पर छोड़ने के लिए बसें चलाई गईं

दूसरी अोर हंगरी ने यह भी कहा है कि प्रवासियों की समस्या से निपटने के लिए जो हालिया कदम उठाए गए, वो इस समस्या का दीर्घकालिक निदान नहीं है,बल्कि एक अस्थाई हल है.

इसे आगे के लिए कोई मिसाल ना समझा जाए.

चांसलर एंगेला मर्केल के एक प्रवक्ता ने कहा कि भविष्य में दोनों देश प्रवासियों को लेकर यूरोपीय संघ के नियमों का पालन करेंगे, जिनके तहत जिस देश में शरणार्थी सबसे पहले पहुंचता है वहीं उसे शरण लेने के लिए अर्ज़ी देना ज़रूरी होता है.

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प्रवासियों की ज़िद थी कि वे हंगरी के शरणार्थी शिविरों में रहने की बजाए जर्मनी और ऑस्ट्रिया की तरफ जाएंगे.

जब प्रवासियों की भीड़ हंगरी की पुलिस के मना करने पर भी ना रुकी और वो पैदल ही ऑस्ट्रिया की तरफ चल पड़े और हंगरी को ऑस्ट्रिया से लगी अपनी सीमा को खोलना पड़ा.

जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने भी कहा कि फिलहाल जर्मनी अपने बजट पर कोई दबाव डाले बगैर इन प्रवासियों का ख्याल रख सकता है.

इस बीच हंगरी में कुछ और प्रवासियों ने ऑस्ट्रिया जाने की कोशिश की, जिससे एक बार फिर हड़बड़ी और अव्यवस्था का माहौल बन गया.

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