'समुद्र में सिलेंडर पर घंटों तैरते रहे भारतीय'

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यमन के तट के पास समुद्र में एक गैस सिलेंडर पर वे चार घंटे तक तैरते रहे. जीने की आस छोड़ चुके भारतीय नागरिक किसी तरह जिंदा बच गए.

यह आपबीती है उन भारतीयों की, जिन पर यमन के पास हमला किया गया था.

अस्पताल के बिस्तर पर घायल पड़े अक़मल अली हारून जुनेजा ने बीबीसी से टेलीफ़ोन पर पूरी घटना सुनाई और ख़ुद के जीवित बचे होने को महज इत्तेफाक क़रार दिया.

जुनेजा 21 लोगों की टोली में शामिल थे जो दो नावों पर सवार होकर यमन जा रहे थे. इन नावों पर हुए हवाई हमले में छह भारतीय मारे गए जबकि 14 जान बचाने में सफल रहे. एक भारतीय लापता है.

'नाव पर हमला'

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गुजरात के मांडवी तलाया कस्बे के रहने वाले जुनेजा ने कहा, "मैं मजदूरी करने के लिए दुबई गया था. कंपनी का नाम याद नहीं, पर जिस कंपनी ने नौकरी दी थी, उसने हम लोगों को यमन जाने को कहा."

उनका मानना था कि यमन और आसपास के इलाक़े में जो लड़ाई चल रही है, उससे उनका कोई वास्ता नहीं.

वह कहते हैं, "हमने सोचा, यह उनकी आपसी लड़ाई है, हमसे कोई मतलब नहीं. वे भला हम पर हमला क्यों करेंगे?"

पर भारतीयों का यह सोचना ग़लत साबित हुआ. ग्यारह भारतीय मजदूरों को लेकर ज्यों ही एक नाव बंदरगाह से निकली, उस पर हथगोला फेंका गया. नाव के कप्तान ने उन्हें तुरंत पानी में कूदने की सलाह दी. दूसरा कोई चारा भी नहीं था.

'गैस सिलेंडर पर चार घंटे'

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जुनेजा कहते हैं, "इसके बाद अगले चार घंटे तक हम एक गैस सिलेंडर को किसी तरह पकड़े रहे और बमुश्किल तैरते रहे. हमने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी पर होश आने पर हमने अपने आप को अस्पताल के बिस्तर पर पाया."

स्थानीय मछुआरों की नज़र इन लोगों पर पड़ी और उन्होंने पानी में तैर रहे इन भारतीयों को बचाया. पर सभी लोगों की क़िस्मत इतनी अच्छी नहीं थी. चार लोग पानी में डूब कर मर गए.

भारत सरकार का एक नुमाइंदा उनसे अस्पताल में मिला और उनका हालचाल पूछा. लेकिन इसके अलावा और कोई सहायता उन्हें अब तक नहीं मिली है.

जुनेजा बीबीसी से गुज़ारिश करते हैं, "किसी तरह हम लोगों को भारत पंहुचाने का इंतजाम करिए. हम जल्द से जल्द अपने देश लौटना चाहते हैं."

फ़िलहाल, जुनेजा के साथ दूसरे छह लोग अस्पताल में हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है.

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