नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव ख़ारिज

  • 14 सितंबर 2015
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सैकडों साल तक हिंदू राष्ट्र रहा नेपाल, फिर से हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा. संविधान सभा ने देश की आठ साल पुरानी 'धर्मनिरपेक्ष' पहचान बरकरार रखने का फैसला किया है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार इसके विरोध में सोमवार को राजधानी काठमांडू में हिंदूवादी संगठनों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष हुआ. हिंसा उस वक्त भड़की जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने से रोका.

इससे पहले संविधान सभा की बैठक में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने संविधान से धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाने और देश की पुरानी हिंदू पहचान बहाल करने की मांग की.

संविधान सभा के अध्यक्ष सुभाष चंद्र नेमबांग ने यह मांग खारिज कर दी. इसके बाद पार्टी के कमल थापा ने अपने प्रस्ताव पर मतदान की मांग की थी.

लेकिन 21 सदस्यों ने ही इसका समर्थन किया. 601 सदस्यीय संविधान सभा में किसी प्रस्ताव पर मतदान के लिए 61 सदस्यों की मंजूरी अनिवार्य है.

पुलिस-प्रदर्शनकारियों की झड़पें

जब ये मांग नहीं मानी गई तो प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच असेंबली हॉल के बाहर झड़पें हुई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पानी छोड़ा और लाठियां बरसाई.

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उग्र प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर जा रहे संयुक्त राष्ट्र के एक वाहन समेत कई गाड़ियों पर हमला किया.

दक्षिण नेपाल में इसके ख़िलाफ पिछले कई हफ्तों से प्रदर्शन चल रहा है. कई हफ़्तों की हिंसक झड़पों में अब तक क़रीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है.

राजधानी काठमांडू में सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

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