स्कूल में कंप्यूटर के ज़्यादा इस्तेमाल का क्या असर?

  • 15 सितंबर 2015
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अंतरराष्ट्रीय संस्था ओईसीडी ने अपने एक शोध में पाया है कि स्कूल के कंप्यूटरों और क्लासरूम तकनीक में भारी निवेश का बच्चों की प्रदर्शन पर खास असर नहीं पड़ता है.

ऑर्गनाइज़ेंशन फ़ॉर इकनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलेपमेंट (ओआईसीडी) के शिक्षा निदेशक आंद्रियास श्लेकर ने कहा कि स्कूल प्रौद्योगिकी से “ढेर सारी झूठी उम्मीदें” पैदा हुई हैं.

बच्चों के व्यवहार के विश्लेषक टॉम बेनेट का कहना है कि स्कूल कंप्यूटरों से शिक्षकों की आंखें ज़रूर चौंधिया जाती हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षा में आईटी के भारी इस्तेमाल के बावजूद कोई छात्रों के प्रदर्शन में खास प्रगति नहीं देखी गई.

आंद्रियास श्लेकर कहते हैं, “अगर आप पूर्वी एशिया की बेहतरीन शिक्षा प्रणालियों को देखें तो वहां क्लासरूम में तकनीक के इस्तेमाल पर सावधानी बरती जाती है.”

वो कहते हैं, “जो छात्र टैबलेट और कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं, ज़्यादातर उनका प्रदर्शन उन छात्रों से खराब रहता है जो टैबलेट और कंप्यूटर का बहुत ज़्यादा इस्तमाल नहीं करते.”

प्रौद्योगिकी विश्लेषक संस्था गार्टनर का अनुमान है कि हर साल स्कूल की शिक्षा तकनीक पर 17.5 अरब पाउंड खर्च किया जाता है. केवल ब्रिटेन में ही स्कूलों पर वार्षिक 90 करोड़ पाउंड खर्च किया जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक

  • जो बच्चे स्कूलों में बार-बार कंप्यूटर का प्रयोग करते हैं, उनके नतीजे खराब होते हैं.
  • जो बच्चे हफ़्ते में एक या दो बार कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं, उनका प्रदर्शन उन बच्चों से बेहतर रहता है जो कभी-कभार ही कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं.
  • जिन देशों में पढ़ाई, गणित और विज्ञान में भारी सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया, वहां बच्चों के प्रदर्शन में कोई खास प्रगति नहीं देखी गई.
  • दक्षिण कोरिया और चीन में शंघाई के बेहतरीन स्कूलों में निचले स्तर पर कंप्यूटरों का इस्तेमाल बहुत ज़्यादा नहीं होता.
  • सिंगापुर के स्कूलों में भी तकनीक का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल नहीं होता.

इस रिपोर्ट पर कई प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

माइक्रोसॉफ़्ट के प्रवक्ता ह्यू मिलवार्ड ने कहा, “इंटरनेट से छात्रों को जानकारियां हासिल होती हैं.”

ब्रिटेन के एक स्कूल के हेड-टीचर जॉन मॉरिस ने कहा, “हम अपने बच्चों को उन नौकरियों के लिए तैयार कर रहे हैं जो अभी वजूद में ही नहीं हैं. जब लोग कहते हैं कि स्कूल में प्रौद्योगिकी पर बहुत पैसा खर्च हो रहा है तो मेरा जवाब होगा, ये बकवास बात है.”

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