नेपाल: मधेसियों ने सीमा पर आवाजाही रोकी

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नेपाल में मधेसी आंदोलनकारियों ने भारत-नेपाल सीमा पर वाहनों की आवाजाही रोक दी है.

गुरुवार सुबह से ही मधेसी दलों के नेता और कार्यकर्ता बड़ी तादाद में सीमा पर पहुंच गए थे.

यह प्रदर्शन दसगजा में बने बीरगंज-रक्सौल मैत्री पुल पर हो रहा है. इसे नो मैन्स लैंड समझा जाता है.

नेपाल के सुरक्षाकर्मी जब आंदोलनकारियों को पुल से हटाने जाते हैं तब वो लोग भारतीय सीमा के रक्सौल में चले जाते हैं और पुलिस के वहां से हटने पर वो फिर से पुल पर आ जाते हैं.

मधेसी आंदोलनकारियों की मांग है कि उन्हें नेपाल में उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाए.

सामान आपूर्ति रोकने के लिए धरना

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नेपाल के परसा ज़िले के प्रहरी उपनिरीक्षक एसपी दिवस लोहनी ने बताया कि आंदोलनकारी नेपाल को सामान की आपूर्ति रोकने के लिए धरना दे रहे हैं.

प्रदर्शनकारी सैकड़ों की तादाद में हैं इसलिए पुलिस को कार्रवाई करने में दिक्कत हो रही है.

लोहनी का कहना है कि बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और रात तक सड़क को खाली करा लिया जाएगा.

वहीं, पूर्वी सीमा के ककरवित्ता प्वाइंट पर कोई आंदोलनकारी नहीं हैं लेकिन वहां से भी ट्रकों की आवाजाही नहीं हो रही है.

भारतीय पक्ष ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ट्रकों को नेपाल में क्यों नहीं आने दिया जा रहा है.

पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें

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काठमांडू से बीबीसी संवाददाता संजय ढकाल का कहना है कि काठमांडू में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं.

हालाँकि मुमकिन है कि लोग आपूर्ति बाधित होने की आशंका से ईँधन जमा कर रहे हैं.

नेपाल में भारत के रास्ते ही पेट्रोलियम उत्पादों का आयात होता है.

हालाँकि राजधानी काठमांडू में खाने-पीने की चीज़ों की कमी नहीं है.

'सरकार तब सुनेगी जब दाना पानी बंद होगा'

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नेपाल के तराई इलाके में आंदोलन कर रहे लोगों का आरोप है कि 40 दिन से चल रहे आंदोलन को सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया है.

तराई मधेस सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष महेंद्र यादव ने कहा है कि शायद नेपाल सरकार उनकी बात तब ही सुनेगी जब काठमांडू का दाना-पानी बंद कर दिया जाएगा.

वहीं नेपाल सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष अनिल झा ने आरोप लगाया है कि पुलिस कर्फ़्यू लगाकर मधेसियों का दमन कर रही है.

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