हज हादसाः कफ़न और लाशों का अम्बार था

  • 25 सितंबर 2015
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मक्का में गुरुवार को हुई भगदड़ में 717 लोगों की मौत के बाद सऊदी शाह सलमान ने हज यात्रा के सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा के आदेश दिए हैं.

ये भगदड़ कल उस समय हुई जब मीना में शैतान को पत्थर मारने की रस्म अदा की जा रही थी.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्विटर के ज़रिए बताया कि जेद्दा में भारतीय वाणिज्यिक दूत ने हादसे में 14 भारतीयों के मारे जाने और 13 के घायल होने की ख़बर दी है. विदेश मंत्री का कहना है कि अभी सऊदी अधिकारी इस आंकड़े की पुष्टि करेंगे.

पढ़िए बीबीसी संवाददाताओं और प्रत्यक्षदर्शियों की आँखो देखी.

बशिर साद अब्दुल्लाही, बीबीसी

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मैं मीना शहर के बीचों बीच खड़ा हूँ और यहाँ से मुझे सफ़ेद कफन में लिपटे सिर्फ़ लोगों के शव दिखाई दिए. पुलिस ने इलाक़े की घेराबंदी कर दी थी इसलिए शवों की गिनती नहीं कर सका. लेकिन मैं जहाँ तक देख सका सिर्फ़ शव ही दिखाई दिए.

यहाँ मृतकों के कई रिश्तदारे भी आए हुए हैं. कई श्रद्धालु भी शोक जताने के लिए आए हैं. पुलिस अधिकारी लोगों को इस इलाक़े से निकलने से मना कर रहे हैं.

युसूफ़ इब्राहिम यकासाई, बीबीसी हॉज़ा सर्विस

भगदड़ में ज़िंदा बच पाए एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि हुआ ये था कि सऊदी सुरक्षाबलों ने जमरात की ओर जाने वाली एक सड़क को बंद कर दिया था.

“उस वक़्त ईरान, कैमरून, घाना और निजेर से आए श्रद्धालु जा रहे थे. जो लोग शैतान को पत्थर मारकर लौट रहे थे, उसी रूट पर लोग दूसरी तरफ़ से पत्थार मारने जा रहे थे.

दोनों गुटों के बीच टक्कर जैसी स्थिति हो गई. जो लोग बीच में थे, वो फँस गए.”

ब्रितानी डॉक्टर

कल रात मैं मुज़दालिफ़ा से जमरात अपने परिवार के साथ ट्रेन से आ रहा था. ट्रेन के आने में देरी हो गई, इसलिए स्टेशन पर काफ़ी भीड़ इकट्ठा हो गई. जब रात को दो बजे ट्रेन आई तो अफ़रा तफ़री मच गई.

सफ़र के दौरान, ट्रेन बीच में ही कहीं रुक गई. लोग नाराज़ हो रहे थे और कुछ लोगों ने इमरजेंसी गेट खोलने की भी कोशिश की क्योंकि गर्मी और थकान की वजह से हमारा दम घुट रहा था. आख़िरकर हम जमरात पहुँचे और पत्थर मारने की प्रथा ख़त्म करने के बाद हम चले गए.

कुछ घंटे बाद हमें पता चला कि वहाँ इतने लोगों की मौत हो गई.

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