'पिता अब नहीं हैं, मां पढ़ी-लिखी नहीं हैं'

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ़ेसबुक के मुख्यालय में मार्क ज़करबर्ग के साथ फ़ेसबुक चैट में कहा है कि वे भारत को 20 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाना चाहते हैं.

सवाल-जवाब के सिलसिले के दौरान मोदी माता-पिता के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए बहुत भावुक हो गए.

नरेंद्र मोदी ने कहा, "हम बहुत ग़रीब थे और मेरी मां को पड़ोसियों के घरों में बर्तन साफ़ करने का काम करना पड़ता था."

ये बताते हुए मोदी का आँखे छलक पड़ीं. मोदी ने कहा, "एक मां अपने बच्चों को बड़ा करने के लिए कितना कष्ट उठाती है....ये सिर्फ़ मोदी की कहानी नहीं है. भारत में ऐसी लाखों माएं हैं, जिन्होंने अपने बच्चों के सपनों के लिए अपना पूरा जीवन त्याग दिया."

फ़ेसबुक मुख्यालय में ही मौजूद बीबीसी संवाददाता ब्रजेश उपाध्याय के अनुसार जब मोदी कई मिनट तक भावुक होकर कुछ बोल न पाए, तो वहाँ मौजूद भारतीयों समेत अनेक लोगों की आंखे भी नम हो गईं.

'फ़ेसबुक के इतिहास में भारत'

मोदी से वार्ता शुरू करते हुए ज़करबर्ग ने कहा कि फ़ेसबुक के इतिहास में भारत का अहम योगदान है.

उन्होंने बताया कि स्टीव जॉब्स के कहने पर उन्होंने भारत की यात्रा की थी और दुनिया को बेहतर ढंग से समझा था.

मोदी ने कहा कि मार्क ज़करबर्ग ने जो भारत के बारे में कहा है उससे दुनियाभर में लोग प्रेरित होंगे.

मोदी ने कहा, "मेरा सपना है कि भारत 20 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बने. भारत के पर्यटन के क्षेत्र में आगे बढ़ने की विशाल संभावनाए हैं."

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सोशल मीडिया की अहमियत पर ज़करबर्ग के सवाल के जवाब में मोदी ने कहा, "जब मैंने सोशल मीडिया को अपनाया तब मुझे अंदाज़ा नहीं था कि मैं कभी प्रधानमंत्री बनूंगा या सोशल मीडिया का इस्तेमाल प्रशासन के लिए किया जाएगा."

मोदी ने कहा, "मेरी नज़र में सोशल मीडिया ने गाइड बनने का काम किया है. मैं अपनी शिक्षा की कमी सोशल मीडिया से पूरी कर पाया."

मोदी ने कहा, "सोशल मीडिया से जनता और सरकार के बीच खाई कम करने में मदद मिलती है. पहले नेता पांच साल तक नतीजा का इंतज़ार करते थे...आज सोशल मीडिया के कारण रोज़ ही वोटिंग होती है. लोग सरकार को बता सकते हैं कि वह कहां ग़लती कर रही है. सोशल मीडिया काम की गति को बढ़ा देता है."

उन्होंने कहा, "मैं दुनिया के नेताओं से यही कहूंगा कि सोशल मीडिया से दूर होकर आप कुछ नहीं पाओगे."

'कूटनीति में भी कारगर'

मोदी ने यह भी कहा कि वो चीनी सोशल मीडिया पर भी एक्टिव हैं और वहां चीनी भाषा में लोगों से बात करते हैं.

मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया कूटनीति का नया रूप है. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने चीनी प्रधानमंत्री को चीनी भाषा में जन्मदिन की बधाई दी तो वो वॉयरल हो गई.

उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने इसराइल में त्यौहार की बधाई हिब्रू में दी तो उसका जवाब उन्हें हिंदी में मिला. उनका कहना था कि सोशल मीडिया विश्व को एक परिवार में बदल रहा है.

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Image caption बंगलुरू से आए वीर ने पूछा कि गांवों तक इंटरनेट कैसे पहुंचाया जाएगा.

बंगलुरू से वीर ने सवाल किया, "आप भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी कैसे बढ़ाएंगे?"

मोदी ने जवाब दिया कि भारत में जितना अहम हाइवे हैं उतने ही अहम आइवे होंगे. उन्होंने कहा कि देश में छह लाख गाँव हैं और वो कोशिश कर रहे हैं कि अगले पाँच सालों में सभी गांवों को फ़ाइबर नेटवर्क से जोड़ देंगे.

उनका कहना था कि पहले नदियों के किनारे शहर बसते थे अब ऑप्टिकल फ़ाइबर नेटवर्क के किनारे बसेंगे.

मेक इन इंडिया

मेक इन इंडिया पर पूछे गए सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि भारत सबसे बड़ा बाज़ार हैं और भारत में कामयाब होने की अपार संभावनाए हैं. उन्होंने कहा कि पिछले महीने में अमरीका से होने वाले निवेश में 87 फ़ीसदी की बढ़ौत्तरी हुई है.

मोदी ने कहा, "हमारे पास थ्री डी हैं- डेमोक्रेसी, डिमांड और डेमोग्राफ़िक डिविडेंड. हम वाइब्रेंट समाज हैं. चौथी डी है डीरेग्यूलराइज़ेशन."

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Image caption मोदी ने तकनीकी जगत के दिग्गजों से मुलाक़ात भी की है.

उन्होंने कहा, "हम सभी चीज़ों को सरकार के नियंत्रण से हटा रहे हैं. सरकार छोटी कर रहा हूँ. सरकार का काम होटल चलाना नहीं है."

महिला सुरक्षा

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महिलाओं की सुरक्षा से संबंधी सवाल पर मोदी ने कहा कि भारत की संस्कृति में ही महिला को देवी का रूप दिया गया है.

उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपने आर्थिक उद्देश्यों को पूरा कर लेगी तो भारत अपनी पचास फ़ीसदी आबादी को घर में क़ैद नहीं रख सकेंगे.

कई सवाल पूछे ही नहीं गए

मार्क ज़करबर्ग ने तेरह सितंबर को मोदी के साथ फ़ेसबुक टाउनहॉल का ऐलान किया था. उनकी इस पोस्ट पर चालीस हज़ार से ज़्यादा टिप्पणियां आई हैं.

लोग इस मौक़े पर लगातार अपने सवाल पोस्ट कर रहे थे लेकिन नरेंद्र मोदी और ज़करबर्ग से किए गए कई सवाल पूछे ही नहीं गए.

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जहाँ पत्रकार फ़्रेंक हुज़ूर ने भारत में धर्मनिरपेक्षता की आवाज़ उठाने वालों के फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल कथित तौर पर बंद किए जाने का सवाल उठाया था, तो कई लोगों ने मोदी की पार्टी-संस्था की आलोचना करने वालों के प्रति सोशल मीडिया पर असहिष्णुता बढ़ने की बात कही थी.

थेनमोझी सुंदरराजन ने मोदी सरकार के ग़ैर सरकारी संगठनों के ख़िलाफ़ सख़्त रवैया अपनाने पर सवाल किया था.

एलेक्स जीवर्गीस ने भारत में मांस खाने पर लगे प्रतिबंधों पर सवाल उठाते हुए विशेष समूहों के हितों को सीधे या परोक्ष रूप से बढ़ावा देने की बात रखी थी. प्रकाश शिवाकोटी ने नेपाल भारत संबंधों पर प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया था.

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