काम के घंटे घटाए, मुनाफ़ा 25 फ़ीसदी बढ़ा

  • 2 अक्तूबर 2015
इमेज कॉपीरइट Thinkstock

दिन में कितने घंटे काम करना फ़ायेदमंद होता है, आपके और आपकी कंपनी दोनों के लिए? ज़्यादातर कर्मचारी अमूमन कम घंटे काम करना पसंद करते हैं, वहीं कंपनियां काम के घंटे बढ़ाने की कोशिश करती हैं.

लेकिन हाल ही में द गार्डियन में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिदिन छह घंटे का काम ना केवल कर्मचारियों के लिए फ़ायदेमंद है बल्कि कंपनी के लिए भी उत्पादकता के लिहाज से बेहतरीन है.

स्वीडन के एक नर्सिंग होम स्वार्टेडालेंस ने बिना सैलरी घटाए, अपने कर्मचारियों के काम के घंटे कम कर दिए. उनका मानना ये था कि हर जगह लोगों के काम के घंटे लंबे हैं लेकिन ये ज़रूरी नहीं कि वहां कर्मचारियों की उत्पादकता ज़्यादा हो या फिर उपभोक्ता संतुष्ट या खुश हों.

छह महीने के अंदर ही इसका नतीजा दिखने लगा. छह घंटे प्रतिदिन काम (आठ घंटे प्रतिदिन के मुकाबले) करने वाली नर्सें तनावमुक्त महसूस करने लगीं और कहीं ज्यादा उत्साह और ऊर्जा से काम करने लगीं.

बस छह घंटे काम

गार्डियन अख़बार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इन नर्सों की देखभाल करने की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ.

इस उदाहरण के बावजूद शोधकर्ताओं का मानना है कि इस आधार पर एकदम किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. लेकिन इससे जाहिर तो हुआ ही कि कम घंटे काम करने से कामकाजी माहौल सुधरता है.

लेकिन ऐसी किसी कोशिश से कंपनी पर वित्तीय दबाव जरूर बढ़ सकता है. मसलन स्वीडिश नर्सिंग होम को ही शिफ़्ट पूरी करने के लिए 14 नए कर्मचारी रखने पड़े ताकि जरूरत की दूसरी शिफ्टों पर कर्मचारी मौजूद हों.

टोयोटा, ऐप डेवेलपरों का प्रयोग

ऐसा केवल स्वीडिश नर्सिंग होम ने किया हो, ऐसी बात नहीं है. गार्डियन के मुताबिक गोथेनबुर्ग के टोयोटा सर्विस सेंटर, इंटरनेट स्टार्टअप ब्राथ और ऐप डेवलपर फिलिमुंडुस ने अपने यहां कर्मचारियों के काम के घंटे कम कर दिए और इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा.

इन जगहों पर काम करने वाले कर्मचारियों के पारिवारिक समय और कामकाजी ज़िंदगी का संतुलन बेहतर हो गया है. इससे उनकी उत्पादकता भी बढ़ी है और कंपनियों को भी अपने शीर्ष नेतृत्व को चुनने में आसानी होने लगी है.

गोथेनबुर्ग स्थित टोयोटा सर्विस सेंटर्स के प्रबंध निदेशक मार्टिन बैनेक ने गार्डियन को बताया कि कंपनी का मुनाफ़ा काम के घंटे कम करने के बाद 25 फ़ीसदी तक बढ़ गया है.

तनाव बढ़ गया

वैसे काम के घंटे कम करने का मतलब ये नहीं है कि काम भी कम हो गया हो. ज़ाहिर है कि कामकाजी समय के दौरान तो इससे कुछ तनाव बढ़ ही जाएगा.

दक्षिण कोरिया के शोधकर्ताओं ने पाया कि सप्ताह में 44 घंटे काम करने के बदले 40 घंटे काम करने और शनिवार को अवकाश देने के वादे ने कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ा दिया.

न्यूजर्सी स्थित वर्कप्लेस स्ट्रैटेजिस्ट कैली विलियम्स यॉस्ट के मुताबिक काम के घंटे कम करने से फायदा होता है.

लेकिन उनका ये भी कहना है कि हमें ये भी समझना होगा कि यह हर किसी के लिए या हर कंपनी के लिए कामयाबी का रास्ता नहीं हो सकता. यह काफी हद तक काम की प्रकृति और कार्यक्षेत्र की जरूरतों पर निर्भर करता है.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार