पुरुषों से ज़्यादा कैसे जीती हैं महिलाएं?

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महिलाओं की उम्र पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा होती है. औसतन तीन साल ज़्यादा. ये बहुत पुरानी जानकारी है. लेकिन ऐसा क्यों होता है, इसके बारे में अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है.

हालांकि इस दिशा में थोड़ी बहुत जानकारी मिलनी शुरू हुई. पहले लोग मानते थे कि पुरुष पहले काम करना शुरू कर देते हैं. चाहे वो खान में काम करना हो या फिर खेतों में काम करना. इससे उनके शरीर पर ज़्यादा दबाव और चोट का सामना करना पड़ता है.

लेकिन यह सच नहीं था. अगर ऐसा होता है तो कम से कम वैसे पुरुष और महिलाएं एकसमान उम्र तक जीतीं जो शारीरिक श्रम वाले काम नहीं करते हैं.

वास्तविकता यह है कि महिलाओं और पुरुषों के बीच उम्र का अंतर समाज में हो रहे बदलावों के बावजूद बना हुआ है. स्वीडन का उदाहरण लें, जहां विश्वसनीय ऐतिहासिक आंकड़े उपलब्ध हैं.

एकसमान दिखा पैर्टन

1800 में महिलाओं की औसत उम्र 33 साल होती थी, तब पुरुषों की औसत उम्र थी 31 साल. आज के समय में महिलाओं की औसत उम्र 83.5 साल हो गई है जबकि पुरुषों की 79.5 साल है. दोनों ही मामलों में महिलाएं पुरुष की तुलना में 5 फ़ीसदी ज्यादा उम्र तक जी रही हैं.

हाल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है, "महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज़्यादा समय तक जीवित रहती हैं. उनके जीवित रहने की उम्मीद ज़्यादा होती है. शुरुआती जीवन में, बाद में भी और संपूर्ण जीवन के बाद भी. यह उन हर देश में एकसमान देखा गया है जहां इसके आंकड़े मौजूद हैं. मानव जीवविज्ञान में ऐसा पैटर्न दूसरा नहीं दिखता."

यह भी आसानी से साबित नहीं किया जा सकता कि पुरुष अपने शरीर का ज़्यादा बेजा इस्तेमाल करते हैं. हालांकि ध्रूमपान, शराब सेवन और अत्यधिक भोजन के सेवन का असर कुछ देशों में जरूर दिखता है.

रुस में महिलाओं की तुलना में पुरुष की मौत 13 साल पहले हो जी हैं क्योंकि वे बहुत ज़्यादा शराब और सिगरेट का इस्तेमाल करते हैं.

दिलचस्प तथ्य ये भी है मानव के अलावा चिंपांजी, गोरिल्ला, बंदर और लंगूर जैसी प्रजाति के जीवों में भी मादा, नर के मुक़ाबले ज़्यादा समय तक जीवित रहती है.

जीव विज्ञान का असर

ग्रेट ब्रिटेन के न्यू कैसल यूनिवर्सिटी में उम्र बढ़ने का जीव विज्ञान पर अध्ययन कर रहे टॉम किर्कवुड कहते हैं, "सामाजिक जीवन और जीवनशैली का थोड़ा बहुत भले असर हो लेकिन इसका हमारे शरीर के जीव विज्ञान से गहरा नाता है."

इस नजरिए में संभावना दिखती हैं, क्योंकि महिलाएं और पुरुषों के जींस में अंतर होता है. महिलाओं में दो एक्स क्रोमोसोम होते हैं जबकि पुरुषों में एक एक्स और एक वाय क्रोमोसोम होता है.

इस अंतर का असर शायद कोशिकाओं की उम्र पर पड़ता है. दरअसल दो एक्स क्रोमोसोम होने से महिलाओं के पास हर जीन की डबल कॉपी मौजूद होती है, अगर एक एक्स क्रोमोसोम खराब हो गया तो दूसरा काम आ जाएगा. पुरुषों में इस तरह का बैकअप नहीं होता. यानी पुरुषों की कोई कोशिका अगर ख़राब हुई तो बीमार पड़ने का ख़तरा बढ़ जाएगा.

एक दूसरा नजरिया भी है, जो महिलाओं के हृदय गति से जुड़ा है. इस धारणा के मुताबिक मासिक धर्म चक्र के दूसरे हॉफ़ में महिलाओं की हृदय गति बढ़ जाती है, यानी उन्हें नियमित व्यायाम का फ़ायदा वैसा ही मिलता है, यही वजह है कि महिलाओं में हृदय संबंधी रोग होने की आशंका कम होती है.

नर कोशिकाओं पर ख़तरा

इसके अलावा लंबे लोगों के शरीर में ज़्यादा कोशिकाएं होती हैं, इसका उनमें हानिकारक म्यूटेशन विकसित होने की आशंका भी ज्यादा होती है. बड़ा शरीर ज़्यादा ऊर्जा खपत करता है और इन सबसे कोशिकाएं भी प्रभावित होती है. अमूमन पुरुष महिलाओं की तुलना में लंबे होते हैं लिहाजा उनकी कोशिकाओं को ज़्यादा नुकसान झेलना पड़ता है.

इसके अलावा एक और वजह है जो टेस्टोस्टेरोन पर निर्भर है. इससे पुरुषों के गुण विकसित होती है, ज़्यादा गंभीर आवाज़, छाती पर बाल इसके चलते ही विकसित होते हैं. इस धारणा को मज़बूती देने वाले सबूत कोरिया के जोसन साम्राज्य के इंपीरियल कोर्ट से मिले हैं.

कोरिया वैज्ञानिक हान-नाम पार्क ने हाल ही में 190वीं शताब्दी में इस कोर्ट से मिले विस्तृत आंकड़ों को देखा तो उसमें उन्हें 81 हिजड़ों के बारे में भी जानकारी मिली. पार्क के आंकड़ों के मुताबिक इन हिजड़ों का जीवन अमूमन 70 साल का था, जो अदालत के पुरुषों की औसत आयु 50 साल से काफी ज़्यादा है.

पुरुषत्व का असर

पार्क इस नतीजे पर भी पहुंचे कि उस दौर में हिजड़ों में आम व्यक्ति की तुलना में 100 साल की उम्र तक पहुंचने की संभावना 130 गुना ज़्यादा थी. हालांकि इसको पुष्ट करने वाले दूसरे अध्ययन अभी तक सामने नहीं आया है लेकिन यह देखा गया है कि अंडकोष के बिना जीव की उम्र ज़्यादा होती है.

हालांकि इसकी असली वजह का पता नहीं चल पाया है लेकिन यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के डेविड जेम्स के मुताबिक इसका पुरुषत्व से कोई संबंध जरूर होगा.

वे इसके लिए अनुमान आधारित सबूत देते हैं कि 20वीं शताब्दी में अमरीका में कुछ मानसिक रोगियों के इलाज के क्रम में उनकी नसबंदी कर दी गई थी और वे भी कोरिया हिजड़ों की तरह ही लंबे समय तक जीवित रहे. लेकिन यह तभी हुआ जब 15 साल से पहले की उम्र में नसबंदी की गई.

अध्ययन की जरूरत

दूसरी ओर महिलाओं का सेक्स हार्मोन भी उनके लिए बेहतर साबित होता है. दरअसल ओस्ट्रोजेन नामक यह हार्मोन एंटीआक्सीडेंट होता है, यह शरीर की कोशिकाओं पर दबाव लाने वाले हानिकारक रासायनों को नष्ट कर देता है.

बहरहाल, वैज्ञानिकों की राय में इस पहलू पर अभी विस्तृत अध्ययन की जरूरत है, तब जाकर महिलाओं की उम्र ज़्यादा होने की कोई ठोस वजह मिलेगी.

टाम किर्कवुड कहते हैं, "हमें खुले दिमाग से महिलाओं और पुरुषों के हार्मोन के अंतर और दूसरे कारकों पर विचार करना चाहिए." हालांकि पिछले कुछ समय में इस दिशा में हो रहे अध्ययनों से महिलाओं की औसत उम्र ज़्यादा होने की वजहों के संकेत तो मिले ही हैं.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.

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