स्पेस उपक्रमों में निवेश क्यों कर रहे हैं लोग?

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मंगल ग्रह पर पिछले समय में पानी होने के सबूत मिलने के बाद अंतरिक्ष के प्रति लोगों की दिलचस्पी अचानक से बढ़ी है.

सालों से अंतरिक्ष और उसकी खोजबीन की दुनिया काफी हद तक लंबी दूरी तक देखने वाली टेलीस्कोप और साइंस फिक्शन लिखने वाले लेखकों तक ही सीमित थी.

इससे कभी आम आदमी भी जुड़ेंगे, किसी ने नहीं सोचा था. लेकिन अब अंतरिक्ष में चल रही खोजबीन एक व्यवसायिक उपक्रम में तब्दील हो रही है.

हाल फिलहाल तक, अंतरक्षि की सभी गतिविधियां अमरीकी और रूसी सरकार के वित्तीय अनुदान से संचालित होती थीं.

अमरीका में नई तकनीक की खोजबीन का काम नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) और रूस में यह काम रूसी फेडरल स्पेस एजेंसी (रोसकॉस्मोस) के जिम्मे है.

पिछले कुछ सालों की आर्थिक मंदी के दौर में अंतरिक्ष में होने वाली खोजबीन के लिए बजट में कटौती हुई है.

1960 के मध्य में अमरीका अपने बजट का 4.4 फीसदी अंतरिक्ष संबंधी खोजबीन पर खर्च करता था. लेकिन अब यह महज़ 0.47 फीसदी रह गया है.

इसीलिए अंतरिक्ष संबंधी अनुसंधान में नासा और अन्य सरकारी एजेंसियों की मोनोपोली घट रही है.

निवेश के बेहतर विकल्प

इससे निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प खुल गए हैं और अचानक से ही उद्यमी, वेंचर केपिटलिस्ट, पूंजीपति और व्यक्तिगत लोगों की अंतरिक्ष के क्षेत्र में भागीदारी बढ़ गई है.

हालांकि अंतरिक्ष यात्रियों को लिए मिल्की वे के बाहरी हिस्सों तक पहुंचने वाले मिशन अभी भी दूर हैं लेकिन उन कंपनियों में निवेश किया जा सकता है जो सस्ते रॉकेट और छोटे सेटेलाइट बना रही हैं.

हालांकि अभी इसमें अवसर कम हैं और निवेश के रिस्क कई हैं, लेकिन आक्रामक निवेशक इस उभरते क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं.

सैन फ्रांसिस्को स्थित बेसेमर वेंचर पार्टनर्स के डेविड कोवेन के मुताबिक इस क्षेत्र में निवेश का अब सही समय दूर नहीं है.

वो कहते हैं, "मनुष्य को ऐसी प्रजाति बनना होगा जो एक ग्रह से दूसरे ग्रह तक आता जाता है. जाहिर है कई कुछ दांव पर है."

कोवेन कोई पगलाए हुए स्टार ट्रेक फ़ैन नहीं हैं, वो एक वेंचर कैपिटलिस्ट हैं और उस फर्म में काम करते हैं जिसने अंतरिक्ष संबंधी कारोबार करने वाली कई कंपनियों में निवेश किया है.

इन कंपनियों में ग्लासगो स्थित सैटेलाइट कंपनी स्पायर भी है, जो समुद्री जहाज़ों और मौसम की गतिविधियों पर नजर रखती है. ऐसी ही एक और कंपनी न्यूज़ीलैंड स्थित रॉकेट लैब है जो छोटे सैटेलाइट को लाँच करने वाला सिस्टम बनाती है.

चार साल में 1000 कंपनियां सक्रिय हुईं

वैसे ये सच है कि स्पेस इंडस्ट्री अभी भी दूसरे इंडस्ट्री के मुकाबले में छोटी है, लेकिन ये तेजी से बढ़ रही है.

फ्लोरिडा की न्यू स्पेस ग्लोबल के सह संस्थापक रिचर्ड रॉकेट के मुताबिक, "2011 में स्पेस इंडस्ट्री में 100 कंपनियां थी, अब इनकी संख्या 1000 हो गई है और इनमें 700 प्राइवेट बिजनेस करने वाली कंपनियां हैं."

न्यू स्पेस ग्लोबल दुनिया भर में स्पेस सेक्टर पर नजर रखती है. अभी इस सैक्टर में काम करने वाली 70 फ़ीसदी कंपनियां अमरीकी हैं लेकिन इसके यूरोप में भी तेजी से बढ़ने के आसार हैं.

साल दर साल इस सैक्टर की आमदनी पर नजर रखना मुश्किल है लेकिन रॉकेट के मुताबिक इस क्षेत्र में तेजी से हो रहा निवेश एक संकेत है.

रॉकेट कहते हैं, "पिछले पांच सालों में वे जिन कंपनियों पर नजर रख रहे हैं, उनमें सालाना 30 फ़ीसदी की दर से निवेश बढ़ा है. इस बिज़नेस में अरबों का निवेश में हो रहा है."

आईपीओ जारी हो रहे हैं

अब इस क्षेत्र में निवेश करने के कई तरीके सामने आए हैं, मसलन एयरोस्पेस कंपनियों जैसे एयरबस और बोइंग के शेयर में निवेश करना या फिर स्पेस और सैटेलाइट टैक्नालॉजी रिसर्च और डेवेलपमेंट में काम करने वाली कंपनियों जैसे वर्जिन ग्रुप में निवेश करना.

वर्जिन ग्रुप की कंपनी वर्जिन गैलैक्टिक स्पेस ट्रैवल के क्षेत्र में काम कर रही है. ज़ाहिर है इस क्षेत्र में निवेश लंबी अवधि का खेल है.

एलॉन मस्क, दुनिया के मशहूर अनुसंधानकर्ताओं में गिने जाते हैं. वे टेसला कंपनी के संस्थापक हैं और पेपाल के सह-संस्थापक है. उन्होंने लोगों को मार्स पर भेजने को अपना मिशन बनाया है. उनकी कंपनी स्पेसएक्स नासा से भी सस्ती दर पर रॉकेट और स्पेसशिप बनाती है.

इस कंपनी ने स्पेसशिप की कीमतों को करीब आधा कर दिया है, 10 करोड़ डॉलर से 5.5 करोड़ डॉलर तक. इसकी वजह ये थी कि कंपनी ने 80 फ़ीसदी रॉकेट को इन-हाउस बनाना शुरू किया जबकि नासा दूसरी कंपनियों से सामान खरीदती थी.

इन दिनों स्पेसएक्स के बने रॉकेट का इस्तेमाल इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक ज़रूरी सामान पहुँचाने के लिए किया जा रहा है लेकिन भविष्य में ये अंतरिक्ष यात्री भी स्पेस में भेज सकता है.

स्पेस टूरिज़म से उम्मीद

वहीं मार्स वन ने लोगों को मंगल ग्रह पर भेजने को अपना लक्ष्य बनाया है. मंगल ग्रह पर चार लोगों को भेजने का अनुमानित खर्च 6 अरब डॉलर होगा.

फ्लोरिडा स्थित इक्विटी एनालिस्ट और रेमंड जेम्स एंड एसोसिएट्स के क्रिस क्विल्टी कहते हैं, "फिलहाल हम एक साल में अंतरिक्ष में 100 रॉकेट भेजते हैं. अगर चंद्रमा पर मनुष्य को बेस बनाना है तो ये संख्या ख़ासी बढ़ानी होगी."

निवेशक स्पेसएक्स में सीधे निवेश नहीं कर सकते हैं, लेकिन म्यूचल फंड के जरिए इस कंपनी में निवेश किया जा सकता है.

मस्क अकेले उद्यमी नहीं है जो अंतरिक्ष में अपना पैसा लगा रहे हैं. रिचर्ड ब्रैनसन की वर्जिन गैलैक्टिक को उम्मीद है कि वह अंतरिक्ष की पहली टूरिज़म कंपनी बनेगी. स्पेस टूरिज़्म के ज़रिए स्पेस का एक दौरा करने के लिए टिकट का अनुमानित खर्च ढाई लाख डॉलर होगा.

हालांकि पिछले दिसंबर महीने में इस कंपनी का एक अंतरिक्ष यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें एक पायलट की मौत हो गई थी. ऐसे में कंपनी की छवि पर भी सवाल उठने लगे हैं.

कब मिलेगी बेहतर रिर्टन

स्पेस में हो रहे प्रयोगों में सैटेलाइट बनाने का काम अहम है. जब सरकार अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेजती थी तो औसत ख़र्च एक अरब अमरीका डॉलर था, लेकिन कैलिफोर्निया की एक कंपनी स्काईबॉक्स इमेजिंग ने क्यूबसेट नामक सैटेलाइट महज 50 लाख डॉलर में बना दिया. इस कंपनी को गूगल ने जुलाई, 2004 में 50 करोड़ डॉलर में खरीदा था.

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कोवन के मुताबिक सैनफ्रांसिस्को की प्लेनेट लैब छोटे सैटेलाइट को 50 हज़ार डॉलर में विकसित करने पर काम कर रही है.

ये सैटेलाइट अंतरिक्ष से पृथ्वी की तस्वीरें लेने का काम करते हैं जिसके ग्राहक खेती, खनन, रियल एस्टेट, तेल एवं प्राकृतिक गैस के सेक्टर की कंपनियां हैं. इसके अलावा सस्ते रॉकेट बनाने का भी कारोबार है. न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिड आर्बिटल एटीके जैसी कंपनियां रॉकेट बनाने का काम करती हैं.

रॉकेट कहते हैं कि निवेशक गूगल और एयरबस जैसी कंपनियों में निवेश कर सकते हैं जो अंतरिक्ष में निवेश कर रही हैं. माना जा रहा है कि अगले पांच साल में इस क्षेत्र में कारोबार करने वाली कंपनियों के लिस्टिड होने की संख्या बढ़ेगी. इसमें कुछ अपना आईपीओ भी जारी करेंगी.

(यह स्टोरी कारोबारी पत्रकारिता के लिए बीबीसी गाइडलेंस के मुताबिक तैयार की गई है. आप पूरी गाइडलाइंस यहां देख सकते हैं)

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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