सीरियाई लड़की के कार्टून पर क्यों मचा बवाल?

  • 11 अक्तूबर 2015
इमेज कॉपीरइट TOSHIKO HASUMI

"मैं एक साफ़-सुथरी सुरक्षित ज़िंदगी जीना चाहती हूँ, स्वादिष्ट खाना खाना चाहती हूँ, बाहर जाना चाहती हूँ, अच्छे कपड़े पहनना चाहती हूँ, एक शानो-शौकत वाली ज़िंदगी जीना चाहती हूँ......और यह सब किसी और की क़ीमत पर पाना चाहती हूँ."

"मेरे पास इसे पूरा करने को लेकर एक तरीक़ा है कि मैं शरणार्थी बन जाऊं"

ऊपर के कार्टून में लिखी हुई ये पंक्तियां दक्षिणपंथी जापानी कलाकार तोशीको हासुमी ने पिछले महीने फ़ेसबुक पर पोस्ट की थीं.

इस पोस्ट को हटाने को लेकर Change.org नाम की ऑनलाइन याचिका पर अबतक 10,000 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं.

यह याचिका जिस फ़ेसबुक अकाउंट से डाली गई है, उसका नाम है 'डॉन्ट अलाउ रेसिज्म ग्रुप'.

इस अकाउंट के हवाले से दावा किया गया है कि बहुत सारे लोगों ने इस कार्टून के ख़िलाफ़ रिपोर्ट की है.

इन लोगों ने मांग की हैं, "फ़ेसबुक को इस तस्वीर को सीरियाई शरणार्थियों के नस्लवादी अपमान के रूप में देखना चाहिए."

अनुरोध

इमेज कॉपीरइट AFP

हालांकि 'जापान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक़, फ़ेसबुक ने कार्टून नहीं हटाई और कहा कि यह सामुदायिक दिशा-निर्देश के ख़िलाफ़ नहीं है जबकि जापानी कलाकार ने खुद ही कार्टून को हटा लिया है.

लेकिन उन्होंने इसे पोस्ट करने की अपनी मंशा का बचाव किया है.

उन्होंने यह तस्वीर हटाते हुए 'सेव द चिल्ड्रेन' संस्था के लिए काम करने वाले जोनाथन हयाम्स के अनुरोध का हवाला दिया.

जोनाथन ने इससे पहले ट्वीट किया था, "अपने दुराग्रह को दिखाने के लिए एक मासूम बच्ची की इस तस्वीर का किसी के द्वारा इस्तेमाल करना क्षुब्ध और दुखी करने वाला है."

छह साल की बच्ची की यह तस्वीर जोनाथन हयाम्स ने लेबनान के शरणार्थी कैंप में ली थी.

तोशीको हासुमी ने बीबीसी ट्रेंडिंग से कहा कि वो याचिका पर हस्ताक्षर करने वाले को वामपंथी कार्यकर्ता मानती हैं.

एकरूप समाज

इमेज कॉपीरइट JONATHAN HYAMS

उन्होंने कहा, "मैंने कई राजनीतिक कॉमिक्स के रेखाचित्र बनाए हैं जो उनके पक्ष में नहीं जाती. इसलिए उन्होंने मुझे निशाना बनाया है."

उन्होंने आगे यह भी कहा, "मैं इस बात से इनकार नहीं करती कि कैंप में बुरे हालात में रह रहे शरणार्थी भी हैं लेकिन कुछ ऐसे भी 'नकली शरणार्थी' हैं जो अपने फ़ायदे के लिेए पीड़ित बनने का ढोंग कर रहे हैं. "

जापान ने सीरियाई और इराक़ी शरणार्थियों के लिए 81 करोड़ डॉलर की मदद की पेशकश की थी लेकिन प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे ने किसी भी शरणार्थी को अपने यहां जगह देने की पेशकश नहीं की थी.

जापान ने पिछले साल 5000 संभावित शरणार्थियों में से सिर्फ 11 को अपने यहां आने दिया था.

जापान जातीय आधार पर दुनिया में सबसे एकरूप समाज है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार